वॉट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर के लिए ज़रूरी होगा आधार? SC ने मांगा सोशल साइट्स से जवाब

News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 1:51 PM IST
वॉट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर के लिए ज़रूरी होगा आधार? SC ने मांगा सोशल साइट्स से जवाब
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूजर प्रोफाइल को आधार से जोड़ने को लेकर मामले ट्रांसफर करने की मांग कर रही फेसबुक (Facebook) की याचिका पर केंद्र, गूगल (Google), ट्विटर (Twitter) और दूसरे सोशल नेटवर्किंग साइट्स को नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूजर प्रोफाइल को आधार से जोड़ने को लेकर मामले ट्रांसफर करने की मांग कर रही फेसबुक (Facebook) की याचिका पर केंद्र, गूगल (Google), ट्विटर (Twitter) और दूसरे सोशल नेटवर्किंग साइट्स को नोटिस जारी किया है.

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  • Last Updated: August 20, 2019, 1:51 PM IST
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फेसबुक (Facebook), ट्विटर (Twitter) और वॉट्सऐप (WhatsApp) जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर अकाउंट्स को भी क्या आधार (Aadhar) से लिंक कराना जरूरी हो सकता है. यूजर प्रोफाइल आधार से जोड़ने को लेकर सुप्रीम कोर्ट फेसबुक की उस याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है, जिसमें विभिन्न हाईकोर्ट्स में पेंडिंग केसेज़ को शीर्ष अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की गई है. बता दें कि इस मामले में चार याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसमें 2 मद्रास में,1 ओडिसा में और 1 मुंबई की है.

फेसबुक की याचिका पर मांगा जवाब
यूजर प्रोफाइल को आधार से जोड़ने को लेकर मामले ट्रांसफर करने की मांग कर रही फेसबुक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, गूगल, ट्विटर और दूसरे सोशल नेटवर्किंग साइट्स को नोटिस जारी किया है. उधर वॉट्सऐप की तरफ से कहा गया कि पॉलिसी मामले को हाई कोर्ट कैसे तय कर सकती है. ये संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है. वॉट्सऐप की तरफ से कहा गया कि सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए, जिससे वह इस मामले को सुने और निपटारा करें.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक-आधार को लिंक करने से जुड़े मामलों की सुनवाई मद्रास हाईकोर्ट में जारी रहने की अनुमति दी, लेकिन कहा कि अंतिम फैसला नहीं दिया जाएगा.



फेसबुक की तरफ से भी मांग की गई कि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ही करें. फेसबुक का कहना है कि ये निजिता का मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक से पूछा मद्रास हाई कोर्ट में कितने याचिका लंबित है. फेसबुक की तरफ से 2 याचिकाओं के बारे में बताया गया. सोशल मीडिया की तरफ से कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट सुने और आदेश जारी करें. ये ग्लोबल मामला है तो ऐसा ना हो कि एक हाई कोर्ट कुछ आदेश पारित करें और दूसरा हाई कोर्ट कुछ और.

कपिल सिब्बल ने कहा कि केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर सोशल मीडिया का पक्ष पूछना चाहिए. इसपर AG ने कहा कि इस मामले को लेकर कोर्ट में 18 दिनों तक सुनवाई हुई है, वहां फेसबुक की तरफ से कहा गया था कि वो हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को मानते हैं. AG का कहना है कि हर उस तरह के मैसेज जिसमें आपराधिक ऑफेंस शामिल हो या जिससे खुदखुशी को बढ़ावा मिलता है उसे बनाने वाले का पता चलना ही चाहिए.
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इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि आज इस तरह के App मौजूद है जिसमें, ‘मेरे नंबर का इस्तेमाल ही कर MSG भेजा जा सकता है. कल को ऐसा हो तो मैं सलाखों के पीछे चला जाऊंगा’. ये बेहद गंभीर मामला है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट को खुद इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फेसबुक, वॉट्सऐप, गूगल, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित सभी याचिकाकर्ताओं और सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसके लिए 2 सितंबर तक का समय दिया गया है. बताया गया कि 13 सितंबर को इस मामले की अगली सुनवाई होगी.

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First published: August 20, 2019, 12:55 PM IST
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