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 Explainer :- विश्व डाक दिवस पर ख़ास आगरा के सबसे बड़े डाक घर के बारे में जानिए    

आगरा

आगरा प्रधान डाकघर में रखा पत्र पेटिका

9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है .एक समय ऐसा था जब चिट्ठियों और पत्रों के माध्यम से ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचनाएं पहुंचती थी. 

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    9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है .एक समय ऐसा था जब चिट्ठियों और पत्रों के माध्यम से ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचनाएं पहुंचती थी. बहुत सारे काम डाक विभाग के द्वारा किए जाते थे. यहां तक कि पत्रकारिता भी डाक विभाग के द्वारा ही संभव थी. अपने आर्टिकल अपने लिखे हुए लेख समाचार पत्रों तक इसी माध्यम से ही पहुंचते थे. यहां तक कि उस वक्त अपने खून पसीने से कमाई हुई आमदनी को लोग मनीआर्डर के जरिए डाक विभाग के भरोसे अपनों तक पहुंचाते थे. डाकिया ही वह शख्स होता है जो अपने थैले में खुशी और गम दोनों की सूचना एक साथ लेकर चलता है. 1874 में पोस्टल यूनियन संघ की स्थापना हुई थी. जिसमें 22 देश शामिल थे. एक दूसरे के विचारों का आदान प्रदान करने के लिए इस संघ की स्थापना हुई थी .1876 में पहली बार भारत इस संगठन का सदस्य बना तब से लेकर अब तक 148 साल का विश्व का डाक विभाग हो गया है.

    1931 में आगरा का प्रधान डाकघर अंग्रेजो के द्वारा बनाया गया था .एक दशक बीत जाने के बाद भी आज भी यहां डाक का काम जारी है. आपको इस प्रतापपुरा स्थित डाक विभाग में कई सारी ऐतिहासिक चीजें देखने को मिल जाएंगे. यहां आज भी डेढ़ सौ साल तक पुराना पत्र पेटिका का मौजूद है. जो अब डाक विभाग की शोभा बढ़ा रहा है. इसके साथ ही यहां ऐतिहासिक चीजों को संजोए एक संग्रहालय भी है.जिसे शहरवासी देखने आते हैं.अगर आपको भी समय मिले तो इस म्यूजियम को देखने जरूर जाइएगा और उस समय के संचार के साधनों को खुद भी देखिएगा और अपने जिज्ञासु बच्चों को भी रूबरू कराइए.

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