बिहार के लिए आज कयामत की रात, ना जाने कितने होंगे हैरान कुछ घंटों के बाद!

बिहार के लिए आज कयामत की रात, ना जाने कितने होंगे हैरान कुछ घंटों के बाद!
आज की रात कई दिग्गज नेताओं को नींद आएगी। तकरीबन एक महीने से ज्यादा चले पाटलीपुत्र के महासंग्राम में कई नेताओं आमने-सामने रहे।

आज की रात कई दिग्गज नेताओं को नींद आएगी। तकरीबन एक महीने से ज्यादा चले पाटलीपुत्र के महासंग्राम में कई नेताओं आमने-सामने रहे।

  • Last Updated: November 8, 2015, 12:34 AM IST
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नई दिल्ली। आज की रात कई दिग्गज नेताओं को नींद आएगी। तकरीबन एक महीने से ज्यादा चले पाटलीपुत्र के महासंग्राम में कई नेताओं आमने-सामने रहे। बदजुबानी, आरोप और प्रत्यारोप का दौर खूब चला, लेकिन अब सब थककर बेचैन हैं क्योंकि आज की रात कयामत की।

बिहार के रण पर हर कोई अपनी जीत का दांव ठोक रहा है कि बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन ने भी दो-तिहाई बहुमत से जीतने का दावा किया, तो वहीं आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव ने भी महागठबंधन के खाते में 190 सीटें आने की घोषणा की। बड़े दिलचस्प मोड़ पर है बिहार की सियासत, जब आज सुबह जैसे-जैसे चुनावी नतीजे आ रहे होंगे वैसे-वैसे कई नेताओं की किस्मत बनाएंगे और बिगाड़ेंगे के संकेत मिलने लगेंगे।

लेकिन जो नेता इस चुनाव से सीधे जुड़े हैं वो हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव। राज्य सरकार वर्सेज केंद्र सरकार के बीच का लड़ाई बन चुके इस चुनाव में इन नेताओं की हार-जीत बिहार की नहीं, देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बढ़-चढ़कर प्रचार किया। उन्होंने बिहार में महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनाव से ज्यादा रैलियां की हैं। दरअसल, बीजेपी लोकसभा चुनाव और अन्य विधानसभा चुनावों की तरह ही यहां भी मोदी लहर के सहारे जीत का परचम लहराना चाहती है। बीजेपी के राष्ट्राध्यक्ष अमित शाह ने भी बिहार चुनाव में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। उनकी जीत से पार्टी और संघ में उनकी ताकत और बढ़ेगी। साथी दूसरा कार्यकाल आसानी से मिलेगा।
महागठबंधन खेमे की बात करें तो मुख्यमंत्री नीतिश के लिए भी चुनाव बेहद खास है, क्योंकि उनकी जीत से राष्ट्रीय राजनीति उनकी में धमक बढ़ेगी, जिससे 2019 के चुनाव में PM मोदी का विकल्प बन सकते हैं। वहीं आरजेडी मुखिया लालू यादव ने पूरी साख ही दांव पर लगी है। उनके दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव बिहार के रण में हैं।

चुनाव के शुरुआती दौर में सियासी दलों ने जनता को लुभाने की भरपूर कोशिश, लेकिन धीरे-धीरे लुभावने वादों को दौर खत्म होता चला गया। चुनाव के आखिर आखिरी पड़ाव में गो-हत्या, सांप्रदायिकता, आरक्षण, ध्रुवीकरण और जातिवाद जैसे मुद्दों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। गौर ये तो चुनावी मतगणना के बाद ही पता चलेगा की किसकी रणनीति फेल हुई और किसकी पास। गौरतलब है कि बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव पांच चरणों में संपन्न हुआ।
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