कुछ ऐसा रहा है ब्रीफ़केस पर सोते हुए बच्चे को लेकर टिप्पणी करने वाले आगरा DM का करियर

आगरा डीएम प्रभु एन सिंह
आगरा डीएम प्रभु एन सिंह

प्रभु नारायण सिंह का नाम आगरा में तैनाती मिलने के बाद भी सुर्खियों में आया था जब उन्होंने अपने अधीनस्थों को उनका स्वागत करने से मना कर दिया था.

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आगरा. आगरा (Agra) के जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह (DM Prabhu N Singh) के बयान से सभी दंग हैं. हैरत इस बात की है कि अपने कैरियर में अभी तक का शानदार सफर करने वाले इस आईएएस की जुबान से आखिर ऐसे शब्द निकले कैसे? 2007 बैच के ये आईएएस अभी तक 4 जिलों में बतौर जिलाधिकारी काम कर चुके हैं. आगरा उनका पांचवां जिला है. भारत सरकार में भी वे सेवा दे चुके हैं. यहां तक कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भी रह चुके हैं. फिर भी किसी पर टूटते क़हर का वे कैसे मज़ाक उड़ा सकते हैं?

प्रभु नारायण सिंह का नाम आगरा में तैनाती मिलने के बाद भी सुर्खियों में आया था जब उन्होंने अपने अधीनस्थों को उनका स्वागत करने से मना कर दिया था और सीधे काम में जुटने की नसीहत दी थी. इसी साल 2 जनवरी को उन्होंने आगरा के जिलाधिकारी का चार्ज लिया था. एक वो दिन था जब उनकी वाहवाही हुई थी और एक आज का दिन है जब उनकी चहुंओर आलोचना हो रही है.

बिहार के रहने वाले हैं



बीकॉम और लॉ की पढ़ाई कर चुके बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले प्रभु नारायन सिंह 2007 में आईएएस के लिए चुने गए थे. मसूरी में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें पहली तैनाती मेरठ में बतौर अस्सिस्टेंट कलेक्टर मिली. हालांकि ये भी उनके फेज 2 ट्रेनिंग का ही हिस्सा था. एक्चुअली उनकी यूपी सरकार में असली सेवा बांदा से शुरू हुई जब 14 अगस्त 2009 से लेकर 5 फरवरी 2011 तक वे जॉइंट मजिस्ट्रेट रहे. इसके बाद उन्होंने 6 फरवरी 2011 से 27 जुलाई 2011 तक मेरठ में सीडीओ के पद पर सेवा दी. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. तब से लेकर आज तक उन्हें यूपी से लेकर केंद्र तक प्राइम पोस्टिंग मिलती रही.
डीएम पद पर पहली तैनाती बागपत

पहली बार वे बागपत के जिलाधिकारी बने. यहां 27 जुलाई 2011 से 23 मार्च 2012 तक वे रहे. फिर 5 दिनों के लिए लखनऊ में प्रतीक्षारत रहे. 29 मार्च 2012 को उन्हें अमेठी का जिलाधिकारी बना दिया गया जहां वे 17 अप्रैल 2012 तक रहे. इसके बाद गाज़ीपुर के DM बने. 18 अप्रैल 2012 से 24 फरवरी 2013 तक 10 महीने DM रहने के बाद पहली बार उन्हें यूपी शासन में काम करने का मौका दिया गया. उन्हें 25 फरवरी 2013 को खेल और युवा कल्याण में विशेष सचिव बनाया गया. 3 महीने बाद 23 मई 2013 को उन्हें सिंचाई विभाग में विशेष सचिव बनाया गया. इसके बाद उन्हें आगरा भेजा गया. पद मिला दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी का.  4 महीने आगरा रहने के बाद वे सेंट्रल डेपुटेशन पर दिल्ली चले गए. दिल्ली में 20 जनवरी 2016 से 30 नवंबर 2016 तक एनएसजीएम प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के निदेशक रहे. लेकिन सालभर से कम समय के भीतर ही वे वापस अपने यूपी कैडर लौट आये. लखनऊ आने के बाद वे 1 दिसंबर 2016 से 19 दिसंबर तक प्रतीक्षारत रहे. इस समय वे आगरा के जिस स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं इसकी ट्रेनिंग उन्हें अब मिलने वाली पोस्टिंग में बखूबी हुई होगी. 20 दिसम्बर 2016 से लेकर 19 जनवरी 2017 तक वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में अडिशनल मिशन डायरेक्टर रहे. अब जिला मिलने की बारी फिर से आ गयी थी. 20 जनवरी 2017 को उन्हें बस्ती का डीएम बना दिया गया लेकिन 3 महीने बाद ही उन्होंने एक और छलांग मारी. 18 अप्रैल 2017 को उन्हें लखनऊ विकास प्राधिकरण का वीसी बनाया गया. यहां उन्होंने अपने कैरियर का सबसे लंबा वक्त बिताया. वे लगभग 3 साल एलडीए में वीसी रहे. इसी साल उन्हें 2 जनवरी को आगरा के डीएम बनाया गया जहां वे ताजनगरी पर घिरे गंभीर कोरोना संकट से जूझ रहे हैं.

बता दें कि एक महिला प्रवासी मजदूर का पैदल अपने घर वापसी का वीडियो वायरल हुआ था जिसमे उस महिला का बच्चा ट्रॉली बैग पर लेटा हुआ है जिसे वो महिला खिंचे जा रही है. इस हालत पर प्रभु नारायण सिंह ने बयान दे दिया कि उनके पिता जी जब बाहर जाया करते थे तो वे भी उनकी अटैची पर बैठ जाया करते थे. प्रभु नारायण सिंह के इस बयान को संवेदनहीन करार देकर सोशल मीडिया में उनकी तीखी आलोचना की जा रही है.

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