Agra News: चंबल में बढ़ा घड़ियालों का कुनबा, अंडे से निकल नदी में पहुंचे 1225 नन्हें घड़ियाल

शुक्रवार को रेंजर आर के सिंह राठौड़ ने बताया कि बाह रेंज में रेहा से उदयपुर खुर्द तक डेढ़ दर्जन स्थलों पर नेस्टिंग हुई थी. (सांकेतिक फोटो)

शुक्रवार को रेंजर आर के सिंह राठौड़ ने बताया कि बाह रेंज में रेहा से उदयपुर खुर्द तक डेढ़ दर्जन स्थलों पर नेस्टिंग हुई थी. (सांकेतिक फोटो)

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पाली से पचनदा (Pachnada) तक तीन राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में होकर बहने वाली चंबल नदी में 1979 से लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है.

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आगरा. एशिया की सबसे बड़े घड़ियाल विहार (Sanctuary) के कुनबे में बृहस्पतिवार को अंडे से निकले 1225 नन्हें घड़ियाल (Alligator) शामिल हो गये. ‘मदर काल’ (अंडों से आने वाली सरसराहट की अवाज) पर पहुंची मादा घड़ियाल ने बालू हटाई तो अंडों से बाहर निकले बच्चों ने चंबल (Chambal) का रुख किया. चंबल नदी में नर घड़ियाल ने नन्हें मेहमान की आगवानी की.

ताकि कोई जानवर आदि अंडों को नष्ट न कर दे

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पाली से पचनदा तक तीन राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में होकर बहने वाली चंबल नदी में 1979 से लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है. उन्होंने बताया कि 10 साल से चम्बल नदी में प्राकृतिक तौर पर अंडों को सेने (हैचिंग) का काम हो रहा है. 65 से 70 दिन के हैचिंग काल के शुरू होने पर वन विभाग ने इनके नेस्ट (अंडों को रखने की जगह) पर लगी जाली हटा दी. उन्होंने कहा कि नेस्टिंग के टाइम पर वन विभाग ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस कर जाली लगाई थी ताकि कोई जानवर आदि अंडों को नष्ट न कर दें.

नेस्टों से निकलकर घड़ियाल शिशु चंबल नदी में पहुंचे हैं
शुक्रवार को रेंजर आर के सिंह राठौड़ ने बताया कि बाह रेंज में रेहा से उदयपुर खुर्द तक डेढ़ दर्जन स्थलों पर नेस्टिंग हुई थी. उन्होंने बताया कि हैचिंग में 1225 नन्हें घडिय़ालों का जन्म हुआ है. वन कर्मियों की निगरानी में नेस्टों से निकलकर घड़ियाल शिशु चंबल नदी में पहुंचे हैं.

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