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दाने - पानी के लिए मोहताज हुए लोग, बच्चों को नहीं मिला दूध,  प्रशासन की व्यवस्थाओं से नाखुश पीड़ित

Agra News: लोगों के अनुसार प्रशासन ने डरा-धमका कर पुलिस के बल पर घरों को खाली करवा लिया. उनके घरों की लाइट भी काट दी थी ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट – हरिकांत शर्मा
    आगरा : 
    आगरा में बीते 26 जनवरी को घटिया आजम खां मार्ग स्थित टीला माईथान में धर्मशाला की अवैध खुदाई के चलते 6 मकान जमींदोज होने के बाद एडीए ने खतरा भांपते हुए 50 से अधिक मकानों को रेड जोन घोषित कर खतरे का निशान लगाया था. लोगों के अनुसार प्रशासन ने डरा-धमका कर पुलिस के बल पर घरों को खाली करवा लिया. उनके घरों की लाइट भी काट दी थीं. जिसके बाद हताश लोगों ने धीरे-धीरे अपने आशियाने खाली कर दिए.

    अपना घर छोड़ते वक्त आंखों में थे आंसू
    जीवन भर की पूंजी तिल-तिल जोड़ बनाये गए अपने स्वर्ग जैसे घरों को छोड़ते वक्त लोगो की आंख भर आई. प्रशासन ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि उनके खाने-पीने, दवा-इलाज जैसी जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा. लेकिन जीवनी मंडी स्थित आश्रय स्थल पर पनाहगार लोगों ने कैमरा के सामने अपना दर्द बताया. आश्रय स्थल में घर छोड़कर आई बुजुर्ग मंजू ने बताया कि दोपहर के तीन बज रहे हैं. अब तक सुबह का भोजन नसीब नही हुआ. बहुओं के दुधमुंहे बच्चे दूध के लिए तरस गए हैं.

    यहां खाने का इंतजार बाकी है और पीने के पानी नहींं है. अधिकारी आते हैं और राउंड लगाकर चले जाते हैं. वहीं आश्रय स्थल में परिवार को लेकर रह रही पिंकी वर्मा ने बताया कि इस हादसे के बाद सब तहस-नहस हो गया हैं. रात बच्चों को ठंड लगने से बुखार आ गया. जितनी जमापूंजी थीं सब दवाओं में खर्च हो गयी.

    आपके शहर से (आगरा)

    इलाज के नाम पर एक प्रशासन की ओर से एक दवा का सहारा नही हैं. आज हम मकान मालिक होते हुए भी सड़को पर भिखारियों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हो गए हैं. लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नही है.

    प्रशासन के दावे हवा-हवाई
    आगरा में मकान गिरने और मकानों में दरार आने के बाद आगरा डेवलपमेंट अथॉरिटी के आला अधिकारियों की नींद खुली तो 50 से भी ज्यादा मकानों को खतरा बताते हुए उनमें रहने से मना कर दिया गया . लेकिन आश्रय स्थलों में घर के लोगों को रखा गया है जहां उनके लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है ऐसा लोगों का कहना है. जब लोगों को शिफ्ट किया गया तो पर्याप्त सुविधाओं का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? ऐसा लगता है कि प्रशासन केवल खानापूर्ति और मामले को दबाने में लगा है.

    Tags: Agra news, Uttar pradesh news

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