उत्तराखंड: जंगलों में लगी आग से भारी नुकसान, जलकर खाक हुईं दुर्लभ जड़ी-बूटिंयां

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग से होने वाले नुकसान अब सामने आने लगे हैं। पर्यावरण और जंगली जानवरों के बाद सबसे ज्यादा नुकसान दुर्लभ जड़ी-बूटियों का हुआ है, जो उत्तराखंड के सघन जंगलों में ही पाई जाती हैं।

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नई दिल्ली। उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग से होने वाले नुकसान अब सामने आने लगे हैं। पर्यावरण और जंगली जानवरों के बाद सबसे ज्यादा नुकसान दुर्लभ जड़ी-बूटियों का हुआ है, जो उत्तराखंड के सघन जंगलों में ही पाई जाती हैं। इन जड़ी-बूटियों के आग में जल जाने से आयुर्वेदिक औषधियों के उत्पादन पर तो बुरा प्रभाव पड़ेगा ही, कई ऐसी दवाईयों का निर्माण भी ठप पड़ जाएगा, जिनके लिए आयुर्वेदिक उद्योग उत्तराखंड पर ही निर्भर है।

धू धू कर जल रहे इस जंगल में केवल पेड़-पौधे ही नहीं जले बल्कि इस आग में जीवन देने वाली कई बेशकीमती जड़ी-बूटियां भी स्वाहा हो गईं। कई ऐसी जड़ी बूटियां जिसे लुप्त प्राय माना जाता है तो कई ऐसी जो दुर्लभ हैं। आर्युवेदिक औषधियों और इसके निर्माण के लिहाज से उत्तराखंड को देश की सबसे बेहतरीन जगहों में सुमार किया जाता है। ऐसे में जंगल की इस आग ने आयुर्वेदाचार्यों की चिंता बढ़ा दी है।

राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण की मूर्छा का जिक्र धर्मग्रंथों में है। तब संजीवनी की तलाश में निकले हनुमान ने पर्वत को ही उठा लिया था। कहा जा रहा है कि मूर्छित लक्ष्मण को नई जिंदगी देने वाली संजीवनी बूटी भी जलकर भस्म हो चुकी है। हालांकि संजीवनी बूटी खोजे जाने के दावों पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन देवभूमि के जंगलों में लगी आग में बेशकीमती जड़ी-बूटियां खत्म हो गईं, इसमें कोई शक नहीं।



उत्तराखंड में सालम पंजा, कुटकी, अतीस, कूट और जज्वार जैसी दुलर्भ औषधियां मिलती हैं। अब इनके दोबारा बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए खासी मेहनत की जरूरत होगी। जानकारों का कहना है कि इस पर समग्र नीति बनानी होगी। ऐसा नहीं हुआ तो इससे बनने वाली दवाएं काफी महंगी हो जाएंगी और बहुत मुमकिन है कि इनका उत्पादन ही बंद हो जाए। सबको अब प्रकृति के फिर से अपने मूल स्वरूप में लौटने का इंतजार है। उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग अभी भी पूरी तरह बुझी नहीं है। हालांकि सूबे के बड़े इलाके में बारिश होने से आग पर काबू पाना आसान हो गया है। लेकिन इस आग से पर्यावरण से लेकर इंसान और वन्य जीवों पर जो असर पड़ा है, उसकी जल्द भरपाई मुमकिन नहीं।
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