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सोशल मीडिया में कमेंट पर अब नहीं होगी जेल

सोशल मीडिया में कमेंट पर अब नहीं होगी जेल

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर कमेंट करने को लेकर अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66ए को रद्द कर दिया है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर कमेंट करने को लेकर अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66ए को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करार दिया। इसी धारा के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट को लेकर गिरफ्तारी होती थी। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे जिसमें कमेंट के चलते लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

    ये था मामला

    बता दें कि 2012 मुंबई में फेसबुक पर शिवसेना नेता बाल ठाकरे के खिलाफ कमेंट करने पर 2 लड़कियों रेणु श्रीनिवासन और शाहीन को गिरफ्तार किया गया था। लड़कियों की गिरफ्तारी के बाद देशभर में विरोध जताया गया था। इसके बाद श्रेया सिंघल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की आजादी है लिहाजा ऐसे मामलों में गिरफ्तारी न की जाए।

    तब इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश देते हुए दिशा निर्देश जारी किया था कि ऐसे मामलों में एसपी रैंक के अधिकारी ही गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं। हाल के दिनों में यूपी में एक मामला सामने आया था जिसमें एसपी नेता और अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ सोशल मीडिया पर कमेंट करने वाले एक छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    पीड़िता ने कहा, फैसले से खुश

    इस फैसले पर पालघर की पीड़िता रेणु श्रीनीवासन ने कहा कि मैं बहत खुश हूं। इंसाफ मिल गया है। ये फ्रीडम ऑफ स्पीच की जीत है। अगर ये कानून नहीं निकाला होता तो लोग सोशल मीडिया में कमेंट करने से डरते। अब लोग खुलकर बोलेंगे।

    याचिकाकार्ता श्रेया सिंघल ने कहा कि इस एक्ट का दुरुपयोग हो रहा था। सरकार का अपना राजनीतिक एजेंडा है। ये जनता की बड़ी जीत है। मैं ये नहीं कहती कि दूसरों को बदनाम करना चाहिए। लेकिन अब लोगों को जेल जाने से डर नहीं लगेगा।

    ये है फैसले की वजह

    वहीं कोर्ट के इस फैसले पर आईबीएन डिजिटल के एडिटर जयदीप कर्णिक ने कहा कि ये फैसला बहुत महत्वपूर्ण है। इसी एक्ट के तहत पालघर में और कुछ दूसरी गिरफ्तारियां हुई थीं। सबसे महत्वपूर्ण है कि कोर्ट ने देखा कि अधिकतर राजनीतिक प्रभाव में गिरफ्तारियां हुई हैं। 66ए में ये नहीं बताया गया है कि आपत्तिजनक क्या होगा।

    क्या हैं मायने

    इस फैसले का मतलब ये है कि पहले पुलिस को किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार था। लेकिन अब वो अधिकार खत्म हो गया है। पर इसका मतलब ये नहीं है कि कोई भी कुछ इंटरनेट पर लिख दे। अगर कोई आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट पर दिखती है तो कोई भी व्यक्ति उसके खिलाफ अदालत में आईपीसी की आम धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करवा सकता है।

    Tags: Social media, Supreme Court

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