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आगरा: 40 वर्षीय हथिनी को पिलाई जाती थी शराब, वन्‍य विभाग की टीम ने बचाया

हथिनी एम्मा को मिल सकेगा उपचार

हथिनी एम्मा को मिल सकेगा उपचार

Agra News: वर्षों से गंभीर दुर्व्यवहार के कारण एम्मा हथिनी के पैरों में काफी दर्द है. वह ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों की बिमारी) से भी पीड़ित है.

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आगरा. चालीस वर्षीय हथिनी ‘एम्मा’ (Elephant Emma) को उसके मालिकों द्वारा नियंत्रित करने के लिए शराब पिलाई जाती थी. हथिनी को 300 मील से अधिक दूरी चला कर झारखंड राज्य की सीमाओं को पार कर अवैध रूप से ले जाया जा रहा था, जहां वन विभाग ने उसके मालिकों पर वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. वन विभाग ने वाइल्डलाइफ एसओएस से हथिनी को इलाज और देखभाल के लिए हाथी के अस्पताल में रखने का अनुरोध किया है. वर्षों से गंभीर दुर्व्यवहार के कारण एम्मा हथिनी पैरों में दर्द है और वह ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों की बिमारी) से भी पीड़ित है. कांच, कीलें और पत्थर के टुकड़े उसके पैरों में घुस कर घाव कर चुके हैं. कुपोषण के कारण उसकी स्वास्थ्य स्थिति भी काफी खराब है.

इस 40 वर्षीय हथिनी की ज़िन्दगी में राहत के पल बहुत ही कम थे. उसे भीख मांगने, धार्मिक जुलूस, शादी समारोह, पर्यटक सवारी जैसी गतिविधि के लिए नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता था. रात में उसे कसकर बांध दिया जाता था, जिसकी वजह से वह लेटने और आराम करने में असमर्थ थी. उसे मिठाइयों और तले हुए खाद्य पदार्थों से निर्मित आहार दिया जाता था.

हथिनी 'एम्मा' को पैरों में दर्द के बावजूद देसी शराब पिला कर काम करने के लिए मजबूर किया जाता रहा. जब उसके मालिकों से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वे उसे उचित चिकित्सा उपचार नहीं प्रदान करवा सकते. स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए कैद में हाथियों को शराब और तम्बाकू दिया जाता था. शराब हाथी के लिए किसी विष से कम नहीं होती.



विशेष टीम कर रही जांच
वाइल्डलाइफ एसओएस ने विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हाथी एम्बुलेंस में पशुचिकित्सा विशेषज्ञों और हाथियों की देखभाल करने वाली एक टीम को मथुरा से धनबाद, झारखंड के लिए 1000 मील से भी अधिक दूरी को तय करने के लिए रवाना किया. वाइल्डलाइफ एसओएस के पशुचिकित्सकों द्वारा प्रारंभिक जांच में पता चला कि हथनी को पैरों में गंभीर दर्द है, जिसके कारण वह अपने आगे के दोनों पैरों पर स्वयं का ही भार उठाने में असमर्थ है. डॉ. इलियाराजा (वाइल्डलाइफ एसओएस की पशुचिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक) ने कहा कि एम्मा के लिए उसके नाजुक और संवेदनशील पैरों पर खड़ा होना दर्द भरा है. वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार ने उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है. हमने उसके पैरों में लगे कांच, कीलें और पत्थर के टुकड़े निकाल दिए हैं.

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, 'हमें जल्दी से हथनी को अस्पताल लाना था, ताकि एम्मा को इलाज मिल सके. यह तथ्य कि उसे उसके मालिक द्वारा शराब पिलाई गई थी.
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