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यूपी चुनाव कवरेज : गन्ने का भुगतान नहीं होने से परेशान किसानों ने कहा- 11 फरवरी तक नहीं हुआ हल तो करेंगे आत्मदाह

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस पार्टी को खाप पंचायतें सपोर्ट कर दें उसकी जीत लगभग तय मानी जाती है. लेकिन, विधानसभा चुनावी माहौल उनके भी कुछ सवाल हैं. इन्हीं सवालों को टटोलने बुढ़ाना पहुंची है news18hindi.com (ओम प्रकाश, नासिर हुसैन, नित्यानंद पाठक और गौरी शंकर) की टीम.

  • News18 हिंदी
  • | February 01, 2017, 21:25 IST
    LAST UPDATED 5 YEARS AGO

    हाइलाइट्स

    14:47 (IST)

    गन्ने का भुगतान नहीं मिलने से परेशान किसानों ने सरकार को हिदायत दी. कहा- 11 फरवरी तक हमारा भुगतान नहीं किया गया तो हम आत्मदाह करेंगे और इसका जिम्मदार सिर्फ और सिर्फ यूपी सरकार ही होगी.


    14:42 (IST)

    किसानों का कहना है- शुगर मिल समय से पैसा कभी नहीं देता. बावजूद इसके हम गन्ने को बोने के लिए मजबूर हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां गन्ने की खेती का ही होना है. अगर यहां किसी और फसल की खेती होती तो हम कब का गन्ना बोना छोड़ चुके होते.


    14:33 (IST)

    पिछले 19 दिनों से धरने पर बैठे एक किसान का कहना है- देखिए जी, नियम तो ये है कि गन्ना पहुंचने के 14 दिन के अंदर हमारा भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा होता कहां है? काम छोड़कर यहां धरना देना पड़ रहा है.


    14:22 (IST)

    इस बारे में किसान नेता सुभाष बालियान का कहना है- सवा दौ सौ करोड़ रुपए हमारे बकाया है. हम सभी को शुगर मिल की ओर से सिर्फ आश्वासन मिले, पैसे नहीं. सबसे बड़ी बात ये है कि चीनी स्टॉक में है और मिल इसकी कालाबाजारी करने की फिराक में है. ऐसे में मिल को तो फायदा होगा, लेकिन हम तो तरह-तरह की जलालत झेलने को मजबूर हैं ना. हमारी फैमिली परेशान है. 


    14:14 (IST)

    यूपी चुनाव LIVE कवरेज : यहां 19 दिनों से धरना दे रहे गन्ना किसान, कल सीएम अखिलेश यादव की रैली को दिखाएंगे काले झंडे. किसानों के इस फैसले से सरकारी महकमा हिला हुआ है.


    बुढ़ाना। पश्चिमी यूपी में चुनाव हो और खाप पंचायतों का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? यूपी, हरियाणा और राजस्थान के चुनाव में खाप पंचायतों का कुछ ज्यादा ही दखल माना जाता है. जिस पार्टी को ये सपोर्ट कर दें उसकी जीत लगभग तय मानी जाती है. लेकिन, विधानसभा चुनावी माहौल उनके भी कुछ सवाल हैं. इन्हीं सवालों को टटोलने बुढ़ाना पहुंची है news18hindi.com (ओम प्रकाश, नासिर हुसैन, नित्यानंद पाठक और गौरी शंकर) की टीम. खाप पंचायतों ने विधानसभा चुनाव को लेकर फेसबुक लाइव पर अपनी बात रखी.

    खाप पंचायतें ही लेती हैं अधिकतर फैसले
    यूपी, हरियाणा और राजस्थान में अब भी कई ऐसे जिले हैं, जहां के समाज में खाप पंचायतें ही सुप्रीम हैं. ये पारंपरिक पंचायतें हैं.

    पश्चिमी यूपी में कौन-कौन सी हैं महत्वपूर्ण खाप पंचायतें
    - गठवाला
    - दैसवाल
    - तोमर
    - बालियान
    - हुड्डा
    - बत्तीसा

    क्या हैं खाप पंचायतें?
    रिवायती पंचायतें कई तरह की होती हैं. खाप पंचायतें भी पारंपरिक पंचायते हैं, लेकिन इन्हें कोई आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है. एक गोत्र या फिर बिरादरी के सभी गोत्र मिलकर खाप पंचायत बनाते हैं. ये फिर 5-5 की हो सकती है या 20-25 गांवों की भी हो सकती है.

    सर्वसम्मति से होता है फैसला, मानना पड़ता है सभी को
    जो गोत्र जिस इलाके में अधिक प्रभावशाली होता है, उसी का उस खाप पंचायत में ज्यादा दबदबा होता है. कम जनसंख्या वाले गोत्र भी पंचायत में शामिल होते हैं लेकिन प्रभावशाली गोत्र की ही खाप पंचायत में चलती है. सभी गांव निवासियों को बैठक में बुलाया जाता है, चाहे वे आएं या न आएं...और जो भी फैसला लिया जाता है उसे सर्वसम्मति से लिया गया फैसला बताया जाता है और अमूमन इसका कोई विरोध नहीं करता.

    सवा दौ सौ करोड़ भुगतान की मांग को लेकर धरने पर किसान
    इस बारे में किसान नेता सुभाष बालियान का कहना है- सवा दौ सौ करोड़ रुपए हमारे बकाया है. हम सभी को शुगर मिल की ओर से सिर्फ आश्वासन मिले, पैसे नहीं. सबसे बड़ी बात ये है कि चीनी स्टॉक में है और मील इसकी कालाबाजारी करने की फिराक में है. ऐसे में मिल को तो फायदा होगा, लेकिन हम तो तरह-तरह की जलालत झेलने को मजबूर हैं ना. हमारी फैमिली परेशान है.
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