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मिसाल! ताजनगरी में बेटियों ने ई-रिक्शा चलाकर पार किया मुश्किलों का पहाड़

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 21, 2020, 11:53 AM IST
मिसाल! ताजनगरी में बेटियों ने ई-रिक्शा चलाकर पार किया मुश्किलों का पहाड़
ई-रिक्शा चलाकर परिवार संभाल रही हैं सरिता

आगरा की सड़कों पर ई-रिक्शा दौड़ातीं सरिता उपाध्याय आज महिलाओं के लिए नजीर बन कर उभरीं हैं.

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आगरा. सच्ची मेहनत हर मुश्किल को आसान बना देती है. ऐसी ही मिसाल पेश की है ताजनगरी (Taj City) की दो बेटियों सरिता उपाध्याय व रेशमा ने. सरिता की बिटिया के दिल में छेद था तो वहीं रेशमा के पति गंभीर बीमारी से ग्रसित. आर्थिक तंगी के बीच इलाज में खर्च होने वाली रकम से दोनों परिवार टूट सा गया था. ऐसे में मुश्किलों के पहाड़ को पार करके सरिता व रेशमा न सिर्फ आगे बढ़ीं बल्कि अपने परिवार को भी संभाला.

सरिता अपनी बिटिया के इलाज के साथ-साथ उसे अच्छी शिक्षा देकर अपने सपने को साकार कर रही हैं. आगरा की सड़कों पर ई-रिक्शा दौड़ातीं सरिता उपाध्याय आज महिलाओं के लिए नजीर बन कर उभरीं हैं. शहर के लोग भी उनके हौसले को सलाम करते हैं. सरित की तरह ही रेशमा की भी कहानी है. रेशमा के पति को गंभीर बीमारी है और घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए रेशमा अब आगरा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाकर हर मुश्किल को आसान बना रही हैं.

बेटी के दिल में छेद की खबर से टूटा परिवार

हर क्षेत्र में बेटियों ने ऊंची उड़ान भरी है, लेकिन आमतौर पर कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो घर के चूल्हे-चौके में पूरे दिन लगी रहकर परिवार चलाती थीं. जिंदगी में जब मुश्किलों का तूफान आया तो इन बेटियों ने जिस तरह से आगे आकर परिवार के अभिभावक की भूमिका का निर्वहन किया, उसे देखकर लोग हौसला आफजाई करना नहीं भूलते. आगरा की सरिता उपाध्याय का जीवन अच्छे से चल रहा था, लेकिन एक दिन उन्हें पता चला कि उनकी बेटी के दिल में छेद है. इसके बाद पूरा परिवार इलाज के खर्च से परेशान रहने लगा. पति की कमाई इतनी नहीं थी कि बेटी का इलाज कराया जा सके. आर्थिक स्थिति खराब होने लगी तो सरिता अपनी सूझबूझा और हिम्मत से परिवार का सहारा बन गयीं.

ई-रिक्शा लेकर सड़क पर उतरीं सरिता उपध्याय ने बताया कि हर दिन वह पांच सौ से छह सौ रुपये कमा लेती हैं. पति भी कमाते हैं. दोनों की कमाई से बेटी का इलाज भी हो रहा है और गृहस्थी भी आराम से चल रही है.

स्कूला जाने लगी सरिता की बिटया

सरिता ने न्यूज 18 को बताया कि उनकी बिटिया का स्कूला जाना उनके सपने के सच हो जाने जैसा है. आगरा में राजामंडी बाजार से भगवान टॉकीज तक रिक्शा चलाने वाली सरिता को स्कूली छात्राएं दीदी कहकर पुकारती हैं. राजामंडी के पास ही आगरा कॉलेज है और छात्राएं सरिता के रिक्शे पर बैठकर उनसे बातें करती हुईं अपने गंतव्य की ओर चली जाती हैं. सरिता को इस बात की भी खुशी है कि छात्राएं उन्हें देखते ही उनके रिक्शे पर आकर बैठ जाती हैं. छात्राएं हौसला बढ़ाती है और सरिता अपनी कहानी सुनाते सुनाते आगे बढ़ जाती हैं.रेशमा बनी अपने परिवार की हिम्मत 

बीमार पति के इलाज को रिक्शा चला रहीं रेशमा भगवान टॉकीज चौराहे पर सवारियों को पुकारती रहती हैं. रेशमा अपने परिवार की हिम्मत हैं. तीन साल से ताजनगरी की सड़कों पर ईं- रिक्शा चलातीं रेशमा कहती हैं उन्हें कोई दिक्कत नहीं आती. रेशमा कहती हैं कि उनके पति बीमारी की वजह से घर पर रहते हैं. ऐसे में घर परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ पड़ी. रेशमा ने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया और आज रेशमा को गर्व है कि वह अपने बच्चों का पालन पोषण करने के साथ-साथ अपने पति का बेहतर उपचार कर रही हैं.

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First published: January 21, 2020, 11:53 AM IST
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