नोटबंदी में किए एक ट्वीट ने इस MBA की छात्रा की बदल दी किस्मत!

Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: November 23, 2017, 2:43 PM IST
नोटबंदी में किए एक ट्वीट ने इस MBA की छात्रा की बदल दी किस्मत!
मतदान प्रचार करती जूही प्रकाश

आगरा के वार्ड नंबर 9 से पार्षद प्रत्याशी जूही प्रकाश को कतई इस बात का नदाजा नहीं था कि नोटबंदी के दौरान किए गए एक ट्वीट उन्हें राजनीति में ले आएगा.

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आगरा के वार्ड नंबर 9 से पार्षद प्रत्याशी जूही प्रकाश को कतई इस बात का अंदाजा नहीं था कि नोटबंदी के दौरान किए गए एक ट्वीट उन्हें राजनीति में ले आएगा.

24 साल की एमबीए पोस्ट ग्रेजुएट जूही प्रकाश नगर निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ रही हैं. इतना ही नहीं जूही ने अपने वार्ड के विकास के लिए नौकरी भी छोड़ दी है.

गौरतलब है कि पिछले साल नोटबंदी के दौरान जूही एक ट्वीट के बाद सुर्ख़ियों में आईं थीं. जूही ने अपने ट्वीट में लिखा था, “ मैं पैसे निकालने के लिए लाइन में नहीं खड़ी हो सकती, क्योंकि मेरे पिताजी बीमार हैं.” इस ट्वीट में जूही ने पीएम नरेन्द्र मोदी और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को टैग किया था.

अखिलेश ने जूही के ट्वीट को संज्ञान में लिया और कैंसर पीड़ित पिता के इलाज के लिए जूही को 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी दी. बस यहीं से जूही की किस्मत बदल गई. अखिलेश द्वारा किए गए इस आर्थिक मदद के बाद जूही समाजवादी पार्टी से जुड़ीं और इनकी मेहनत भी रंग लाई. अखिलेश यादव ने जूही को आगरा के वार्ड नंबर-9 से प्रत्याशी बनाया है.

जूही ने अपनी जीत के लिए जी जान से मेहनत की है और अपनी जीत के प्रति आश्वस्त भी दिख रही हैं.

जूही का कहना है कि, “यह स्वाभाविक है कि अखिलेश भैया राजनीति में मेरे आदर्श हैं. मैं उन्हीं किए पदचिन्हों पर चलना चाहती हूं. मैंने जीत के लिए बहुत मेहनत की है. इसके अलावा क्षेत्र के लोग मेरे पिता को भी अच्छी तरह जानते हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मेरी काफी मदद कर रहे हैं और मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं.”

नोटबंदी के समय की बात करते हुए जूही कहती हैं, ‘ मेरे पिता की सर्जरी 10 नवंबर को होनी थी. उससे दो दिन पहले नोटबंदी की घोषणा कर दी गई. हम सब परेशान थे. लिहाजा मैंने ट्वीट किया. सौभाग्यवश तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उस ट्वीट को संज्ञान में लिया. उन्होंने मुझे अपने पैरों पर खड़े रहने के साथ ही मुश्किल की घड़ी में डटे रहने के लिए प्रोत्साहित भी किया.
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आज जूही महिलाओं के लिए एक एनजीओ चला रही हैं. वे कहती हैं, ‘मैं इन गलियों में रही हूं. मैं यहां की समस्याओं से भलीभांति वाकिफ हूं. पीने के पानी से लेकर सफाई तक की समस्या है. जीतने के बाद मैं इन सभी मुद्दों पर काम करूंगी.

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First published: November 23, 2017, 2:42 PM IST
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