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Ganesh Chaturthi 2022: आगरा में भी है 261 साल पुराना सिद्धि विनायक मंदिर, जानें किस मराठा सरदार ने की थी स्थापना

Ganesh Chaturthi Celebration in Agra: आगरा गोकुलपुरा में बने 261 साल पुराने ऐतिहासिक सिद्धि विनायक मंदिर की कहानी बताने ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

माना जाता है कि मंदिर की स्थापना मुगल काल में वर्ष 1646 में हुयी थी.
मराठा सरदार महादजी सिंधिया ने वर्ष 1760 में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था.

रिपोर्ट:हरीकांत शर्मा
आगरा. देवों में प्रथम पूज्य गणपति बप्पा बुधवार को घर-घर में विराजमान हो गए हैं. 3 साल के बाद गणेश मंदिरों में रौनक लौटी है. इस बार बड़ी धूमधाम से आगरा शहर में गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है. आज हम आपको आगरा के गोकुलपुरा में बने 261 साल पुराने ऐतिहासिक सिद्धि विनायक मंदिर की कहानी बताने जा रहे हैं. यहां गणेशोत्सव की शुरुआत मराठा सरदार महादजी सिंधिया द्वारा कराई गई थी, जो अपने आप में बेहद खास है.

माना जाता है कि मंदिर की स्थापना मुगल काल में वर्ष 1646 में हुयी थी. मराठा सरदार महादजी सिंधिया ने वर्ष 1760 में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था. उस वक्त उन्होंने मंदिर में पीपल का वृक्ष भी लगाया था जो मंदिर परिसर में आज भी मौजूद है. उस समय वो ग्वालियर के शासक थे और आगरा प्रवास के दौरान जब भी आते थे वह इस मंदिर में पूजा अर्चना जरूर करते थे. इस मंदिर का इतिहास मुगलों और अंग्रेजों से जुड़ा है. कई बार मुगलों ने इस मंदिर पर आक्रमण भी किया और इसे तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन समय के साथ यह मंदिर आज भी मौजूद है.

चंदन की पालकी पर विराजमान है सिद्धि विनायक
कालांतर में यह मंदिर सिद्धि विनायक के नाम से प्रसिद्ध हो गया. गुजराती नागर और मराठा परिवारों की आस्था के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित इस मंदिर में आगरा प्रवास के दौरान वो नियमित पूजन−अर्चन कराते रहे. स्थानीय लोग बताते हैं कि महादजी सिंधिया ने ही गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर से शाही संरक्षण में धूमधाम से गणेश शाेभायात्रा की शुरूआत करायी थी. आज भी मंदिर में भगवान गणेश की 100 साल से ज्यादा पुरानी प्रतिमा है, जो चंदन के सिंहासन पर विराजमान है. चंदन से बनी पालकी पर भगवान गणेश को नगर भ्रमण कराया जाता है और उनकी शोभायात्रा भी निकाली जाती है.

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गणेश चतुर्थी पर लगाया जाता है 56 प्रकार का भोग
मंदिर के पुजारी ज्ञानेश शास्त्री महाराज बताते हैं कि मंदिर अपने आप में बेहद ऐतिहासिक है. यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. गणेश चतुर्थी के मौके पर 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं. भगवान सिद्धिविनायक को बेसन के मोदक बेहद पसंद हैं. इस वजह से बेसन के मोदक और घास चढ़ाई जाती है.

मंदिर खुलने का समय
सुबह 5:00 बजे 1:00 बजे तक, दोपहर 2:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है.

Shree siddhi vinayak Ganesh mandirhttps://maps.app.goo.gl/AWuU8xGmCYfU4Wd96

Tags: Agra news, Ganesh Chaturthi

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