10 साल बाद वाराणसी के दशाश्वमेध घाट में हुई ऐसी गंगा आरती, नम हुई सबकी आंखे
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10 साल बाद वाराणसी के दशाश्वमेध घाट में हुई ऐसी गंगा आरती, नम हुई सबकी आंखे
वाराणसी में लोगों के दिमाग में 10 साल पुरानी तस्‍वीरें कौंधने लगी हैं.

कभी श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहने वाले इस घाट में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा दिखाई दिया. बुधवार को केवल आरती की परंपरा ही निभाई गई.

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वाराणसी. आज बनारस (Varanasi) के दशाश्वमेध घाट साल 2010 की कड़वीं यादें ताजा हो गईं. साल 2010 में घाट पर हुए सीरियल बम ब्लास्ट के बाद जिस तरीके से सन्नाटा पसरा था, आज कोरोना (Coronavirus) के खौफ के चलते भी कुछ वैसा ही नजारा दिखाई दिया. विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में आम श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंध लगा हुआ है. जिसके चलते, दस साल बाद आज पहली बार दशाश्‍वमेघ घाट पर सात की जगह केवल एक ब्राहमण द्वारा गंगा आरती की.

कभी श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहने वाले इस घाट में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा दिखाई दिया. बुधवार को केवल आरती की परंपरा ही निभाई गई. आरती करने वाले सात ब्राहमण के अलावा केवल एक ब्राहमण ने ही गंगा आरती और गंगा पूजन की परंपरा निभाई. यही नहीं, गंगा आरती करने वाला एकलौता ब्राहमण भी कोरोना के खौफ से मास्क लगाए दिखाई दिया. आपको बता दें कि दशाश्वमेध घाट जाने वाले रास्ते को सड़क से ही बेरीकेटिंग लगाकर बंद कर दिया गया.

भारी पुलिस बल की तैनाती
वहां गंगा आरती स्थगित होने की सूचना भी चस्पा कर दी गई थी. घाट के चारों तरफ पुलिस फोर्स ही नजर आ रही थी. वहां तैनात पुलिस कर्मी एनाउंसमेंट के जरिए लोगों से अपील कर रहे थे कि वो यहां से चले जाएं. गंगा आरती स्थगित कर दी गई है. उल्‍लेखनीय है कि आमतौर पर जिस वक्त दशाश्वमेध घाट पर पैर जगह की भी जगह नहीं बचती थी, वहां आस सन्नाटा पसरा था.
तीन दिन के लिए बंद हुआ चुका है घाट


गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि इससे पहले ये नजारा साल 2010 में तीन दिन उस वक्त दिखाई दिया था, जब बनारस में घाट पर सीरियल बम ब्लास्ट हुआ था. उस वक्त सुरक्षा के लिहाज से तीन दिन के लिए कुछ इसी तरह से सांकेतिक आरती की गई थी. आम श्रद्धालुओं के लिए गंगा आरती बैन कर दी गई थी. गंगा आरती की भव्यता कम होने और श्रद्धालुओं की एंट्री पर बैन लगने के बाद पर्यटक और यहां के लोग काफी निराश है.

सभी कर रहे यह कामना
सभी भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कोरोना का असर कम हो और गंगा आरती अपनी पुरानी भव्यता पर वापस लौटे. शाम की गंगा आरती के साथ ही अस्सी घाट पर होने वाले सुबह ए बनारस के कार्यक्रम को भी आम श्रद्धालु और पर्यटकों के लिए बैन कर दिया गया है. यही नहीं, बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए विदेशियों के बनारस शहर के अंदर घूमने पर भी रोक लग गई है.

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