जेल से पुलिस वैन में ऐसे कोर्ट जाते हैं कैदी, फिर कैसे उनके हाथ लगे तमंचे और मिर्च

जेल से कोर्ट ले जाने के दौरान बेहद सख्त चौकसी बरती जाती है. लेकिन सवाल यह है कि मुरादाबाद में जो कैदी पुलिस कस्टडी में थे उनके हाथ तमंचे और मिर्च कैसे पहुंचे.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 3:21 PM IST
जेल से पुलिस वैन में ऐसे कोर्ट जाते हैं कैदी, फिर कैसे उनके हाथ लगे तमंचे और मिर्च
फाइल फोटो- पुलिस वैन में कैदी कोर्ट से जेल ले जाए जा रहे थे.
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Updated: July 18, 2019, 3:21 PM IST
बुधवार को मुरादाबाद के चंदौसी में पुलिस वैन के अंदर कैदियों ने दो पुलिस वालों की गोली मारकर हत्या कर दी. इससे पहले उनकी आंखों में लाल मिर्च झोंक दी. घटना को अंजाम देने के बाद तीनों कैदी एक पुलिस वाले की रायफल भी लूटकर ले गए. तीनों ही कैदी मर्डर केस की सुनवाई के लिए जेल से कोर्ट ले जाए गए थे. कोर्ट से जेल लौटते वक्त यह हादसा हुआ. हालांकि जेल से कोर्ट ले जाने के दौरान बेहद सख्त चौकसी बरती जाती है. लेकिन सवाल यह है कि मुरादाबाद में जो कैदी पुलिस कस्टडी में थे उनके हाथ तमंचे और मिर्च कैसे पहुंचे.

इसलिए वैन से कोर्ट लाए गए थे कैदी

एक इंजीनियर के अपरहण और हत्या के मामले में तीन अपराधी मुरादाबाद की जेल में बंद हैं. बुधवार को इस केस की सुनवाई चंदौसी की कोर्ट में होनी थी. सुबह के वक्त अन्य 18 कैदियों संग हत्या के आरोपी तीनों कैदियों को भी पुलिस वैन से कोर्ट ले जाया गया. कोर्ट में पेशी होने के बाद शाम को वैन से इन्हें वापस जेल लाया जा रहा था.

तभी इंजीनियर वाले मामले के तीनों आरोपियों ने वैन के अंदर गेट के पास बैठे दो सिपाहियों की आंखों में लाल मिर्च झोंक दी. सिपाही संभलकर हमले का जवाब दे पाते इससे पहले ही दो कैदियों ने तमंचे निकाल लिए. सिपाहियों पर फायरिंग कर दी. वैन में बैठे दूसरे सिपाहियों को भी डरा दिया.

फतीकात्मक फोटो- तमंचे से गोली मारने से पहले आंखों में मिर्च झोंकी गई थी.


जेल से कोर्ट तक ऐसे लाए जाते हैं कैदी

जेल में हर कैदी का रिकॉर्ड रखा जाता है कि किस मामले में उसकी कब और कहां पेशी होनी है. उसी हिसाब से सुबह पुलिस लाइन से जेल आने वाली वैन में कैदियों को बैठा दिया जाता है. कोर्ट में एक हवालात बनी होती है. जब तक कोर्ट में केस का नम्बर नहीं आता कैदी इसी हवालात में बंद रहते हैं.
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कोर्ट तक भी पुलिस के पहरे में ही जाते हैं. नियमानुसार इस दौरान कैदियों से किसी को भी न तो बातचीत करने की अनुमति होती है और न ही कोई भी खाने-पीने का सामान देने की. लेकिन इसके बाद भी ऐसे नज़ारे दिख ही जाते हैं जब कैदियों से उनके घर वाले, दोस्त या कोई और बात कर रहा होता है या फिर कुछ खाने के लिए दे रहा होता है.

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First published: July 18, 2019, 3:21 PM IST
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