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यमुना एक्सप्रेसवे पर संभल कर चलेंगे तभी बचेंगे, क्योंकि...

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 22, 2019, 3:15 PM IST
यमुना एक्सप्रेसवे पर संभल कर चलेंगे तभी बचेंगे, क्योंकि...
यमुना एक्सप्रेसवे पर पिछले सात सालों में 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

आगरा (Agra) से नोएडा (Noida) तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर अगस्त 2012 से लेकर जनवरी 2018 तक ही 5000 एक्सीडेंट हो चुके हैं.

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आगरा. 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर संभल कर चलेंगे तभी बचेंगे. जी हां, त्योहारी सीजन में एक्सप्रेसवे पर वाहनों का आवागमन बढ़ा है, लेकिन जेपी इंन्फ्राटेक की लापरवाही और फर्राटेदार सड़क पर घूमते वाहन कभी भी खुशियां छीन सकते हैं. आगरा (Agra) में भीषण बस हादसे के बाद चंद दिनों तक बरती गयी सतर्कत अब एक बार फिर दरकिनार कर दी गई है. यमुना एक्सप्रेसव पर दूर-दूर तक सुरक्षा का सख्ती से पालन कराने वाली पुलिस भी नजर नहीं आती. इसका नतीजा है कि वाहन बेलगाम हो गए हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

आगरा से नोएडा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे पर अगस्त 2012 से लेकर जनवरी 2018 तक ही 5000 एक्सीडेंट हो चुके हैं. इन हादसों में 700 से अधिक लोगों की मौत हुई और 2000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए. इसी कड़ी में सबसे भीषण हादसा उस वक्त हुआ जब आगरा में बस तीस फीट नीचे खाई में गिर गई थी. इस दुखद हादसे में 29 लोगों की मौत हो हुई थी. इस हादसे के बाद सीएम योगी ने यमुना एक्सप्रेसवे का संचालन करने वाले जेपी इन्फ्राटेक के अधिकारियों को तलब किया और हादसे रोकने के लिए बताए गए उपायों को लागू करने को कहा. सीएम योगी के सामने सबकुछ ठीक करने का दावा करने वाले जेपी ग्रुप ने कुछ ही बातों पर अमल किया शेष वादा ही रह गया.

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जगह-जगह बालू के ढेर हादसे को दावत दे रहे हैं.


पशुओं को यमुना एक्सप्रेसवे पर आने से रोकने के इंतजाम नाकाफी हैं. रेलिंग की ऊंचाई कम है जिसकी वजह से गाय अक्सर यमुना एक्सप्रेसवे पर आ जाती हैं. ऐसे में भयानक हादसे का अंदेशा बना रहता है. बिना हेलमेट के बाइक सवार फर्राटा भी भरते हैं, उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है.

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रेलिंग की ऊंचाई कम होने की वजह से आवर जानवर भी बन रहे हादसे की वजह


डिवाइडर की जगह लगाया जाए थ्राई पिलर
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर अकसर दुर्घटना होते ही वाहन डिवाइडर से टकराने के बाद दूसरी तरफ चला जाता है. ऐसे में फिर हादसे की आशंका रहती है. आईआईटी ने डिवाइडर के बदले मजबूत थ्राई पिलर यानी तिकोने खंभे लगाने के लिए कहा है. इससे टकराकर वाहन दूसरी ओर नहीं जाएंगे.

रंबल स्ट्रिप लगाने का सुझाव

रात के समय अक्सर चालक को नींद आने के कारण सबसे अधिक हादसे होते हैं. इसे रोकने के लिए एक्सप्रेस-वे पर रंबल स्ट्रिप लगाई जाए ताकि निर्धारित स्थान पर रंबल स्ट्रिप लगने से चालक को झटके लगेंगे और उसे नींद नहीं आएगी.

बैरियर की ऊंचाई बढ़ाई जाए

यमुना एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर लगे बैरियर को और ऊंचा किया जाएगा. बैरियर नीचा होने से जानवर आदि के एक्सप्रेस वे पर आने का खतरा रहता है. जानवरों के आने से हादसे की आशंका बढ़ जाती है. इसके चलते ये बैरियर ऊंचे किए जाएंगे.

स्पीड कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए

यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की बेकाबू गति पर अंकुश लगाने के लिए यमुना एक्सप्रेस वे सिर्फ 30 स्पीड कैमरे लगे हैं. इन कैमरों की संख्या दोगुनी की जानी है. अब 30 और स्पीड कैमरे लगाए जाने बाकी हैं. इन पर अमल सर्वाधिक जरूरी है ताकि वाहनों की तय गति सीमा का पालन करना हो.

इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे किनारे की रेलिंग की ऊंचाई बढ़ाई जाए. वाहन चालक नशे में तो नहीं हैं, इसका टेस्ट किया जाए. गाड़ी के टॉयर पुराने हैं तो यमुना एक्सप्रेसवे का सफर जानलेवा हो सकता है. एंट्री प्वाइंट पर पुलिस बिना हेलमेट बाइकवालों के साथ ही खटारा बसों को रोके.

चार साल में इतने हादसे
2015 में एक्सप्रेसवे पर 919 हादसे हुए जिसमें 99 लोगों की मौत हुई. 2016 में 1299 हादसों में 105 लोगों की जान गई. 2017 में 763 हादसे में 110 लोगों की मौत हुई. 2018 में 811 हादसों में 113 लोगों ने जान गंवाई. 2019 में अब तक 132 हादसे हो चुके हैं जिनमें 53 की जान गई.

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First published: October 22, 2019, 3:15 PM IST
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