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Agra Poet:- 18 वीं सदी के सबसे बड़े शायर को अपने ही शहर में नहीं मिली इज्जत !

Agra Poet:- 18 वीं सदी के सबसे बड़े शायर को अपने ही शहर में नहीं मिली इज्जत !

थाना

थाना ताजगंज क्षेत्र में बनी मशहूर शायर नजीर अकबराबादी की क़ब्र

नजीर अकबराबादी सर्व धर्म के कवि थे. उन्होंने सभी धर्मों को समान समझा .सभी ईश्वर को एक माना और यही बड़ी गलती उनकी बेकद्री का कारण भी बनी.आज उनकी मजार पर अतिक्रमण हो चुका है. आवारा पशु घूमते हैं ,समय की मार से उनकी मजार बहुत ही खराब हालत में है.

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    18 वीं सदी के सबसे बड़े शायर. जिनके काव्य कोश में लगभग दो लाख से ज्यादा छंद शामिल है. जिसे नज्म का पितामह कहा जाता है. ऐसे शायर को कला साहित्य औऱ प्रेम की नगरी ने ही बेगाना कर दिया. हम बात कर रहे हैं नजीर अकबराबादी की, जिनका जन्म यूं तो दिल्ली में हुआ था. लेकिन उनका आखिरी समय आगरा में बीता. कृष्ण को लेकर तमाम शायरियां और नज़्म लिखी .लेकिन आगरा शहर को इतना कुछ देने के बावजूद भी नजीर को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वो हक़दार हैं .आज उनकी मजार पर अतिक्रमण हो चुका है. आवारा पशु घूमते हैं ,समय की मार से उनकी मजार बहुत ही खराब हालत में है.

    <b>दिल्ली में हुआ था जन्म लेकिन आगरा में बीता आख़री समय.</b>

    नजीर अकबराबादी का जन्म 1735 में दिल्ली में हुआ और उनका आखिरी समय ज्यादातर आगरा में गुजरा .1830 में उन्होंने दुनिया से अलविदा किया.लेकिन जाते-जाते नज़ीर लोगों के लिए और साहित्य प्रेमियों के लिए खजाना छोड़ गए.
    नज़ीर अकबराबादी जिन का असली नाम वली मुहम्मद था.उनकों उर्दू ‘नज़्म का पिता’ माना जाता है .वह आम लोगों के कवि थे .उन्होंने आम जीवन, ऋतुयों, त्योहारों, फलों, सब्जियों आदि विषयों पर लिखा .वह धर्म-निरपेक्षता की ज्वलंत उदाहरण हैं. कहा जाता है कि उन्होंने लगभग दो लाख रचनायें लिखीं. परन्तु उनकी छह हज़ार के करीब रचनायें मिलती हैं और इन में से 600 के करीब ग़ज़लें हैं.

    <b>नजीर की कब्र के आसपास हो गया है कब्जा, मज़ार पर घूमते रहते हैं आवारा जानवर</b>
    नजीर और उसके परिवार की लगभग एक दर्जन से ज्यादा कब्र थाना ताजगंज क्षेत्र के मलकू गली में है . ताजमहल से महज़ 200 मीटर की दूरी पर उनकी मजार है. लेकिन फिर भी उसे संरक्षित नहीं किया गया . उनकी मजार के आसपास लोगों ने कब्जा कर लिया है. क़ब्र पर आवारा पशु घूमते रहते हैं. इसके साथ ही आसपास के इलाके के लोग अपने पालतू जानवर भी क़ब्र से सटा कर बांध देते हैं .आवारा पशु आए दिन उनकी मजार पर मल मूत्र त्यागते रहते है .

    <b>धार्मिक कट्टरता का शिकार हुए नज़ीर अकबराबादी।</b>
    नजीर अकबराबादी सर्व धर्म के कवि थे. उन्होंने सभी धर्मों को समान समझा.सभी ईश्वर को एक माना और यही बड़ी गलती उनकी बेकद्री का कारण भी बनी .इस्लाम के लोगों को उनके द्वारा लिखी गई नज्म पसंद नहीं आई . खासकर उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के लिए कई ग़ज़ल, नज़्म ,शायरियां लिखी. गुरु नानक देव के लिए भी उन्होंने कई शायरियां लिखी. जिस वजह से उस महान कवि को कुफ़्र (यानी कि ईश्वर को न मानने वाला )कहा गया.जिसकी वजह से इस्लाम धर्म के लोगों ने उन्हें अपने मजहब से हमेशा के लिए दरकिनार कर दिया . इसी धार्मिक झुकाव के चलते नज़ीर अकबराबादी मरने के बाद भी वह इज्जत नहीं पा सके जो उन्हें मिलनी चाहिए थी .

    <b>[हरीकान्त शर्मा की रिपोर्ट]</b>

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