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UP: छात्रवृत्ति घोटाले में 66 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, जानें क्या है पूरा मामला

इस मुकदमे में सहायक विकास अधिकारी और आईटीआई के प्रबंधक और संचालक भी आरोपी बनाए गए हैं. (सांकेतिक फोटो)
इस मुकदमे में सहायक विकास अधिकारी और आईटीआई के प्रबंधक और संचालक भी आरोपी बनाए गए हैं. (सांकेतिक फोटो)

साल 2015-2016 से 2019-2020 के बीच निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के संचालकों के साथ मिलकर छात्रवृत्ति के गबन का खेल खेला गया है. मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज.

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मथुरा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मथुरा जनपद (Mathura District) में राज्य सरकार के आदेश पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पने के मामले में निलंबित किए गए पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी (Karunesh Tripathi) व उनके कार्यालय के तीन लिपिकों समेत 66 लोगों के खिलाफ सदर थाने में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज कराया गया है. वर्तमान जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर की तहरीर पर इस मुकदमे में सहायक विकास अधिकारी और आईटीआई के प्रबंधक और संचालक भी आरोपी बनाए गए हैं.

जिला समाज कल्याण अधिकारी (Social welfare officer) की तहरीर पर दर्ज हुए मुकदमे (case) के मुताबिक, साल 2015-2016 से 2019-2020 के बीच निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के संचालकों के साथ मिलकर छात्रवृत्ति के गबन का खेल खेला गया है. इस मामले में निलंबित पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी, सहायक विकास अधिकारी राहुल कुमार, वरिष्ठ लिपिक नवीन मल्होत्रा, लिपिक योगेश कुमार के अलावा 62 आईटीआई के प्रबंधकों और संचालकों को भी आरोपी बनाया गया है.
मुख्यमंत्री ने स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कराई है


प्रभारी निरीक्षक शशिप्रकाश शर्मा ने बताया कि जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. गौरतलब है कि इस मामले में बलदेव क्षेत्र के विधायक पूरन प्रकाश ने शासन स्तर पर छात्रवृत्ति के घोटाले की शिकायत की थी. जिस पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर 26 दिसम्बर को मथुरा के समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी, कनिष्ठ सहायक नवीन मेहरोत्रा, योगेश कुमार व सहायक विकास अधिकारी राहुल कुमार को निलंबित कर दिया गया था. विधायक की शिकायत पर शासन स्तर पर कराई गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 23 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति फर्जी तरीके से निकाली गई. इस पर मुख्यमंत्री ने स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कराई है.


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