इटावा के जिला अस्पताल में बुजुर्ग मरीज के हाथ-पैर बांधकर इलाज की तस्वीर वायरल होने से मचा हड़कंप

अनजान बुजुर्ग का हाथपैर बांधकर इलाज करने की फोटो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की किरकिरी हो रही है.
अनजान बुजुर्ग का हाथपैर बांधकर इलाज करने की फोटो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की किरकिरी हो रही है.

इटावा (Etawah) के डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय सयुंक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में एक बुजुर्ग मरीज के हाथ पैर बांधकर इलाज (Treatment) की तस्वीरें सामने आने के बाद डॉक्टरों (Doctors) और अस्पताल स्टाफ की जमकर किरकिरी हो रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 22, 2020, 8:42 PM IST
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इटावा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में इटावा (Etawah) में डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय सयुंक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड से एक मरीज के हाथ पैर बांधकर इलाज (Treatment) की तस्वीरें सामने आने के बाद डॉक्टरों (Doctors) और अस्पताल स्टाफ की करतूतों ने हर किसी को हिलाकर रख दियाहै. तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि यहमं पर मरीजों के साथ जानवरों के जैसा व्यवहार किया जाता है.

असल में आज तड़के सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर इटावा मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में बेहोशी की हालत में एंबुलेंस चालक एक 65 वर्षीय अनजान बुजुर्ग को ले करके आता है. जिसको देखने के बाद डॉक्टर यह संदेह जताते हैं कि इस बुजुर्ग को नशा खिलाकर के मूर्छित कर दिया गया है. पहचान के अभाव में उसका इलाज तो शुरू किया जाता है, लेकिन इलाज के नाम पर उसके साथ जिस तरह का व्यवहार अस्पताल में किया जा रहा है वह अपने आप में हैरान करने वाला है.

जिस तरह का व्यवहार बुजुर्ग मरीज के साथ में अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्टाफ कर रहे हैं उसे देखकर लगता है कि मरीज अपने बेड पर पड़ा तड़फ रहा है. इस अस्पाताल का यह कोई पहला मामला नही हैं, इससे पहले भी इस तरीके के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें कभी भी इस तरीके से सामने नहीं आई हैं. जब यह तस्वीरें सामने आई हैं तो अस्पताल के  डॉक्टरों और स्टाफ के कामकाज करने के तरीकों पर सवाल उठना लाजमी है. बुजुर्ग अनजान मरीज के हाथ और पैर बांधकर इलाज करने की तस्वीरें सामने आने के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के डॉक्टर और अस्पताल एक दूसरे का चेहरा देखते हुए नजर आ रहे हैं.



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डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉ. भूपेंद्र यादव का कहना है कि जब कभी भी जहर खुरानी का कोई मरीज अस्पताल में आता है तो उसके साथ तीमारदार के तौर में कोई भी शख्स नहीं हुआ करता है. ऐसी स्थिति में उसका इलाज करना बेहद ही मुश्किल हो जाता है खास कर तब जब उसको बोतल आदि लगाई जाती है. इसलिए मरीज को जल्दी से जल्दी दुरस्त करने के लिए उसके हाथ और पैरों को बांध करके उसको ठीक करने की कोशिश की जाती है. ऐसा ही कुछ इस मरीज के साथ भी हुआ है. यह सामान्य प्रक्रिया है इसको बहुत ही गंभीर प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए.

बेशक डॉ. भूपेंद्र यादव ने अपनी ओर से इस तरह की सफाई दे है, लेकिन किसी भी सरकारी अस्पताल में वार्ड ब्वॉय की तैनाती इसी बाबत की जाती है कि वह मरीज के साथ में पूरी सहानुभूति बरतेगा और अनजान मरीज के साथ में तो खास करके उसको किसी भी तरीके की कोई कठिनाई आदि नहीं होने देगा, लेकिन भला हो डॉ. भूपेंद्र यादव का जो इस तरीके की सफाई देकर अपने आपको और अस्पताल के अन्य स्टाफ को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं. अब जरूरत इस बात की बन पड़ती है कि अस्पताल के अन्य अनजान मरीजों के साथ इस तरीके का अमानवीय कृत्य ना हो इसके लिए बड़े अफसरों को डॉक्टरों और स्टाफ पर निगाह रखने की जरूरत महसूस हो रही है.
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