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आगरा मेट्रो: बिना शटरिंग के आखिर कैसे बनाई जा रही सभी 7 अंडरग्राउंड स्टेशनों की छत, जानें

आगरा में टॉप डाउन प्रणाली के तहत सभी 7 अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है.

आगरा में टॉप डाउन प्रणाली के तहत सभी 7 अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है.

ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बन रहे पहले कॉरिडोर में कुल सात अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण किया जाना है. फिलहाल प्रायोरिटी कॉरिडोर के अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन आगरा फोर्ट पर डायफ्राम वॉल का निर्माण किया जा रहा है, जबकि ताजमहल और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर डी वाल के निर्माण को लेकर तैयारी की जा रही है.

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आगरा. उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा आगरा में टॉप डाउन प्रणाली के तहत सभी 7 अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है. इस प्रणाली में बिना शटरिंग का प्रयोग किए सभी अंडरग्राउंड स्टेशनों के दोनों तलों की छत का निर्माण होगा. फिलहाल, प्रायोरिटी कॉरिडोर के अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन आगरा फोर्ट पर डायफ्राम वॉल का निर्माण किया जा रहा है, जबकि ताजमहल और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर डी वाल के निर्माण को लेकर तैयारी की जा रही है.

यूपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि आगरा मेट्रो के सभी अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण टॉप डाउन प्रणाली के तहत किया जा रहा है. कुमार केशव ने बताया कि अंडरग्राउंड स्टेशनों के निर्माण की अन्य प्रणालियों की तुलना में टॉप डाउन प्रणाली बेहद किफायती है. इस प्रणाली में समय की बचत के साथ ही लागत भी कम आती है. उन्होंने बताया कि टॉप डाउन प्रणाली में पहले स्टेशन के कॉन्कोर्स लेवल और उसके बाद प्लेटफॉर्म लेवल का निर्माण किया जाता है. इस प्रणाली में छत की कास्टिंग के लिए शटरिंग का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि भूमि को समतल कर शटरिंग की तरह प्रयोग किया जाता है.

कैसे होता है अंडरग्राउंड स्टेशन का निर्माण
अंडरग्राउंड स्टेशन के निर्माण के लिए सबसे पहले स्टेशन परिसर हेतु चिह्नित भूमि पर अलग-अलग जगहों से बोरिंग कर मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं. इन नमूनों की जांच के बाद स्टेशन बॉक्स (स्टेशन परिसर का कुल क्षेत्रफल) की मार्किंग की जाती है. इसके बाद स्टेशन परिसर की डॉयफ्राम वाल (बाउंड्री वॉल) के निर्माण के लिए गाइडवॉल बनाई जाती है. गाइड वॉल का प्रयोग डी वॉल को सही दिशा देने के लिए किया जाता है, डी वॉल के निर्माण के बाद इसे हटा दिया जाता है. गाइड वॉल के निर्माण के बाद एक खास मशीन से डी वॉल की खुदाई की जाती है. खुदाई पूरी होने का बाद उस जगह में सरियों का जाल (केज) का डाला जाता. इसके बाद कॉन्क्रीट डाल कर डायफ्राम वॉल का निर्माण किया जाता है.

टॉप डाउन प्रणाली के तहत एक बार जब स्टेशन परिसर की डायफ्राम वाल का निर्माण पूरा हो जाता है, तो फिर ऊपर से नीचे की ओर निर्माण कार्य प्रारंभ होते हैं. टॉप डाउन प्रणाली में सबसे पहले ग्राउंड लेवल पर भूमि को समतल कर कॉन्कोर्स की छत का निर्माण किया जाता है. इस दौरान ग्राउंड लेवल की स्लैब में कई जगहों पर खुला छोड़ा जाता है. जब प्रथम तल (कॉन्कोर्स) की छत बनकर तैयार हो जाती है, तो खाली जगहों से मशीनों के जरिए मिट्टी की खुदाई शुरू की जाती है.

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इसके बाद कॉन्कोर्स तल की खुदाई पूरी हो जाने पर फिर मिट्टी को समतल कर प्लेटफॉर्म लेवल की छत का निर्माण किया जाता है. इस स्लैब में भी कुछ खाली जगह छोड़ी जाती हैं, जहां से फिर मशीनों के जरिए प्लेटफॉर्म लेवल की खुदाई कर स्टेशन परिसर का निर्माण किया जाता है. फिलहाल, आगरा फोर्ट मेट्रो स्टेशन पर तेज गति के साथ डायफ्राम वाल का निर्माण किया जा रहा है.

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गौरतलब है कि ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बन रहे पहले कॉरिडोर में कुल सात अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण किया जाना है. उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटिड द्वारा इन सात स्टेशनों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है. एफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड-सैम इंडिया बिल्ट वैल प्राइवेट लिमिटेड मिलकर आगरा मेट्रो के सात अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण कर रहे हैं.

Tags: Agra Metro rail Project, Agra news, UP news

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