अपना शहर चुनें

States

5 साल जेल में रहकर छूटे बेगुनाह दंपति को अब बच्चों की तलाश, कोर्ट ने आगरा पुलिस पर उठाए सवाल

कोर्ट ने विवेचक पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. (सांकेतिक फोटो)
कोर्ट ने विवेचक पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. (सांकेतिक फोटो)

Agra Child Murder Case: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में हत्या (Murder) के मामले में पांच साल से बेगुनाह होने के बावजूद जेल (Jail) में बंद दंपति रिहा हो गए. अदालत ने बिना सबूत दंपति को जेल भेजने के लिए पुलिस को लगाई फटकार.

  • Share this:
आगरा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में  हत्या (Murder) के मामले में पांच साल से  बेगुनाह होने के बावजूद जेल (Jail) में बंद दंपति रिहा हो गये. एडीजे ज्ञानेंद्र त्रिपाठी के फैसले के बाद जिला जेल से यह रिहाई हुई. दंपति पुलिस (Police) की यातना और फिर बेवजह जेल की सलाखों में कैद रहने की सजा के बाद अब अपने बच्चों से मिलने के लिए तड़प रहे हैं. दंपति को जब जेल में कैद किया गया था, उस समय उनका बेटा 5 साल और बेटी 3 साल की थी. दोनों बच्चों को किसी अनाथ आश्रम में भेज दिया गया था. जेल से छूटने के बाद मां-बाप इन बच्चों को तलाश रहे हैं.

इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान एडीजे के फैसले ने पुलिसिया सिस्टम की अक्षम्य लापरवाही को उजागर कर दिया. बिना सबूत के जल्दबाजी में पुलिस ने हत्या जैसे जघन्य मामले में जिस तरह से निर्दोष दंपति को जेल भेजा था, उससे पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि पीड़ित को मुआवजा दिलाने के साथ ही विवेचक पर सख्त कार्रवाई की जाए. इसके लिए एसएसपी को पत्र भी लिखा गया है.

जेल से रिहा हुए दंपति से जब न्यूज 18 ने बात की तो उनकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे. दंपति ने एक-एक कर पुलिस यातनाओं के बारे में बताया. साथ ही यह भी कहा कि तत्कालीन इंसपेक्टर ब्रह्म सिंह ने उन्हें उल्टा लटकाकर पीटा था. अब ईश्वर का धन्यवाद करते दंपति अदालत को भगवान बता रहे हैं. दंपति की गुहार है कि आरोपी विवेचक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और असली हत्यारे पकड़े जाएं.

सितबंर 2015 की वारदात


घटना एक सितंबर, 2015 की है. बाह क्षेत्र के जरार निवासी योगेंद्र सिंह का पांच साल का बेटा रंजीत सिंह उर्फ चुन्ना शाम तकरीबन साढ़े पांच बजे घर से अपनी मां श्वेता से अंबरीश गुप्ता की दुकान पर जाने की कहकर गया था. रात तक लौटकर नहीं आया तो योगेंद्र सिंह ने बेटे की तलाश की. अंबरीश की दुकान बंद मिली. कई लोगों ने बच्चे को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला. दो सितंबर, 2015 को सुबह 11 बजे कोतवाल धर्मशाला के पास बृह्मचारी गुप्ता के बंद पड़े मकान में रंजीत की लाश मिली. योगेंद्र सिंह ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि बेटे की हत्या मोहल्ला मसजिद निवासी नरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी नजमा ने की है.


बिना जांच के लगा दी चार्जशीट


अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 6 गवाहों के साथ ही 32 सबूत पेश किए गए. अभियुक्त की ओर से गवाहों से जिरह अधिवक्ता वंशो बाबू ने की. जिरह में विवेचक ने कोर्ट में स्वीकार कर लिया कि बच्चे की हत्या को लेकर लोगों में बहुत आक्रोश था. इसलिए हत्या का कारण जानने प्रयास नहीं किया. विवेचक ने स्वीकार किया कि आनन-फानन में विवेचना पूर्ण करके चार्जशीट लगा दी.

आखिर हत्या किसने की थी


अदालत ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि वास्तविक हत्यारोपी स्वच्छंद विचरण के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि निर्दोषों को बेवजह 5 साल तक जेल में रहना पड़ा. इसके लिए निश्चित रूप से अभियोजन और विशेष रूप से विवेचक की उपेक्षात्मक व उदासीनता से परिपूर्ण विवेचना उत्तरदायी है. अपर जिला जज ने एसएसपी को पत्र लिखकर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के आदेश किए हैं. निर्दोषों को पांच साल तक जेल में रखने पर उन्हें बतौर प्रतिकर मुआवजा दिलाने का नोटिस भी जारी किया है. विवेचक अलीगढ़ की क्राइम ब्रांच प्रभारी ब्रह्म सिंह थे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज