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आजादी की लड़ाई के दौरान आगरा की इस इमारत में 11 दिन रूके थे गांधीजी

कालिंदी

कालिंदी के तट पर बना गांधी स्मारक

जंगे आजादी के दौरान महात्मा गांधी का कई बार आगरा का दौरा हुआ. आगरा में रहते हुए उन्होंने कई बार सभाएं की.

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    जंगे आजादी के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का कई बार आगरा में आगमन हुआ. आगरा में रहते हुए उन्होंने कई बार सभाएं की. जब भी गांधी जी आगरा आते थे तो कालन्दी नदी के तट पर बने गांधी स्मारक में रुका करते थे .यहीं से वह कार्यकर्ताओं को संगठित व आजादी की लड़ाई में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे .आज भी ये जगह आगरा का बेबी ताज कहे जाने वाले एत्माद्दौला के बगल में बनी हुई है. इस इमारत पर समय की मार और देख रेख के अभाव के कारण जर्जर होती जा रही है .इसके बारे में कहा जाता है कि यहां गांधी जी स्वास्थ्य लाभ के लिए 11 दिन तक रुके थे.

    1929 में आगरा आए थे गांधी जी स्वास्थ्य लाभ के लिए 11 दिन रूके थे

    1929 में आगरा आए गांधी जी ने इस बगीची को ही अपने 11 दिनों  के स्वास्थ लाभ लिए चुना था . इस परिसर में बने चबूतरे पर बैठ कर बापू \’वैष्णव जन तो तेने कहिए…\’ गुनगुनाते तो उनके साथ बैठे लोग \’पीर पराई जाने रे…\’ गाना दोहराते. वर्ष 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद इस बगीची को दान कर दिया गया और इसे नया नाम मिला गांधी स्मारक. वर्ष 2015-16 में एडीए ने यहां जीर्णोद्धार कराया था.बारिश में यहां बने भवन के छज्जे टूट गए हैं. क्षेत्रीय लोगों को भी गांधी स्मारक के महत्व के बारे में अधिक जानकारी नहीं है.

    नहीं हो रही है स्मारक की देखभाल जर्जर हो गई इमारत टूट गए हैं छज्जे

    गांधी स्मारक में लगे पत्थर पर अंकित विवरण के अनुसार गांधी जी ने स्वास्थ्य लाभ के लिए वर्ष 1929 में 11 से 21 सितंबर तक 11 दिन ब्रजमोहन दास मेहरा की बगीची में प्रवास किया था.उनके साथ कस्तूरबा गांधी, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन और जयप्रकाश नारायण की पत्नी प्रभावती यहां रहे थे .उनसे मिलने बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचा करते थे. गांधी जी की हत्या के बाद वर्ष 1948 में ब्रजमोहन दास मेहरा ने अपने पिता रामकृष्ण दास मेहरा की स्मृति में बगीची को महात्मा गांधी स्मारक ट्रस्ट को दान कर दिया था. यहां  के साथ चबूतरा सही कराया गया.रंगाई-पुताई कराई गई थी. जिन कमरों में गांधी जी रुके थे, वहां संग्रहालय बना दिया गया है.गांधी स्मारक का गेट बंद रहता है और यहां कभी-कभार ही लोग पहुंचते हैं. उन्हें जानकारी देने वाला भी कोई नहीं मिलता.समय की मार के साथ-साथ यह बिल्डिंग भी अब जर्जर होती जा रही है बारिश के कारण ऊपरी मंजिल के छज्जे भी गिर गए हैं कई पत्थर भी टूट गए हैं अधिकांश यह भवन अब बंद रहता है.

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