Lockdown 2.0: पिता के इलाज के लिए काटता रहा हॉस्पिटल के चक्कर, नहीं सुनी गई गुहार
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Lockdown 2.0: पिता के इलाज के लिए काटता रहा हॉस्पिटल के चक्कर, नहीं सुनी गई गुहार
(प्रतीकात्मक फोटो)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का आगरा (Agra) में गंभीर रुप से बीमार एक मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती नहीं किया गया. इलाज के अभाव में इस मरीज ने दम तोड़ दिया.

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  • Last Updated: April 29, 2020, 8:14 AM IST
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आगरा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का आगरा शहर (Agra City) कोरोना के संक्रमण से परेशान है. इस दौरान कई बार गंभीर रूप से बीमार मरीजों (Critically Ill Patients) को अलग तरह की परेशानियों से जुझना पड़ रहा है. इसी तरह एक वाकया सामने आया है. अमर उजाला की एक खबर के अनुसार, यहां एक बेटा अपने पिता का इलाज कराने के लिए परेशान था. इस दौरान उसने 6 हॉस्पिटल के चक्कर काटे. लेकिन कोरोना के कारण किसी भी हॉस्पिटल ने उन्हें भर्ती नहीं किया. इस व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी हो रही थी. इसके बावजूद मरीज को कही भी ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिला. बेहोशी के दौरान पांच घंटे का लंबा इंतजार इसलिए करना पड़ा क्योंकि मरीज का कोरोना संक्रमण की जांच करानी थी. लेकिन इलाज में देरी के कारण बेटे के सामने ही पिता ने दम तोड़ दिया.

शुगर की बीमारी से थे परेशान
खबर के अनुसार, बल्केश्वर के भगवान नगर के रहने वाले बिजनेसमैन मुकेश गोयल (55) शुगर की बीमारी से ग्रसित थे. उनके बेटे निखिल ने बताया कि सोमवार की रात 2 बजे उनके पिता को सांस लेने में परेशानी हुई. उसके बाद उसने मंगलवार की सुबह 6 बजे से पिता के इलाज के लिए शहर के कई हॉस्पिटलों का दरवाजा खटखटाया. पिता के साथ बेटा इलाज के लिए भटकता रहा. लेकिन किसी भी हॉस्पिटल ने इस मरीज का इलाज नहीं किया. इस दौरान सभी हॉस्पिटलों में कोरोना टेस्ट कराया या नहीं कराया यही पूछा जाता.

प्रशासन और डॉक्टरों को ठहराया जिम्मेदार
पिता की मौत के बाद निखिल ने इसके लिए प्रशासन और डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है. निखिल का कहना है कि अगर उन्हें ऑक्सीजन मिल जाता तो उनकी मौत नहीं हुई होती. निखिल ने यह भी बताया कि मंगलवार को वो सुबह आठ बजे वो कोरोना की जांच कराने जिला हॉस्पिटल पहुंचा. इस दौरान वहां उसके पिता पांच घंटे तक बेहोशी की हालत में पड़े रहे. उसके बाद दोपहर दो बजे कोविड की जांच के लिए सैंपल लिया गया. वहां भर्ती नहीं किया गया. उसके बाद एसएन में लाया गया. लेकिन उसके पिता को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया. वहां से घड़ी वाली बिल्डिंग में भेज दिया गया. निखिल ने कहा कि वो सबसे ऑक्सीजन सिलेंडर मांगता रहा. लेकिन इलाज करना तो दूर, किसी ने भी मरीज को छुआ तक नहीं.




डीएम से मांगी गई रिपोर्ट
इस मामले में आगरा के डीएम से रिपोर्ट मांगी गई है. प्रमुख सचिव और आगरा के नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि ये तय किया जाएगा कि इलाज और भर्ती करने में किसी भी तरह की देरी न हो. इस मामले में प्रमुख सचिव ने नाराजगी जताई है. साथ की कार्रवाई के संकेत दिए हैं.

इलाज कराने के लिए रात में दौड़े डीएम-एसएसपी
आगरा में नोडल अधिकारी की मंगलवार को मौजूदगी के बीच इलाज के दौरान मौत के मामले की जानकारी मिलने के बाद रात में अधिकारी चिह्नित हॉस्पिटलों का निरीक्षण करने पहुंचे. इस दौरान अधिकारियों ने गंभीर स्थिति वाले मरीजों का तत्काल भर्ती करने और इलाज कराने के निर्देश दिए. चिह्नित 25 हॉस्पिटलों में बिना कोविड टेस्ट के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है.

 

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