हफ्ते भर में भी नहीं आ रही RT-PCR रिपोर्ट, इलाज के लिए भटक रहे कोरोना मरीज
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हफ्ते भर में भी नहीं आ रही RT-PCR रिपोर्ट, इलाज के लिए भटक रहे कोरोना मरीज
मथुरा में कोरोना की रिपोर्ट 6-8 दिन में आ रही है.

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट आने में 6-8 दिन का समय लग रहा है जिससे कोरोना पॉज़िटिव भी इलाज से वंचित हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण से जहां लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं, वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं में सामने आ रही बदइंतजामी का खामियाजा भी मरीजों को ही भुगतना पड़ रहा है. कोरोना की सुगबुगाहट से ही तनाव में आए मरीजों और संदिग्धों को कोरोना जांच रिपोर्ट (RT-PCR) का पता चलने में ही हफ्ते बीत रहे हैं. जबकि कोरोना जांच रिपोर्ट के परिणाम के लिए 24 घंटे का समय तय किया गया है.

ऐसे में न तो मरीजों को समय पर इलाज ही मिल पा रहा है और न ही कोरोना प्रसार को रोकने के लिए पीड़ित के सम्पर्क में आए लोगों को तत्काल प्रभाव से क्वारेंटीन करने की प्रक्रिया की जा रही है.

पिछले दो हफ्ते से आगरा मंडल के मथुरा जिले में कोरोना जांच रिपोर्ट में देरी के अधिकांश मामले सामने आ रहे हैं. इस मामले पर जब News18hindi ने पूरी पड़ताल की तो पीड़ितों सहित स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की और समस्या की वजह बताई.



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कोरोना मरीज बोले, दो जुलाई को कराया सैंपल, 8 तक नहीं आई रिपोर्ट

मथुरा जिला अस्पताल में ट्रू नॉट रिपोर्ट में पॉजिटिव आई 40 वर्षीय महिला ने बताया कि एक जुलाई को हुई जांच में कोरोना आने के बाद दो जुलाई को उनका सैम्पल आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच के लिए भेजा गया लेकिन आठ जुलाई तक उनकी रिपोर्ट नहीं आई. जबकि वे अस्पताल में भर्ती रहकर और ट्रूनॉट से हुई रिपोर्ट में नेगेटिव आने के बाद घर भी लौट आईं. इस दौरान वे बार-बार रिपोर्ट के बारे में पूछती रहीं. वहीं पूरा परिवार मानसिक तनाव में रहा.

वहीं मथुरा के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 45 वर्षीय शख्स ने बताया कि उनके पॉजिटिव आने के बाद उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया साथ ही उनके चार परिजनों के भी सैम्पल लिए गए लेकिन सात दिन तक पूछने के बाद भी कहा गया कि रिपोर्ट नहीं आई. वहीं आठवें दिन आई रिपोर्ट में बताया कि परिवार नेगेटिव था, हालांकि इस दौरान परिवार घर में पूरी तरह बन्द हो गया, आसपास के लोगों ने भी मदद करना बंद कर दिया था.

इनके अलावा एक और कोरोना पॉजिटव ने बताया कि उसकी रिपोर्ट खुद पांच दिन बाद उसे मिली, वो भी तब जबकि वह रिपोर्ट लेने सीएमओ ऑफिस पहुंचा.

करीब 300 सैम्पल जा रहे रोजाना..

मथुरा जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जिले से कोरोना संदिग्धों के करीब 300 सैम्पल रोजाना लिए जा रहे हैं. कुछ दिन पहले तक मथुरा वेटरिनरी विश्वविद्यालय में बनी लैब में भी भेजे जा रहे थे, लेकिन कुछ कमी आने के कारण वह बन्द हो गई है. लिहाजा दो जगहों आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज और जालमा इंस्टीट्यूट में भेजे जा रहे हैं. जहां से किसी दिन 100 से ज्यादा सैम्पल की रिपोर्ट आ जाती है, किसी दिन कोई भी रिपोर्ट नहीं आती है तो किसी दिन 20-30 की संख्या में ही रिपोर्ट आ पाती हैं.

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वहीं जब आगरा सीएमओ आरसी पांडेय से बात की गईं तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि आगरा जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की कोरोना जांच की रिपोर्ट 24 घण्टे में दे रहे हैं. इतना ही नहीं मरीजों को फोन पर जानकारी भी दे रहे हैं लेकिन आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी सहित कई जगहों के सैम्पल एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा और जालमा इंस्टिट्यूट में टेस्टिंग के लिए जा रहे हैं लिहाजा रिपोर्ट समय से न मिल पाने की जानकारी इन्हीं संस्थानों से मिलेगी.

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एस एन मेडिकल कॉलेज ने बताई ये बड़ी वजह...

सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि वे 24-48 घंटे के बीच में कोरोना सैम्पलों की रिपोर्ट दे रहे हैं.

इनके साथ ही एसएन कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी की हेड ऑफ द डिपार्टमेंट और लैब नोडल ऑफिसर डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि किसी भी कोरोना सैंपल को लेने के बाद कन्साइनमेंट बनती है. मथुरा जिले और आसपास के सभी सैंपल पहले एसएन कॉलेज में ही आ रहे थे, तो उनकी जांच रिपोर्ट 24-48 घंटे के भीतर ही दी जा रही थी.

इसके बाद मथुरा वेटरनरी यूनिवर्सिटी में बनी लैब में सैंपल भेजे जाने लगे. फिर जालमा इंस्टीट्यूट को भी सैंपल भेजे गए. जबकि कुछ सैंपल एसएन कॉलेज में आए, लिहाजा तीन जगह बंटने से सैंपलों की कन्साइनमेंट डिलीट करने, फिर दोबारा बनाने या ट्रांसफर करने में वक्त लगा. इस दौरान लैब में सैंपल की जांच होने के बावजूद जांच रिपोर्ट को पोर्टल पर नहीं डाला जा सकता था. लिहाजा रिपोर्ट में अनियमितता सामने आई.

मथुरा में आई इस समस्या के लिए अकेला कोई विभाग जिम्मेदार नहीं है, एक लैब में कमी आने और जालमा ओवरलोडेड होने और एक लैब से अटैच न होने के कारण दिक्कतें हुई हैं, जबकि अगर किसी लैब से कोई जिला अटैच है तो वहां सिस्टम बना हुआ है और तय समय में रिपोर्ट आ रही हैं.



पहले से कई गुना बढ़ी लैब की कैपिसटी

डॉ. आरती कहती हैं कि कोरोना का आउटब्रेक होने पर 45-150 तक जांच शुरू हुईं जो अब 1400 से ऊपर रोजाना पहुंच गई है. इसके साथ ही मैनपावर, उपकरण, मशीनें भी बढ़ाई गई हैं, हाल ही में सैफई और एएमयू ओवरलोड होने के बाद फिरोजाबाद और अलीगढ़ के सैंपल एसएन कॉलेज लाए गए. शनिवार को झांसी के भी सैंपल लाए गए. लिहाजा सभी लैब मिलजुलकर बेहतर काम करने की कोशिश कर रही हैं.

गौरतलब है कि हाल ही में योगी सरकार ने यूपी में सैंपलों की संख्या बढाने के भी निर्देश दिए हैं. ऐसे में इतने सैंपलों पर ही कई लैब के ओवरलोडेड होने और 24 घंटे में जांच रिपोर्ट न आने से आम लोगों और कोरोना मरीजों की मुश्किलें बढ़ रही हैं.
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