जिस आगरा मॉडल की देश भर में हुई चर्चा, वहां तेज हुई COVID-19 की रफ़्तार औरों के लिए सबक
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जिस आगरा मॉडल की देश भर में हुई चर्चा, वहां तेज हुई COVID-19 की रफ़्तार औरों के लिए सबक
इंग्लैंड की 1966 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य नोरमैन हंटर पिछले हफ्ते कोरोना वायरस के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे (सांकेतिक फोटो)

COVID-19: मार्च तक 12 कोरोना पेशेंट तक सिमित रहने वाले शहर में अप्रैल के 14 दिनों में ही मरीजों की संख्या बढ़कर 148 पहुंच गई.

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आगरा. लॉकडाउन की घोषणा के बाद मार्च तक ताजनगरी आगरा (Agra) में कोरोना (Coronavirus) संक्रमण की धीमी रफ़्तार को देखते हुए इसकी चर्चा पूरे देश में होने लगी थी. खासकर जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने आगरा मॉडल की प्रशंसा की और अन्य राज्यों के लिए भी नजीर की तरह पेश किया. मार्च तक 12 कोरोना पेशेंट तक सिमित रहने वाले शहर में अप्रैल के 14 दिनों में ही मरीजों की संख्या बढ़कर 148 पहुंच गई. इतना ही नहीं अब तक चार मरीजों की संक्रमण से मौत भी हो चुकी है. जिसके बाद 'आगरा मॉडल' से अब यूपी के अन्य जिलों व देश के अन्य राज्यों को भी सीखने की जरुरत है. इसमें कोई दो राय नहीं कि सरकार की कोशिश काफी सराहनीय रही और आगरा की तर्ज पर कई जिलों में संक्रमण को न सिर्फ रोका गया, बल्कि दो दर्जन से ज्यादा जिले अभी भी संक्रमण मुक्त हैं.

इटली से लौटे कारोबारी से पहुंचा संक्रमण

वैसे तो तो ताजनगरी देश और विदेश के पर्यटकों के लिए पसंदीदा जगहों में से एक है. यहां विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं. लेकिन ताजनगरी में कोरोना संक्रमण स्थानीय जूता कारोबारी के परिवार के साथ आया. 3 मार्च को परिवार के 6 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद अलर्ट मोड पर आये जिला प्रशासन ने सतर्कता बरती और 31 मार्च तक संक्रमित मरीजों की संख्या 12 तक ही सिमित रही. लेकिन लॉकडाउन के बावजूद अप्रैल के 14 दिनों में शहर से देहात तक 29 हॉटस्पॉट बन गए और 136 नए मरीज मिलने से पॉजिटिव केस की संख्या 148 पहुंच गई. शुरुआत में जिस आगरा मॉडल की चर्चा हो रही थी अब उसी पर सवाल उठने लगे हैं. लेकिन आगरा का केस अन्य राज्यों के लिए भी एक सबक है. आगरा में संक्रमण की रफ़्तार 28 गुना बढ़ी. इसकी तीन वजह अहम हैं.



तबलीगी जमात के साथ ही अस्पतालों ने बढ़ाया संक्रमण
आगरा में संक्रमण के मामले बढ़ने के पीछे दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में शामिल होकर पहुंचे तबलीगी जमात के लोग तो हैं ही. 148 में से 70 से ज्यादा लोग जमात से जुड़े हुए हैं. इसके अलावा अस्पतालों से फैला संक्रमण भी मुख्य वजहों में से एक है. लोगों द्वारा अपनी ट्रेवल हिस्ट्री छिपाने और संक्रमित के संपर्क में आने के बाद भी क्वारंटाइन में न जाने से स्थिति बिगड़ गई. आगरा के सार्थक और पारस हॉस्पिटल कोरोना का बड़ा हॉटस्पॉट है. सार्थक हॉस्पिटल के मालिक का बेटा विदेश से लौटा, लेकिन इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं दी गई. हॉस्पिटल के मालिक खुद ही बेटे का इलाज करते रहे. मामला तब सामने आया जब जिला प्रशासन ट्रेवल हिस्ट्री पता करते हुए उनके घर पहुंची. इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ जानकारी छिपाने की एफआईआर भी दर्ज हुई. और डॉक्टर खुद भी संक्रमित हो गए.

पारस हॉस्पिटल बड़ा हॉटस्पॉट

आगरा के एक बड़े पारस हॉस्पिटल भी कोरोना हॉटस्पॉट है. हाईवे पर स्थित होने की वजह से ग्रामीण इलाकों और आस-पास के जिलों के मरीज यहां आते हैं. इस अस्पताल में इलाज कराने आए 28 लोगों में कोरोनावायरस की पुष्टि हो चुकी है. जिसके बाद पारस अस्पताल में 22 मार्च से छह अप्रैल तक उपचार कराने वाले लोगों की आठ जिलों में तलाश हो रही है. इन लोगों के संक्रमित होने की आशंका है. प्रशासन ने अस्पताल का रिकॉर्ड कब्जे में लेकर मरीजों की सूची बनाई है. इसे अलग अलग जिलों के प्रशासन को भेजा जा रहा है. इतना ही नहीं प्रशासन ने इस अवधि के दौरान इलाज कराने वालों के लिए चेतवानी भी जारी की है. अगर वे सामने नहीं आते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी. इसके अलावा नामनेर के एसआर हॉस्पिटल और घटिया आजम खां के प्रमोद मित्तल नर्सिंग होम से भी संक्रमण पहुंचा.

जमातियों को ट्रेस करने में हुई बड़ी चूक

अस्पतालों से संक्रमण फैलने के पीछे डॉक्टरों का मानना है कि जमातियों को ट्रेस करने में प्रशासन से चूक हुई, जिसकी वजह से ये संक्रमण अस्पतालों तक पहुंचा. दरअसल, जमात से जुड़े लोग या फिर उनके सम्पर्क में आए लोग पारस अस्पताल समेत अन्य प्राइवेट नर्सिंग होम्स में इलाज के लिए पहुंचे. जहां से संक्रमण न केवल मेडिकल स्टाफ बल्कि अन्य जिलों में भी फ़ैल गया. आगरा के अस्पतालों के जरिए ये संक्रमण फिरोजाबाद, अलीगढ़ और हाथरस तक पहुंचा. क्योंकि इन शहरों के तमाम लोग आगरा के अस्पतालों में इलाज कराने आते हैं.

अस्पतालों में फैले संक्रमण से निपटना बड़ी चुनौती

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह का कहना है कि अस्पतालों में फैले संक्रमण से निपटना बड़ी चुनौती है. अस्पतालों के जरिये जी दूसरे शहरों, गांवों और कस्बों में भी संक्रमण पहुंचा है. इसके अलावा जमाती भी संक्रमण फैलाने की बड़ी वजह हैं. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में जमाती मिले हैं उन इलाकों को सील कर दिया गया है. साथ ही अस्पतालों में एडमिट हुए मरीजों की शिनाख्त कर इलाके को सील भी किया जा रहा है.

1.5 लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग

उधर आगरा के आईजी सतीश गणेश ने बताया कि प्रशासन और पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि आगरा में फरवरी के पहले सप्ताह में पहला कोरोना का मामला सामने आने के बाद से ही लोगों की स्क्रीनिंग और सैंपल लेने का काम शुरू कर दिया गया था. जो लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि अभी तक 165000 लोगों की आगरा में स्क्रीनिंग की जा चुकी है और ये काम लगातार जारी है.

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