COVID-19: चेकअप के दौरान लैब में कोरोना वॉरियर्स किन कठिन परिस्थितियों में करते हैं काम? जानिए
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COVID-19: चेकअप के दौरान लैब में कोरोना वॉरियर्स किन कठिन परिस्थितियों में करते हैं काम? जानिए
कोरोना वॉरियर के परिवार को दिल्‍ली सरकार से नहीं मिल रही कोई मदद (सांकेतिक फोटो)

कोरोना वॉरियर्स ने कहा कि जब हम सैंपल लेने जाते हैं तो कुछ मरीज बहुत ही अभद्रता करते हैं. वो अपना मास्क हटा देते हैं. हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं. हम डिस्टेंसिंग के लिए कहते हैं तो सुनते नहीं हैं

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  • Last Updated: April 25, 2020, 6:56 PM IST
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आगरा. विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) भारत में खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. रोज ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है. इसे देखते हुए देश के डॉक्टर (Doctors) अपनी जान की परवाह किये बिना मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं. इसी कड़ी में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा की लेबोरेट्री में कार्यरत ओर कोरोना के सैंपल (COVID-19) के लिए बनाई गई मोबाइल टीम में तैनात योद्धाओं ने इस पर अपना अनुभव साझा किया. कोरोना वॉरियर्स (Corona Warriors) ने कहा कि महामारी बन चुके कोरोना को हराने में जुटे लोगों को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योद्धा कहते हैं तो और भी मेहनत से काम करने का मन करता है. आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की लेबोरेट्री में काम करते हुए हम तीनों को 10 साल हो गए हैं लेकिन पहली बार आपदा का ऐसा दौर आया है. हालांकि ये सोचकर अच्छा भी लगता है कि हम इस कठिन समय में अपना योगदान दे रहे हैं.

हम तीनों (विजय कुमार शर्मा, अरुण कुमार शर्मा और सुनील सारस्वत) कोरोना के मरीजों और डेड बॉडी का सैंपल लेने के लिए बनाई गई मोबाइल टीम में काम कर रहे हैं. सूचना मिलते ही हमें मरीजों का सैंपल लेने के लिए 24 घंटे में कभी भी स्पॉट पर भागना पड़ता है. कोई तय शेड्यूल नहीं है. बीते 20 अप्रैल से हम अपने परिवार से दूर होटल में ठहरे हुए हैं.

सैंपल लेकर अगले दिन हुए फ्री
कोरोना वॉरियर्स ने बताया कि 24 अप्रैल को जब हम तीनों सुबह नाश्ते के बाद बैठे ही थे कि करीब एक दर्जन लोगों के सैंपल लेने के लिए कॉल आयी, जिनमें कई आइसोलेशन में थे. फिर मोर्चरी में भी डेड बॉडी का सैंपल लेने जाना था. हम तुरंत उठे, पीपीई किट उठाई और जिला अस्पताल के लिए निकल पड़े. वहां पहुंचकर सैंपल लेकर शाम के करीब साढ़े छह बजे फ्री हुए. इसके बाद फिर होटल पहुंचे. वहां स्नान किया, सैनिटाइज किया. खाना खा ही रहे थे कि डॉक्टरों का सैंपल लेने के लिए तत्काल आने का आदेश आया. फिर वहां पीपीई किट पहनी, सैंपल लिए और सुबह के चार बजे फ्री हुए. सुबह होटल लौट कर फिर नहाये. पीपीई किट पहनना अपने आप में थकान भरा होता है. इसे करीब 10-12 घंटे हमें पहनना होता है. अंदर पसीना बह रहा होता है. शरीर पूरा लॉक हो जाता है. बाहर की हवा नहीं मिल पाती. जब उतारते हैं तो हाथ-पैर गर्दन अकड़ जाते हैं. लेकिन क्या करें अपने आप को बचाने की चुनौती भी है.
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कोरोना वॉरियर्स ने कहा कि उन्हें दिन में 10-12 घंटे तक पीपीई किट पहननी पड़ती है (फाइल फोटो)




सैंपल लेने के दौरान हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं मरीज
कोरोना वॉरियर्स ने कहा कि जब हम सैंपल लेने जाते हैं तो कुछ मरीज बहुत ही अभद्रता करते हैं. वो अपना मास्क हटा देते हैं. हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं. हम डिस्टेंसिंग के लिए कहते हैं तो सुनते नहीं हैं. ऐसा सब देखकर बहुत खराब लगता है. हालांकि कुछ लोग इस आपदा के दौर को समझते हैं और तरीके से भी पेश आते हैं. जब उनके अपने दूर खड़े होते हैं और हम उनके पास होते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है और यह भावुक कर देने वाला पल होता है.

लूज मोशन और पेट खराबी झेल रहे वॉरियर, नहीं मिल रही पूरी डाइट
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से हमें होटल में ठहराया गया है. लेकिन वहां खाने-पीने की ठीक  व्यवस्था नहीं है. राज्य सरकार की ओर से गाइडलाइन है इसके बावजूद प्रॉपर डाइट नहीं दी जा रही है. इसकी शिकायत की गई तो लॉकडाउन का हवाला दे दिया गया. होटल में 8-10 ऐसे वॉरियर हैं जिनका पेट खराब है और लूज मोशन से जूझ रहे हैं. ऐसी स्थिति में 18 से 20 घंटे रोजाना कैसे काम किया जाए?

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कोरोना वॉरियर्स ने साझा किया अपनी एक्सपीरियंस (फाइल फोटो)


21 दिन तक है परिवार से दूरी, ठीक रहे तो लौटेंगे घर
कोरोना वॉरियर्स ने बताया कि 20 से 26 अप्रैल तक मोबाइल टीम में ड्यूटी के बाद हमें 14 दिन तक क्वारंटाइन में रहना पड़ेगा. इस दौरान दो बार चेकअप होंगे. अगर ठीक रहे तो ही घर जाने दिया जाएगा लेकिन अगर कोरोना के लक्षण दिखाई दिए तो हमें भी आइसोलेशन में रखा जाएगा.

बच्चों के फोटो देखकर हो लेते हैं खुश
उन्होंने कहा कि ड्यूटी इतनी व्यस्तताओं से भरी है कि परिवार के लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं हो पाता. बच्चों की फोटो फोन पर आ जाती हैं तो देख लेते हैं और सुकून मिल जाता है. कभी वक्त होता है तो फोन पर बात हो जाती है. घर के लोग काफी चिंता में रहते हैं लेकिन फिर परिस्थिति को समझते हैं. हमारी सभी लोगों से गुजारिश है कि हमारे परिवारवालों को सहयोग करें न कि ये महसूस कराएं कि उनका बेटा लौटकर आएगा या नहीं.

(एस एन मेडिकल कॉलेज, आगरा की लेबोरेट्री में कार्यरत ओर कोरोना के सैंपल के लिए बनाई गई मोबाइल टीम में तैनात योद्धाओं की कहानी, उन्हीं की जुबानी)

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