आगरा को सांप्रदायिक रंग में रंगने का प्रयास विफल

आगरा को सांप्रदायिक रंग में रंगने का प्रयास विफल
लेकिन अब तक अधिकतर स्थानीय लोगों ने उनके भावनात्मक भाषणों में बहुत कम रुचि दिखाई है.

लेकिन अब तक अधिकतर स्थानीय लोगों ने उनके भावनात्मक भाषणों में बहुत कम रुचि दिखाई है.

  • Agencies
  • Last Updated: March 2, 2016, 10:20 AM IST
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पिछले हफ्ते विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक नेता की हत्या के बाद हिंदूवादी कार्यकर्ता इस हत्या को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश में हैं, लेकिन ताज नगरी के अधिकतर स्थानीय लोगों पर इसका असर नहीं देखा गया. आगरा के सांसद और केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया समेत भाजपा नेताओं के उग्र भाषणों के बाद बजरंग दल, शिवसेना और विहिप जैसे हिंदूवादी संगठन उत्तेजित हो गए हैं.

लेकिन अब तक अधिकतर स्थानीय लोगों ने उनके भावनात्मक भाषणों में बहुत कम रुचि दिखाई है.

एक समुदाय विशेष को गाली देते भाजपा के नेताओं का जब एक वीडियो सामने आया और मीडिया और विपक्षी दलों ने जब इस पर सवाल उठाया तो भाजपा के नेताओं ने कहा कि उन्होंने कोई भी आपत्तिजनक बात नहीं कही है.



पिछले हफ्ते हत्या के शिकार विहिप नेता अरुण माथुर की श्रद्धांजलि सभा में नफरत फैलाने वाले दिए गए भाषणों का आगरा प्रशासन ने कोई नोटिस लिया है, ऐसा नहीं लग रहा है. गोकशी के खिलाफ सक्रिय माथुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
प्रशासन का कहना है कि हिंदूवादी गुटों के खिलाफ कोई खास शिकायत नहीं मिली है.

पुलिस सूत्रों का कहना है कि हिंदूवादी कार्यकर्ता आगरा के ग्रामीण इलाकों में बैठकें कर रहे हैं और इस हत्या को मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं.

बताया जाता है कि बहुजन समाज पार्टी के विधायक जुल्फीकार अली भुट्टो ने कहा है कि माथुर की हत्या पैसे के विवाद में हुई है, किसी राजनीतिक षड्यंत्र के तहत नहीं.
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