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1857 की क्रांति की गवाह रही है आगरा की सोंठ मंडी, क्रांतिकारियों ने ब्रितानिया हुकूमत की हिला दी थीं चूलें

1857 की क्रांति की गवाह रही है आगरा की सोंठ मंडी, क्रांतिकारियों ने ब्रितानिया हुकूमत की हिला दी थीं चूलें

Azadi ka Amrit Mahotasav: देश आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है और अमृत महोत्सव के तहत तमाम कार्यक्रम किए जा रहे हैं. ऐसे में हम आपको बताएंगे आगरा की सोंठ की मंडी का वो इतिहास जो 1857 की क्रांति से जुड़ा हुआ है.

रिपोर्ट: हरिकांत शर्मा

आगरा: देश आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है और अमृत महोत्सव के तहत तमाम कार्यक्रम किए जा रहे हैं. ऐसे में हम आपको बताएंगे आगरा की सोंठ की मंडी का वो इतिहास जो 1857 की क्रांति से जुड़ा हुआ है. जंग-ए-आजादी के दौरान क्रांतिकारियों ने आगरा कॉलेज के प्रोफेसर मेजर जैकब और 20 अंग्रेजों को मार डाला था. जिससे ब्रितानिया हुकूमत के अफसरों में हड़कंप मच गया था. इसी दौरान उन्होंने आगरा की मशहूर चर्च सेंट पीटर्स को लूटा और लूट के बाद लाया गया माल आगरा की इसी सोंठ मंडी में छुपाया था.

सोंठ मंडी का नाम मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में पड़ा था. आगरा समेत आस पास के इलाकों में सोंठ तैयार कर यहां की मंडी से सोंठ लाहौर तक भेजी जाती थी. तब लाहौर और आगरा सौंठ के बड़े केंद्र हुआ करते थे. लेकिन जैसे ही मुगलिया दौर खत्म हुआ. धीरे-धीरे सौंठ का कारोबार इस मंडी से खत्म हो गया. वर्तमान में मानसिक चिकित्सा केंद्र के पास सौंठ की मंडी स्थित है. तब इसे आगरा मथुरा रोड कहा जाता था. बिलोचपुरा के पास सोंठ की मंडी लगती थी. एक अंग्रेजी अधिकारी मानसिक रोग से ग्रस्त हो गया था. तब अंग्रेजों ने यहां पर मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय बनवा दिया था. जब देश में पहला गदर हुआ तो उस वक्त आगरा में तमाम क्रांतिकारी सक्रिय थे.

अंग्रेजों ने 18 मेवातियों को चढ़ा दिया था फांसी पर
20 अंग्रेज अधिकारियों की हत्या के बाद, अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों की धरपकड़ की. इस दौरान 18 मेवातियों को अंग्रेज अधिकारियों की हत्या के जुर्म में फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिया गया था. इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि आगरा में 1857 की क्रांति को कमजोर करने के लिये अंग्रेज अधिकारियों ने 18 मेवातियों को फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया. जिसके बाद क्रांति की आग कुछ दिनों के लिए धीमी पड़ गयी थी.

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