• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • आखिर क्यों आगरा की जूता मंडी हुई राजनीति का शिकार? करोड़ों की लागत से तैयार हुई बिल्डिंग हो रही है जर्जर

आखिर क्यों आगरा की जूता मंडी हुई राजनीति का शिकार? करोड़ों की लागत से तैयार हुई बिल्डिंग हो रही है जर्जर

आखिर

आखिर क्यों आगरा की जूता मंडी हुई राजनीति का शिकार, करोड़ों की लागत से तैयार हुई बिल्डिंग हो रही है जर्जर .

21 करोड़ की लागत से जूता मंडी बनकर तैयार हुई थी. सारी सुविधाएं दी गई हैं कहने को यह पूरी मंडी 6870 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी हुई है .तत्कालीन शहरी विकास एवं लोक निर्माण विभाग के मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने जूता मंडी का शुभारंभ किया था .

  • Share this:

    बड़े पैमाने पर आगरा में जूता बनाने का कारोबार किया जाता है . यहां के जूते इतने मशहूर है कि देश विदेशों तक भेजे जाते हैं. विदेशों में भी आगरा का जूता खूब पसंद किया जाता है . यही बड़ी वजह है कि आगरा के लगभग हर कोने में आपको जूतों की दुकान मिल जाएगी . यहां बहुत सस्ती रेटों पर जूते उपलब्ध होते हैं . आगरा में ज्यादातर छोटे कारीगर इसी जूता उद्योग से जुड़े हुए हैं . हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी इसी उद्योग से चलती है .

    जूता व्यवसाय को पंख लगाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने रखी थी जूता प्रदर्शनी की नींव 
    आगरा के जूता को देश विदेशों तक पहुंचाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2008 में जूता मंडी की नींव रखी थी . कहा जाता है कि उस वक्त मायावती के चुनावी घोषणा पत्र में आगरा के लिए लेदर पार्क व एक जूता प्रदर्शनी थी . इसी की बदौलत 21 करोड रुपए लागत से आगरा के पंचकुइयां से कोठी मीना बाजार जाने वाले रोड पर यह प्रदर्शनी बनाई गई.

    यह प्रदर्शनी आगरा के बिल्कुल सेंटर में है जहां से आसानी से दूसरे शहरों व राज्यों से व्यापारी इस प्रदर्शनी तक पहुंच सके . इस प्रदर्शनी को आगरा में स्थापित करने का उद्देश्य इतना था कि छोटे और बड़े जूता कारोबारी एक छत के नीचे आकर व्यापार कर सके . हर वैरायटी हर क्वालिटी का जूता व्यापारियों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो, जिस वजह से आगरा को एक नई पहचान मिले.

    एडीए के दांव पेचों में फस कर रह गए जूता व्यवसाई और उनका कारोबार 
    कहने को तो 2010 में जूता मंडी का उद्घाटन हो चुका था. एडीए का जूता प्रदर्शनी पर पूरा कंट्रोल रहता है . व्यापारियों का आरोप है कि एडीए के द्वारा मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई . पीने के लिए पानी नहीं है तो सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है.शौचालयों का तो बहुत ही ज्यादा बुरा हाल है . इसके साथ ही इस जूता मंडी में दुकान लेने की जो प्रक्रिया है वह बेहद पेचीदा है . छोटा व्यापारी ADA के चक्कर लगाने में ही लगा रहता है लेकिन उसे दुकान बमुश्किल ही मिल पाती है.

    सबसे पहले व्यापारियों को 10% बुकिंग का एडवांस देना होता है . उसके बाद जब दुकान पर कब्जा लेना होगा तब 15 परसेंट पूरी कीमत का देना होता है . फिर एडीए को अलग से 10% पट्टा लेने के लिए देना पड़ता है . तब जाकर 99 साल के एग्रीमेंट पर जूता मंडी में व्यापारियों को दुकानें मिलती हैं. एक दुकान की कीमत लगभग छह लाख से शुरू होकर 40 लाख तक पहुंचती है . ₹अब ऐसे में छोटा व्यापारी इतनी रकम का अरेंजमेंट नहीं कर पाता है जिस वजह से यहां दुकाने खाली पड़ी हुई है.

    करोड़ों की बिल्डिंग हो रही है जर्जर
    21 करोड़ की लागत से जूता मंडी बनकर तैयार हुई थी. सारी सुविधाएं दी गई हैं कहने को यह पूरी मंडी 6870 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी हुई है .तत्कालीन शहरी विकास एवं लोक निर्माण विभाग के मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने जूता मंडी का शुभारंभ किया था . मंडी परिसर में एक रेस्टोरेंट, एक बैंक कार्यालय, 22 गोदाम, एक प्रदर्शनी हॉल और सभा स्थल है . इसके साथ ही इसमें 6 फूड कोर्ट भी है.
    इतना बड़ा infrastructure सरकार व एडीए प्रशासन की वजह से जर्जर होता जा रहा है.पूरी बिल्डिंग में केवल 20 से 22 दुकानें में व्यापारियों की दुकानें हैं बाकी सभी बंद है .

    बन्द पड़ी दुकानें आवंटित करने जा रहा है एडीए 
    जूता मंडी में लगभग 280 दुकानें हैं.जिसमें से 147 दुकानों का आवंटन  ADA द्वारा किया जाने वाला है. जिसके लिए 21 अगस्त को आगरा विकास प्राधिकरण कार्यालय में बिड खोली जाएंगी .वहीं दुकान लेने वाले व्यापारी एडीए दफ्तर में 20 अगस्त तक सीलबंद बिड भेज सकते हैं .

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज