होम /न्यूज /उत्तर प्रदेश /ग्राउंड रिपोर्ट: बीजेपी, गठबंधन या कांग्रेस, जानिए पश्चिम का दलित वोटर सोचता क्या है?

ग्राउंड रिपोर्ट: बीजेपी, गठबंधन या कांग्रेस, जानिए पश्चिम का दलित वोटर सोचता क्या है?

मायावती और अखिलेश यादव (File Photo)

मायावती और अखिलेश यादव (File Photo)

आगरा, मथुरा और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीटों पर गठबंधन जाट, मुस्लिम और दलित गठजोड़ के बहाने बीजेपी का तख्तापलट करने में लग ...अधिक पढ़ें

    ताज नगरी आगरा, इस जिले में दो लोकसभा सीटें आती हैं. पहली आगरा सुरक्षित सीट और दूसरी फतेहपुर सीकरी. इसके अलावा एक सीट है धर्म नगरी मथुरा की. चुनाव यात्रा में हमने आगरा और मथुरा की इन तीन लोकसभा सीटों पर वोटरों का मुद्दा और नजरिया जानने की कोशिश की. इन तीन सीटों पर गठबंधन जाट, मुस्लिम और दलित गठजोड़ के बहाने बीजेपी का तख्ता पलट करने में लगा है लेकिन यहां हालात वैसे नहीं हैं, जैसे दिल्ली में दिखते हैं.

    इन तीनों सीटों पर सबसे पहले हमने हाल जाना दलित मतदाताओं का. उत्तर प्रदेश की राजनीति में आम तौर पर ये माना जाता रहा है कि दलित बहुजन समाज पार्टी का परंपरागत वोटर है लेकिन 2014 और 2017 के चुनावों में बीजेपी की बंपर जीत के बाद ये धारणा टूट गई. 2019 के लोकसभा चुनाव में एसपी-बीएसपी और आरएलडी के गठबंधन के बाद फिर एक बार चर्चा तेज हो गई कि क्या दलित वोटर बीएसपी के साथ वापस आएगा? लेकिन इससे अहम सवाल था, क्या बीएसपी सुप्रीमों मायावती ही दलितों की अकेली नेता हैं? ग्राउंड रिपोर्ट में हकीकत दिल्ली और लखनऊ में बैठे लोगों की राय से अलग नजर आई.

    तीनों लोकसभा सीटों का गणित अलग-अलग
    बात करें मथुरा लोकसभा सीट की तो यहां दलित की अलग-अलग जातियों के अलग-अलग मुद्दे और अलग-अलग नेता हैं. मथुरा शहर में खटिक मोहल्ले की चाय की दुकान पर चुनाव को लेकर गरमा-गरम बहस चल रही थी. मामला सुबह के चाय का था तो हम भी बिना पत्रकार बताए उस बहस में शामिल हो गए. बहस का मुद्दा ये था कि पहले दलित हैं या पहले हिन्दू? सवाल दिलचस्प था तो हमने भी चर्चा का हिस्सा होना लाजमी समझा.

    यह भी पढ़ें- निरहुआ के रोड शो में उमड़ी भारी भीड़, क्या अखिलेश के लिए मुश्किल होगी आजमगढ़ की लड़ाई?

    इलाके के युवा मतदाताओं का दावा था कि जब दंगे जैसे हालात होते हैं, तब पश्चिम में अल्पसंख्यकों के सबसे पहले शिकार जाट और खटिक ही होते हैं. ऐसे में वो अपने को हिन्दू होने से अलग कैसे कर सकते हैं? लेकिन जब मामला गांव में पहुंचता है तो अलग हो जाता है.

    News18 Hindi
    देवबंद की जनसभा में मायावती और अखिलेश यादव


    दलित भी अलग-अलग जातियों में बंटे हैं

    मथुरा में ही राया के पास के एक गांव में जब हम पहुंचे तो दलित अपने आप को अलग वोटर मान रहा था, उसके लिए सवर्ण और मुसलमान दोनों से दूरी रखना जरूरी है. लेकिन मायावती उसकी नेता हैं. मथुरा से आगरा में तस्वीर बिल्कुल अलग है. यहां दलित भी अलग-अलग जातियों में बंटे हैं. सुरक्षित सीट होने के नाते यहां का सांसद दलित ही होगा. ऐसे में दलित वोटरों का बंटना तय है. इसके असर से बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है.

    यह भी पढ़ें- वरुण गांधी बोले- मेरे परिवार के लोग भी PM रहे, पर देश को मोदी जैसा सम्मान किसी ने नहीं दिलाया

    आगरा से ग्वालियर की तरफ बढ़ते ही फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट का इलाका शुरू हो जाता है. हमने यहां भी चाय की एक दुकान पर अड्डा जमा लिया. कांग्रेस ने इस सीट पर राज बब्बर को उम्मीदवार बनाया है. राज बब्बर यहां से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन जीत अब तक नहीं मिली है, जबकि बीएसपी ने 2009 के समीकरण को दोहराने की कोशिश में गुड्डू पंडित को मैदान में उतारा है.

    बात करें ग्राउंट रिपोर्ट की तो इस सीट पर राज बब्बर अभी लड़ाई में कमजोर दिखते हैं. ग्रामीण इलाके के अधिकतर दलित मतदाता, जिसमें ज्यादातर जाटव हैं, मायावती के हाथी पर सवार दिख रहे हैं.

    एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

    आपके शहर से (आगरा)

    Tags: Agra news, Agra S24p18, Akhilesh yadav, Bahujan samaj party, BJP, Congress, Fatehpur Sikri S24p19, Lok Sabha Election 2019, Mathura news, Mathura S24p17, Mayawati, Raj babbar, Samajwadi party, Up news in hindi, Uttar pradesh news

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें