अपना शहर चुनें

States

पद्मश्री सम्मान: पति से छुप-छुपकर लिखती थीं डॉ. उषा यादव, सपोर्ट मिला तो लिख डालीं 100 किताबें

वह कहती हैं कि लेखन करने वाले बहुत हैं लेकिन लोगबाग किताबों की दुनिया से विरत हो रहे हैं.
वह कहती हैं कि लेखन करने वाले बहुत हैं लेकिन लोगबाग किताबों की दुनिया से विरत हो रहे हैं.

Agra News: डॉ. ऊषा यादव (Dr. Usha Yadav) ने कहा कि मैं शुरू से ही मेधावी थी. 12 साल की उम्र में ही मैंने हाईस्कूल पास कर लिया था. वह कहती हैं कि लेखन करने वाले बहुत हैं लेकिन लोग-बाग किताबों की दुनिया से विरत हो रहे हैं.

  • Share this:
आगरा. उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली डॉ. ऊषा यादव (Dr. Usha Yadav) को पद्मश्री से सम्मानित (Padma Award) किया जाएगा. इसके लिए उनके नाम पर मोहर लग गई है. इस बात की जानकारी जैसे ही साहित्यकार डॉ. ऊषा यादव को हुई तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए. ऊषा यादव ने अपनी शुरुआती जिन्दगी के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि उनका जन्म कानपुर में हुआ था. शादी के बाद वह आगरा (Agra News) आ गयीं. आगरा में शुरुआती दिनों में उन्होंने अपनी लेखनी और तेज कर दी. हर सुबह उनकी साहित्य साधना शुरू होती है जो सोने तक जारी रहती है. डॉ. उषा यादव अब तक सौ से ज्यादा पुस्तकों की रचना कर चुकी हैं. ऊषा यादव कहती हैं कि उन्होंने साहित्य को घुट्टी में पीया है. जब ऊषा यादव नौ साल की थी तभी उनकी रचना पत्रिका में छपी थी.

न्यूज 18 से बात करते हुए डॉ. ऊषा यादव (Dr. Usha Yadav) ने कहा कि मैं शुरुआत से ही पढ़ाई में मेधावी थी. बारह साल की उम्र में ही मैंने हाई स्कूल पास कर लिया था. शादी के बाद भी वह कानपुर में पढ़ती रहीं, लेकिन बाद में आगरा आई. आगरा में ऊषा यादव ने एक साल रतनमुनि जैन इंटर कालेज में पढ़ाया. तीस साल तक अध्यापन से जुड़ी रहीं. आगरा विश्वविद्यालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान में भी ऊषा यादव प्रोफेसर रहीं. कविता, कहानी, नाटक सबकुछ लिखने वाली ऊषा यादव कहती हैं कि मेरी जैसी अन्तर्मुखी लेखिका की पहचान किताबों के जरिये भारत सरकार तक पहुंची. सिर्फ और सिर्फ प्रतिभा का मूल्यांकन हुआ है.

लोगबाग किताबों की दुनिया से विरत हो रहे हैं


वह कहती हैं कि लेखन करने वाले बहुत हैं लेकिन लोग-बाग किताबों की दुनिया से विरत हो रहे हैं. लेकिन खुशी की बात है कि अब बच्चे भी लिख रहे हैं. ऊषा कहती हैं सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. धीरे धीरे कार्य निरंतर करते रहने से सफलता अपने आप मिल जाती है. डॉ. ऊषा यादव की प्रमुख पुस्तकों में दूसरा पंचतंत्र, झोले में चांद, एक और सिंदबाद, महिला उपन्यासकारों की मानवीय संवेदना, उजली धूप, ममता का मोल, उसके हिस्से की धूम आदि शामिल हैं.

शुरू में पति से डरकर जला दी रचनाएं


डॉ. ऊषा यादव ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा राज साझा किया. वे बताती हैं कि शादी के बाद जब वे आगरा आईं तो छुप छुपकर लिखती थीं और फिर चुपके से जला देती थीं. उनके मन में आशंका थीं कि पता नहीं पति क्या कहेंगे. एक दिन उनके पति ने उनकी कुछ रचाएं देख लीं. उसके बाद पति ने उन्हें लेखन के लिए प्रेरित किया. इसके बाद तो डॉ. ऊषा यादव की कलम जब गतिमान हुई तो आज तक रुकी नहीं. सुबह चाय अपने हाथों से बनाती हैं और फिर ऊषा यादव भोजन बनाने के बाद देर रात तक लेखन कार्य में जुटी रहती हैं. हर साल उनकी पुस्तकें आती हैं. उनकी पुस्तक उसके हिस्से की धूप को हाल ही में मध्य प्रदेश में बड़ा सम्मान मिला. सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में भी उसके हिस्से की धूप शामिल रही.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज