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3 साल से धरना दे रहे किसान की हालत नाजुक, कहा- 4 दिन बची है जिंदगी

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 7, 2019, 7:09 PM IST
3 साल से धरना दे रहे किसान की हालत नाजुक, कहा- 4 दिन बची है जिंदगी
स्‍थानीय प्रशासन पर किसानों की सुध न लेने का आरोप है.

आगरा में इनर रिंग रोड (Inner Ring Road) की जमीन के मुआवजे के लिए गुतिला गांव के पास धरने पर बैठे श्रीचंद (Shrichand) के पैरों की हडि्डयां बाहर निकल आई हैं. इलाज के लिए पैसे नहीं हैं.

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आगरा (Agra): इनर रिंग रोड (Inner Ring Road) में अनियमितता का आरोप लगाकर धरना दे रहे किसानों के समूह में शामिल श्रीचंद (Shrichand) की सांसें अब रुक-रुक कर चलती हैं. पैर (Leg) में गैंगरीन (gangrene) होने की वजह से श्रीचंद असहनीय पीड़ा (Pain) से जूझते हुए चारपाई पर लेटे-लेटे धरना देकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं. कायदे से श्रीचंद को हॉस्पिटल (Hospital) में होना चाहिए था, लेकिन एसएन मेडिकल कालेज (Medical College) में डॉक्टरों (Docters) और स्टाफ (Staff) ने उनके साथ जो व्यवहार किया, उसका नतीजा है कि श्रीचंद अब अपने अंतिम दिन गिन रहे हैं.

इनर रिंग रोड के लिए धरना
न्यूज 18 से बातचीत में श्रीचंद कहते हैं कि लगता है अब दो चार दिन में मर जाऊंगा. इनर रिंग रोड निर्माण को लेकर 35 माह से गुतिला गांव के पास धरना चल रहा है. भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले चल रहे धरने में पड़ोसी गांव गंगरुआ के किसान श्रीचंद जोश के साथ शामिल रहते थे. कुछ दिनों पूर्व इनर रिंग रोड के निर्माण को लेकर किसानों को हटाने के लिए पुलिस-प्रशासन ने हल्के बल का प्रयोग किया, जिसमें श्रीचंद के पैर में चोट लग गई.

मेडिकल कॉलेज से भी लौट आए श्रीचंद

समय पर सही इलाज न होने के कारण श्रीचंद की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई, तो किसान उन्हें लेकर कमिश्नर के ऑफिस पर धरना देने पहुंच गए. किसान की नाजुक हालते देख कमिश्नर अनिल कुमार ने तत्काल किसान श्रीचंद को एसएन मेडिकल कॉलेज के लिए भिजवाया. मेडिकल कॉलेज में अक्सर मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है. श्रीचंद के साथ भी यही हुआ. श्रीचंद ने न्यूज 18 को बताया कि उन्हें मेडिकल कॉलेज से चले जाने के लिए मजबूर किया जा रहा था. आधी रात को उन्हें बेड से नीचे रख दिया गया. मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था की क्रूरता से आहत श्रीचंद वापस धरना स्थल पर लौट आये. उनकी हालत अब बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है. वह धरनास्थल पर ही तड़प रहे हैं और प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है.

पाई-पाई को मोहताज हैं किसान
जमीन के मुआवजे के लिए गुतिला गांव के पास धरने पर बैठे श्रीचंद के के पैरों की हडि्डयां बाहर निकल आई हैं. इलाज के लिए पैसे नहीं हैं. किसान पाई-पाई को मोहताज है. आसपास के लोग चंदा करके श्रीचंद को दर्द निवारक इंजेक्शन लगवा देते हैं. उनकी हालत पल-पल बिगड़ती जा रही है.
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बसपा सरकार में किसानों के साथ विश्वासघात
आरोप है कि निर्माणधीन इनर रिंग रोड के लिए बसपा सरकार में किसानों के साथ विश्वासघात किया गया था. सपा सरकार जब आई तो किसान फिर ठगे गये. किसान मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर तीन साल से बैठे हैं. किसानों की जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया था, लेकिन किस रेट से अधिग्रहण किया जा रहा है, लिखा-पढ़ी में इसका जिक्र नहीं किया गया.

किसान दिखा रहे धोखाधड़ी के सबूत
किसान इसका सुबूत भी दिखाते हैं और वह जांच रिपोर्ट भी दिखाते हैं, जिसमें एडीएम प्रशासन ने सारी बात स्पष्ट कर दी है. किसानों का आरोप है कि सपा-बसपा सरकार में कार्यरत रहे कुछ अधिकारियों को मालूम था कि कहां-कहां से इनर रिंग रोड जाएगी, इसलिए उन्होंने सस्ते में किसानों से जमीन लेकर सरकार से भारी-भरकम मुआवजा लिया. इसके उलट गुतिला, गंगरुआ सहित कई गांवों के किसानों को सादे पेपर पर दस्तखत कराकर उनके साथ छल किया गया.

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First published: November 7, 2019, 6:51 PM IST
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