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जब आगरा के इन क्रांतिकारियों ने लाल किले पर फहरा दिया था तिरंगा, इग्लैंड तक पहुंची धमक

जब आगरा के इन क्रांतिकारियों ने लाल किले पर फहरा दिया था तिरंगा, इग्लैंड तक पहुंची धमक

Azadi ka Amrit Mahotsav: एक क्रांतिकारी का नाम सोवरन सिंह और दूसरे का महाराज सिंह था.दोनों आगरा जिले के गांव धीरपुरा के रहने वाले थे.इन दोनों क्रांतिकारियों का एक रोचक किस्सा आगरा किले से जुड़ा हुआ है.बात 26 जनवरी 1931 की है देश में अंग्रेजों की हुकूमत थी.

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रिपोर्ट: हरिकांत शर्मा

आगरा: देश को आजाद हुए 75 साल पूरे हो चुके हैं. आज़ादी की वर्षगांठ पर हम तमाम क्रांतिकारियों को याद कर रहे हैं जिन्होंने इस देश को आजादी दिलाने के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी. लेकिन कई ऐसे गुमनाम क्रांतिकारी भी रहे हैं जिन्होंने नीव का पत्थर बनकर जंग-ए-आजादी में अपनी अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन उन्हें इतिहासकारों ने वो स्थान नहीं दिया जो मिलना चाहिए था. ऐसे ही दो क्रांतिकारियों के बारे में आपको बताएंगे जिन्होंने ने इंग्लैंड में बैठे अंग्रेज के हिलाकर रख दिया था.

इनमें से एक क्रांतिकारी का नाम सोवरन सिंह और दूसरे का महाराज सिंह था. दोनों आगरा जिले के गांव धीरपुरा के रहने वाले थे. इन दोनों क्रांतिकारियों का एक रोचक किस्सा आगरा किले से जुड़ा हुआ है. बात 26 जनवरी 1931 की है देश में अंग्रेजों की हुकूमत थी. अंग्रेजों ने आगरा के लाल किले को छावनी बना रखा था और वहीं से सारा कामकाज भी किया जाता था. दोनों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को सबक सिखाने के लिए 26 जनवरी को देश का तिरंगा झंडा लाल किले की प्राचीर पर फहराने की ठान ली.

जब लहरा दिया था आगरा किले पर तिरंगा झंडा
इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि दोनों भाइयों ने उस वक्त जान जोख़िम में डालकर आगरा के किले पर 26 जनवरी 1931 को तिरंगा झंडा फहराया था. महाराज सिंह ने निर्णय लिया था अपने देश का तिरंगा लाल किले पर फहराया जाएगा. अगले दिन हो दोनों क्रांतिकारी आगरा किले पहुंचे. डाक पहुंचाने के बहाने एक बूढ़े लंगड़े आदमी का भेष बनाया. महाराज सिंह ने तिरंगा झंडा अपने कमर में छुपाया और धीरे-धीरे ऊपर किले में जा पहुंचे. बिना अपनी जान की परवाह किए. चप्पे-चप्पे पर अंग्रेजी सेनिक तैनात थे जरा सी चूक और जान गवा बैठते. अपनी सूझबूझ और प्लानिंग के दम पर महाराज सिंह आगरा किले पर झंडा फहराने में कामयाब रहे और बड़ी चालाकी से दोनों क्रांतिकारी आराम से बाहर निकल आए.

इंग्लैंड तक पहुंच गई थी धमक
अगले दिन जैसे ही अंग्रेजों को पता चला कि किसी ने लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा झंडा फहरा दिया है तो अंग्रेजों के होश उड़ गए.ये खबर आग की तरफ पूरे शहर भर में फैल गयी.हालांकि कुछ देर बाद तिरंगे झंडे को उतार दिया गया था. लेकिन तब अंग्रेजों की खूब किरकिरी हुई थी. खूब जांच-पड़ताल हुई. लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. यह खबर इंग्लैंड तक पहुंच गई और अंग्रेज सरकार के बड़े अफसरों ने नाराजगी भी जाहिर की थी.

नहीं मिली दोनों क्रांतिकारियों को प्रसिद्धि
News18 लोकल से बात करते हुए इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि दोनों क्रांतिकारियों ने कई ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया था. जिनकी वजह से अंग्रेज अधिकारी बेहद परेशान रहते थे. देश की आजादी की लड़ाई में तमाम क्रांतिकारियों ने अपना योगदान दिया था जो आज भी गुमनाम हैं. उन्हीं में आगरा के ये दो क्रांतिकारी भी हैं जिन्होंने गुमनामी की जिंदगी जी. उन्हें वह प्रसिद्धि नहीं मिल पाई जिसके वे हकदार थे.

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