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आगरा: मौत की आशंका जताने वाले गरीब किसान की इलाज के अभाव में मौत
Agra News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 19, 2019, 2:46 PM IST
आगरा: मौत की आशंका जताने वाले गरीब किसान की इलाज के अभाव में मौत
इलाज के आभाव में दर्द से तड़प कर किसान ने तोड़ा दम (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इलाज के लिए पैसों की व्यवस्था नहीं थी इसलिए श्रीचंद लखनऊ (Lucknow) की सड़कों पर रात गुजारने के बाद वापस आगरा (Agra) आ गए, किसान यूनियन (Farmer union) के लोगों ने जिला प्रशासन (Agra district administration) को लगातार किसान की हालत से अवगत कराया लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली, इलाज के आभाव में आखिकार किसान जिन्दगी की जंग हार गया और छोड़ गया कई सवाल....

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आगरा. इलाज के अभाव (lack of treatment) में दर-दर की ठोकरें खाने के बाद गैंगरीन (Gangrene) से पीड़ित किसान श्रीचंद की तड़प- तड़पकर मौत (death) हो गई. किसान ने news 18 से स्पष्ट कहा था कि उसके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं और लगता है अब मौत हो जाएगी. मीडिया में खबर आने के बाद सीएम योगी (CM Yogi) ने जिला प्रशासन को किसान की मदद करने के लिए निर्देशित किया था जिसके बाद प्रशासन ने दो बार में बीस-बीस हजार रुपये की मदद मुहैया कराई लेकिन रकम खर्च होने के बाद इलाज के लिए लखनऊ (Lucknow) आए किसान श्रीचंद सड़क पर आ गए.

संवेदनहीनता!
सड़क पर एक रात गुजारने के बाद पीड़ित किसान वापस आगरा (Agra) पहुंचा जहां बुधवार को उसकी मौत हो गई. अत्यंत गरीब किसान श्रीचंद का आयुष्मान कार्ड (Ayushman card) भी नहीं बन सका था. गरीबी के चलते किसान की इलाज के अभाव में मौत से व्यवस्था पर सवाल उठने लाजमी हैं. बता दें कि सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम गुतिला के पास किसानों के साथ ग्राम गंगरउवा के किसान श्रीचंद धरने पर बैठे थे. इनर रिंग रोड (inner ring road Agra) मसले में मुआवजे को लेकर किसानों का आंदोलन (farmer protest) चल रहा था. इसी दौरान हल्के बल का प्रयोग किए जाने पर किसान श्रीचंद के पैर में चोट लग गई थी. शुरू में कमिश्नर के आदेश पर उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कालेज (SN Medical college Agra) भर्ती कराया गया लेकिन मेडिकल कालेज के स्टॉफ की क्रूरता से वह घर लौट आए.

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गैंगरीन से पीड़ित किसान श्रीचंद (फ़ाइल फोटो)


किसान का आरोप था कि उन्हें बार-बार जाने को कहा जा रहा था. किसान की पीड़ा की खबर जब news 18 पर चली तो डीएम एनजी रवि कुमार (DM NG Ravi Kumar) ने मदद के तौर पर दो बार में 20-20 हजार रुपये किसान के इलाज के लिए उपलब्ध करवाए. पीड़ित किसान के परिजनों के मुताबिक इन्ही रुपयों से किसान श्री चंद का इलाज कुछ दिन संजय गांधी पीजीआई लखनऊ (Sanjay Gandhi PGI Lucknow) में चला. इलाज के लिए मिली रकम खर्च हो जाने के बाद श्रीचंद वापस आगरा आए तो एक बार फिर प्रशासन ने उन्हें लखनऊ भेज दिया. इलाज के लिए पैसों की व्यवस्था नहीं थी इसलिए श्रीचंद एक-दो रात लखनऊ की सड़कों पर गुजारने के बाद वापस आगरा आ गए.

परिजनों का आरोप है कि गैंगरीन पीड़ित किसान की हालत दिनों दिन बिगड़ती गई और आज दर्द से तड़प-तड़पकर इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई. किसान श्रीचंद की मौत इलाज के लिए पैसे ना होने के कारण हुई. मामला डीएम के संज्ञान में होने के बावजूद किसान के लिए आयुष्मान कार्ड तक प्रशासन नहीं बनवा सका. इस पूरे मामले को एसडीएम सदर गरिमा देख रही थीं. लेकिन इसके बावजूद किसान श्रीचंद इलाज के लिए पैसों के अभाव में दर दर की ठोकरें खाते रहे. परिजनों ने एसडीम सदर पर भी संवेदनहीनता का आरोप लगाया है.

राजधानी में सड़क पर पड़ा रहा पीड़ित किसानउत्तर प्रदेश की राजधानी व नवाबों के शहर लखनऊ (Lucknow) में आगरा (Agra) के किसान श्रीचंद पैसे खत्म होने के बाद सड़क पर आ गए. सड़क किनारे फुटपाथ पर उन्होंने अपने परिजन के साथ तड़पते हुए रात गुजारी. इसकी जानकारी किसान नेताओं ने आगरा प्रशासन (Agra Administration) को भी दी. लगातार किसान नेता (farmer leader) स्थानीय प्रशासन को किसान की लाचारी से अवगत कराते रहे लेकिन सही समय पर किसान का इलाज पैसों की कमी के कारण नहीं हो सका. हालात से टकराते-टकराते किसान श्रीचंद ने आखिर कर दम तोड़ दिया. किसान की मौत पूरे सिस्टम के लिए एक तमाचा तो है ही साथ ही साथ प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा भी है. किसान की मौत पर समाजसेवी संगठनों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर कोई भी संगठन किसान की मदद को सामने क्यों नहीं आया ?

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First published: December 19, 2019, 2:46 PM IST
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