उप्र पंचायत चुनाव की हलचलों के बीच किसान नेता ने कहा, 'हम भाजपा के खिलाफ नहीं'!

प्रदर्शनकारी किसान. (File Photo)

प्रदर्शनकारी किसान. (File Photo)

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों (Gram Panchayat Elections) की सरगर्मियां चरम पर हैं और ऐसे में आंदोलन (Protesting Farmers) करने वाले किसानों की संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी ने अपने बयान से सबको हैरान करते हुए असमंजस की स्थिति पैदा की.

  • News18India
  • Last Updated: April 13, 2021, 8:24 AM IST
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आगरा. बीकेयू (Bhartiya Kisan Union) के महासचिव युद्धवीर सिंह के हालिया बयान ने हर किसी को चौंका दिया. सिंह ने सोमवार को कहा कि किसानों की संस्था 'BJP के खिलाफ नहीं' है और उत्तर प्रदेश के लोग अपना वोट जिसे चाहें, ​उस पार्टी को दे सकते हैं. वास्तव में, सिंह प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों के सिलसिले में बात कर रहे थे और उनके इस बयान के बाद कई तरह की क़यासों का दौर चल पड़ा है.

इस बयान को अजीब इसलिए माना जा रहा है क्योंकि भारतीय किसान यूनियन ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के दौरान कई सभाएं और प्रचार करते हुए लोगों के बीच जाकर पुरज़ोर अपील की कि वो भाजपा का बहिष्कार करें. साथ ही, उत्तर प्रदेश में भी यूनियन ने नये कृषि कानूनों का विरोध करते हुए कई महापंचायतों का आयोजन किया. ऐसे में सिंह के बयान को यूनियन का बयान माना जाए या नहीं, इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है.

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सिंह के बयान पर टिकैत की प्रति​क्रिया
यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया औपचारिक तौर पर तो नहीं दी है, लेकिन उनके हवाले से टीओआई की खबर में कहा गया : 'इससे भाजपा का समर्थन करने या न करने का सवाल कहां खड़ा होता है? यह एक ऐसा चुनाव है, जो व्यक्तिगत पहचान पर आधारित होता है.'

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वहीं, सिंह ने यह भी कहा कि 'कई तरह की राजनीतिक विचारधाराओं से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने हमें समर्थन दिया है. हमने पंचायत चुनावों को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं. किसान स्वतंत्र हैं, वो अपने फैसले अपने हिसाब से ले सकते हैं. हम पंचायत चुनावों में कोई दखलंदाज़ी नहीं करेंगे.'



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पंचायत चुनाव कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2021 15 अप्रैल से चार चरणों में होंगे, जिनके नतीजे 2 मई को घोषित किए जाएंगे. माना जा रहा है कि ये पंचायत चुनाव योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की लोकप्रियता को मापने का पैमाना बनने जा रहे हैं. साथ ही, इन चुनावों से जनता का मूड भी समझा जाएगा. पंचायत चुनावों पर राष्ट्रीय स्तर पर हुए किसान आंदोलन का असर पड़ने की संभावना भी जानकार बता रहे हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश में भी यह आंदोलन कई इलाकों में अपनी पहुंच बना सका.
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