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Agra News: अब ब्रिटिशकालीन 'जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी' का बदलेगा नाम, जानें क्‍या होगा अब?

UP News: आगरा की जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी है.लेकिन अब इस लाइब्रेरी का नाम बदलने जा रहा है.जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी का नाम स ...अधिक पढ़ें

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    रिपोर्ट: हरिकांत शर्मा

    आगरा:ताज नगरी आगरा ने कई साहित्यकार इतिहासकारों को अपने आंचल में जगह दी है.ताजनगरी के कवियों व साहित्यकारों में सूरदास, रांगेय राघव, डॉ. रामविलास शर्मा, बाबू गुलाबराय जैसे हिंदी की सेवा करने वाले सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं.कई अंग्रेज अधिकारी भी भारतीय साहित्य और साहित्यकारों से प्रेरित रहे.उनमें गहरी रुचि रखा करते थे.इसका एक उदाहरण आगरा की जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी है.लेकिन अब इस लाइब्रेरी का नाम बदलने जा रहा है.जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी का नाम संघ के लोकतंत्र के सैनानी स्वर्गीय अधीश भटनागर के नाम पर रखा जा रहा है.आगरा के मेयर नवीन जैन ने बताया कि दिनों नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ है.आइए जानते हैं इस लाइब्रेरी का इतिहास…

    डच व्यापारी ने रखी थी जॉन्स लाइब्रेरी की नींव
    इतिहास विभाग के रिसर्च स्कॉलर दीप गर्ग बताते हैं कि जिस डच व्यापारी जॉन्स के नाम पर लाइब्रेरी का नाम रखा गया था,वह एक व्यापारी था.वह अपने तीन भाइयों के साथ हिंदुस्तान आया था.आगरा में यमुना के किनारे कॉटन जॉन्स मिल की स्थापना की थी,जो आज भी मौजूद है.जॉन्स का भारतीय साहित्य और लेखन के प्रति झुकाव था.इसी वजह से उन्होंने आगरा के सदर नंद टॉकीज के पास पहली लाइब्रेरी की स्थापना करवाई थी.इस लाइब्रेरी में लगभग 40,000 से ज्यादा किताब मौजूद हैं.लाइब्रेरी का फर्स भी लकड़ी का बनाया गया है, ताकि यहां पढ़ने वालों को कोई असुविधा न हो.

    जॉन्स लाइब्रेरी कभी हुआ करती थी जॉन्स की रंगशाला
    इतिहास विभाग के रिसर्च स्कॉलर दीप गर्ग बताते हैं कि जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी आगरा विश्वविद्यालय के नजदीक पाली वाली पार्क के शांत वातावरण में स्थित है.जिस बिल्डिंग में आज जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी है.उस में कभी जॉन्स की रंगशाला हुआ करती थी.बाद में उसे नगर पालिका की सभा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा . लेकिन जब जॉन्स का बुरा वक्त आया तो उसने साहित्य की तरफ रुख़ किया.वर्ष 1922 में जॉन्स हीवेट पार्क आज के पाली वाले पार्क में आधुनिक लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी.आप यहां पर रामचरितमानस से लेकर गीता,वेद,पुराण,बाइबल भी पढ़ सकते हैं.इसके साथ ही उर्दू ,फारसी इंग्लिश, हिंदी में भी हजारों किताबों का खजाना यहां मौजूद है.

    लोकतंत्र सेनानी के नाम पर होगी नई पहचान
    जिस ऐतिहासिक जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी का नाम बदलकर लोकतंत्र सेनानी के नाम पर रखा जा रहा है.उनका नाम अधीश भटनागर है.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया और 52 वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा हो गए.अधीश भटनागर का जन्म 1955 को आगरा के एक अध्यापक जगदीश भटनागर के घर में हुआ था.1973 में उन्होंने संघ का काम के लिए अपना घर छोड़ दिया था.1975 में आपातकाल लगने पर वे जेल भी गए थे.आपातकाल के बाद उन्होंने विद्यार्थी परिषद और वर्ष 1981 में संघ कार्य हेतु मेरठ भेजा गया.संघ के अलग-अलग दायित्व पर रहकर काम किया.1946 में उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख की भी जिम्मेदारी निभाई थी.4 जुलाई 2007 में दिल्ली में एक बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था.

    ऐसे बने इस लाइब्रेरी के सदस्य
    इस लाइब्रेरी का संचालन अब नगर निगम के द्वारा किया जाता है.अगर आप को भी इस लाइब्रेरी का सदस्य बनना है तो आपको एक ऑफलाइन फॉर्म भरना होगा.कुल 250 ₹ खर्च करने होंगे और आप इस लाइब्रेरी के सदस्य बन जाएंगे.इस लाइब्रेरी में आप अलग-अलग विषयों की हजारों किताब पढ़ सकते हैं.किताब घर भी ले जा सकते हैं.लेकिन उसके लिए आपको अलग से चार्ज देना होगा.

    Tags: Agra news, UP news

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