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Inner ring road:-  20 दिन से अस्पताल में पड़े हैं किसान नेता, अब मिलने पहुंचे अधिकारी

अस्पताल

अस्पताल में किसानों से मिलने पहुंचे एडीएम सिटी

इनर रिंग रोड मामले में किसान लगातार कई महीनों से प्रोटेस्ट कर रहे हैं.हार मानकर किसान भूख हड़ताल पर चले गए. भूख हड़ताल पर जाने के बाद अचानक से किसानों की तबीयत बिगड़ने लगी.किसानों की बिगड़ती तबीयत को देखकर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां पर इन किसानों को भर्ती हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं. 

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    Inner ring road:- इनर रिंग रोड मामले में किसान लगातार कई महीनों से प्रोटेस्ट कर रहे हैं . लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है. हार मानकर किसान भूख हड़ताल पर चले गए. भूख हड़ताल पर जाने के बाद अचानक से किसानों की तबीयत बिगड़ने लगी.किसानों की बिगड़ती तबीयत को देखकर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां पर इन किसानों को भर्ती हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं. लेकिन कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मिलने नहीं आया. जब खबर मीडिया अखबारों की हेडलाइंस बनी तब आगरा के एडीएम सिटी प्रभाकांत अवस्थी आगरा जिला अस्पताल में किसानों से मिलने पहुंचे.

    जब आरोपियों की हो गई है पहचान तो पुलिस क्यों नहीं करती गिरफ्तार
    किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि जब इनर रिंग रोड घोटाले में आरोपियों की पहचान हो चुकी है तो आखिर क्या वजह है कि पुलिस इन्हें क्यों गिरफ्तार कर जेल नहीं भेज रही है. इसके लिए किसानों को लगातार प्रदर्शन करना पड़ रहा है. भूख हड़ताल पर जा चुके हैं. अगर किसी किसान की हालत ज्यादा खराब हो गई तो उसके जिम्मेदार प्रशासन होगा. प्रशासन ने इस मामले में आरोपियों के नाम उजागर कर दिए हैं लेकिन एक चीज समझ नहीं आ रही कि ऐसी क्या वजह है जो आरोपियों को जेल भेजने से बचा रही है.

    क्या है इनर रिंग रोड का पूरा मामला.
    दरअसल पूरा मामला साल 2009-10 में तत्कालीन सरकार द्वारा आगरा के नेशनल हाइवे 19 को ग्वालियर से जोड़ने के लिए इनर रिंग रोड बनाने की तैयारी की गई थी . इसको लेकर समझौता करते हुए आगरा विकास प्राधिकरण को जेपी ग्रुप ने 500 करोड़ रुपये दिए. वर्तमान में इसका पहला चरण पूरा हो गया है.दूसरे चरण का काम हो रहा है और तीन चरणों में इस प्रोजेक्ट को पूरा करना है. किसानों के साथ धोखा करते हुए अधिकारियों ने स्टाम्प में बेईमानी, बैक डेट में बैनामे और जानबूझकर अवार्ड घोषित कर बिना मुआवजा दिए जमीन अधिग्रहण कर ली. 500 बीघे से ज्यादा जमीन को ग्राम सभा के पट्टे और अन्य तरीकों से सरकारी जमीन दिखा कर अपने जानकारों के नाम कर दिया. पुराने स्टॉम्प पर 2013 डेक्ट लागू होने के बावजूद 300 बैनामे करवाये गए और जमीनों को रोड से दूर दिखा कर दो करोड़ रुपये का घोटाला किया गया. नियमों को इस तरह ताक पर रखा कर ये सौदेबाजी हुई. आगरा के किसान श्याम सिंह चाहर का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिकारियों ने जमकर घोटाले किये हैं. तीन बार प्रशासनिक जांच में तत्कालीन एडीएम वित्त जे पी सिंह और तमाम कर्मचारी, भूमाफिया आदि दोषी पाए गए हैं.इसके बाद भी किसानों को न्याय नहीं मिल पाया है.

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