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आगरा: कड़ाके की ठंड के बीच फुटपाथ और डिवाइडर पर सोने को मजबूर बेसहारा
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News18 Uttar Pradesh
Updated: December 13, 2019, 1:57 PM IST
आगरा: कड़ाके की ठंड के बीच फुटपाथ और डिवाइडर पर सोने को मजबूर बेसहारा
फुटपाथ और डिवाइडर पर सोने को मजबूर बेसहारा

बता दें कि आगरा में दुनिया भर से ताजमहल देखने के लिए पर्यटक आते हैं. कई बार पर्यटक गरीबी और बदइंतजामी को कैमरे में कैद करके अपने देश ले जाते हैं. इन सबसे बेफिक्र नगर निगम को कड़ाके की ठंड में गरीबों को राहत देने की कोई चिंता नहीं है.

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आगरा. सर्दी का सितम शुरू होने के साथ ही शुक्रवार को आगरा नगर निगम (Agra Nagar Nigam) का शर्मसान चेहरा सामने आ गया है. बारिश और ठंड की जुगलबंदी के बीच गरीब, असहायों की जिंदगी भगवान भरोसे चल रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि असामान के नीचे कोई भी फुटपाथ पर सोते नहीं मिलना चाहिए, लेकिन आगरा का सच यही है कि सैकड़ों लोग फुटपाथ और डिवाइडर पर सोने को मजबूर हैं. बारिश होने पर असहाय गरीब लोग टीन शेड की तलाश में भटकते रहते हैं.

बता दें कि आगरा में दुनिया भर से ताजमहल देखने के लिए पर्यटक आते हैं. कई बार पर्यटक गरीबी और बदइंतजामी को कैमरे में कैद करके अपने देश ले जाते हैं. इन सबसे बेफिक्र नगर निगम को कड़ाके की ठंड में गरीबों को राहत देने की कोई चिंता नहीं है. शहर के सबसे वीआईपी एमजी रोड पर सुभाष पार्क के आसपास सैकड़ों गरीब फुटपाथ पर सोकर रात बिताते हैं. सर्दी का सितम शुरू होने के बावजूद अभी तक अस्थाई रैन बसेरे नहीं बनाए गए हैं.

इसके अलावा जो रैन बसेरे पक्के मकानों में बनाए गए हैं उनमें फुटपाथ पर सोते लोगों को ले जाने की कोशिश नहीं की जाती. पक्के और स्थायी रैन बसेरों का काला सच यह भी है कि गरीब आदमी से कई बार पैसों की मांग की जाती है. न्यूज 18 से बातचीत में फुटपाथ पर सो रहे व्यक्ति ने बताया कि रैन बसेरे में गये थे तो वहां दस रुपये मांगे गये. इसके बाद वापस फुटपाथ पर आकर रात बितानी पड़ी. सरकार के आदेशों के बेपरवाह नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों फुटपाथ पर सोने वालों की दुर्दशा से बेफिक्र रहते हैं.

आगरा फोर्ट, राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के बाहर निकलते ही फुटपाथ पर लोगों की जिंदगी कटती नजर आती है. फुटपाथ पर सोने वालों में ज्यादातर मजदूर और फेरी लगाने वाले ऐसे लोग होते हैं जो परिवार के लिए दो जून की रोटी के बंदोबस्त में शहर आते हैं. आखिर स्थायी रैन बसेरे में फुटपाथ पर सोने वाले गरीब क्यों नहीं जाते हैं, यह बड़ा सवाल है. इसका जवाब खुद फुटपाथ पर रहने वाले बताते हैं.

सुभाष पार्क पर फुटपाथ पर सोने वाले पन्ना ने बताया कि रैन बसेरे में 10-20 रुपये की मांग की जाती है. अब दस रुपये रैन बसेरे को दे देंगे तो फिर महीने के 300 रुपये हो जाते हैं. गरीबी के हालात में ऐसा करना संभव नहीं होता इसिलए फुटपाथ पर सोने की मजबूरी है.

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First published: December 13, 2019, 1:57 PM IST
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