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प्रदूषण की धुंध में गायब हुआ ताजमहल 

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 19, 2019, 9:27 PM IST
प्रदूषण की धुंध में गायब हुआ ताजमहल 
धुआं (Smoke) ताजमहल (Taj Mahal) के पीलेपन का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन ताज के इर्द-गिर्द धुआं न उड़े, इस पर अब तक सख्ती नहीं की जा सकी है.

वैज्ञानिक बताते हैं कि पार्टिकुलेट मैटर की वजह से ही ताजमहल (Taj Mahal) का रंग बदलने लगा है. जो धुआं और राख हवा में उड़ती है, वही ताजमहल पर पहुंच जाती है.

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आगरा. अपनी संगमरमरी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर मुहब्बत की निशानी ताजमहल (Taj Mahal) धुआं-धुआं (Smoke-smoke) नजर आया तो लोग चौंक गए. ताजमहल के आसपास के क्षेत्र में उठा धुआं ताजमहल तक जा पहुंचा. कुछ ही दूरी से ताज धुएं में लिपटा नजर आया. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सख्त निर्देशों की अवहेलना का परिणाम है कि आए दिन ताजमहल धुएं की चपेट में आ जाता है और इसके समाधान के ठोस प्रयास नहीं किए जाते. वायु प्रदूषण से ताजमहल की सेहत पर इतना दुष्प्रभाव पड़ रहा है कि ताज के रंग में अब पीलापन आने से उसकी चमक फीकी पड़ती जा रही है. इन सबके बावजूद ताजमहल की खूबसूरती बचाने के लिए साझा प्रयास करने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है.

ताजमहल के रखरखाव को लेकर कई बार तल्ख टिप्पणी कर चुका है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट पूर्व में ताजमहल के रखरखाव को लेकर एएसआई पर तल्ख टिप्पणी कर चुका है. ताजमहल के संरक्षण में उचित कदम ना उठाए जाने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कह दिया था कि ताजमहल को अगर बचाना है तो जरूरत पड़ने पर एएसआई की जगह किसी अन्य विकल्प पर सरकार को विचार करना चाहिए. समय-समय पर कई बार ताजमहल के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणियां की लेकिन कुछ दिन की कवायद के बाद जिला प्रशासन, नगर निगम और एएसआई यानी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की लापरवाही सामने आ जाती है.

शहर में जलता है कूड़ा

ताज के शहर में कूड़ा जलाने पर सख्ती से रोक का दावा नगर निगम और प्रशासन करता है, लेकिन हकीकत इससे जुदा है. हालात यह है कि शहर में चमड़े की कतरन से लेकर घरों से निकलने वाले कूड़े में अक्सर आग लगा दी जाती है. इससे उठने वाला धुआं ताजमहल को सीधे-सीधे नुकसान पहुंचाता है. कूड़ा जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई भी नहीं की जाती. जब-जब सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी आती है तब-तब चंद रोज के लिए सख्ती का दिखावा किया जाता है.

मुल्तानी मिट्टी से चमक लौटाने की कोशिश
ताजमहल पर समय-समय पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाया जाता है. ताज की फीकी होती चमक को वापस लौटाने के लिए यह प्रक्रिया की जाती है. इसके बाद मुल्तानी मिट्टी के लेप के सूखने का इंतजार किया जाता है. माना जाता है कि मुल्तानी मिट्टी का लेप ताज पर चिपके बारीक धूल-धुएं के कणों को अपने अंदर सोख लेता है. बाद में मुल्तानी मिट्टी को साफ पानी से धोया जाता है. ताजमहल पर यह ट्रीटमेंट कई बार किया जा चुका है.
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25 से 30 हजार पर्यटक हर दिन करते हैं ताजमहल का दीदार
ताजमहल विश्व धरोहर में शामिल है. दुनिया भर से पर्यटक ताजमहल की एक झलक पाने के लिए आगरा आते हैं. कुछ दिन पूर्व एक सप्ताह तक शहर धुंध की चपेट में था तो उस वक्त भी ताजमहल परिसर से ही ताज ठीक से नजर नहीं आ रहा था. देश-विदेश के 25 से 30 हजार पर्यटक औसतन हर दिन ताजमहल का दीदार करते हैं.

रिपोर्ट - हिमांशु त्रिपाठी

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First published: November 19, 2019, 9:26 PM IST
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