आगरा में बना है आजादी के महानायक भगत सिंह का मंदिर, ताजनगरी में 1 साल रहे थे शहीद-ए-आजम

शहीद-ए-आजम भगत सिंह मंदिर

शहीद-ए-आजम भगत सिंह मंदिर

Bhagat Singh Martyr Day: आगरा के नूरी दरवाजा क्षेत्र में भगत सिंह अंग्रेज़ अफसर सांडर्स की हत्या के बाद आए थे और यहां अपनी पहचान छुपा कर एक इमारत के कमरे में अपने साथियों के साथ रहा करते थे.

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आगरा. 23 मार्च को महान क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश की आजादी के लिए हंसते हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था. देशभर में आजादी की बेमिसाल मशाल जलाने वाले सरदार भगत सिंह का आगरा से अटूट नाता रहा है. आगरा के नूरी दरवाजा क्षेत्र में भगत सिंह अंग्रेज़ अफसर सांडर्स की हत्या के बाद आए थे और यहां अपनी पहचान छुपा कर एक इमारत के कमरे में वे अपने साथियों के साथ रहा करते थे. भगत सिंह ने आगरा के कॉलेज में प्रवेश भी लिया था. किसी को कोई शक न हो इसलिए अपने साथियों के साथ भगत सिंह छात्र के रूप में ताज नगरी में रहा करते थे.

शहीद भगत सिंह से जुड़ी तमाम यादें आगरा के नूरी दरवाजा क्षेत्र में मौजूद हैं. नूरी दरवाजा क्षेत्र की जिस इमारत में भगत सिंह रहा करते थे वह अब जर्जर हो चुकी है. आसपास व्यापक स्तर पर पेठा कारोबार होता है, लेकिन यहां के लोगों को इस बात का गर्व है कि वे लोग वहां रह रहे हैं जहां कभी शहीद-ए-आजम रहा करते थे . भगत सिंह जिस इमारत में रहते थे उस से 50 मीटर की दूरी पर भगत सिंह की याद में भगत सिंह मंदिर भी बना हुआ है. इस मंदिर में रोज देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद भगत सिंह की पूजा-अर्चना होती है.

खंडहर में तब्दली हो रहा भगत सिंह का कमरा

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