इस मुस्लिम परिवार ने बकरे की जगह केक काटकर मनाई बकरीद, दिया यह संदेश

आगरा के इस परिवार को वंदेमातरम के प्रति प्रेम के लिए जाना जाता है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 13, 2019, 12:26 PM IST
इस मुस्लिम परिवार ने बकरे की जगह केक काटकर मनाई बकरीद, दिया यह संदेश
आगरा के मुस्लिम परिवार ने केक काटकर मनाई बकरीद
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Updated: August 13, 2019, 12:26 PM IST
उत्तर प्रदेश के आगरा (Agra) में एक मुस्लिम परिवार (Muslim Family) ने नए तरीके से बकरीद का त्योहार मनाया है. इस परिवार ने बकरीद पर किसी जानवर की कुर्बानी नहीं दी है. खास बात यह है कि इस परिवार के लोगों ने केक काटकर बकरीद मनाई है. साथ ही केक को अपने पड़ोसियों को खिलाकर मुबारकबाद भी दी. अब इसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है. लोग इस परिवार की प्रशंसा कर रहे हैं.

मुस्लिम परिवार आगरा के शाहगंज आजमपाड़ा का रहने वाला है
जानकारी के मुताबिक, बकरीद मनाने वाला मुस्लिम परिवार आगरा के शाहगंज आजमपाड़ा (Shahganj azampada) का रहने वाला है. इस परिवार के मुखिया का नाम गुलचमन शेरवानी है. स्थानीय लोगों की माने तो गुलचमन शेरवानी बहुत बड़े देशभक्त हैं. वे वंदेमातरम के प्रति प्रेम रखने और तिरंगा फहराने के लिए मशहूर हैं. इनका घर भी तिरंगा महल के नाम से जाना जाता है.

गुलचमन का कहना है कि साल 2017 में उन्होंने बकरीद पर कुर्बानी देने के लिए एक बकरा खरीदा था.लेकिन बकरे को कुछ महीने पालने के बाद परिजनों और बच्चों का बकरे से लगाव बढ़ गया. ऐसे में बकरीद के दिन जब कुर्बानी का समय आया तो बच्चों ने उसकी कुर्बानी करने से इंकार कर दिया. इसके बाद उन्होंने बकरे को बेच दिया और जो पैसे मिले उससे बाढ़ पीड़ितों की मदद की. तबसे वो हर साल यही कर रहे हैं.

ताकि गरीब आदमी को बकरा खाने को मिल जाए
दैनिक भास्कर के अनुसार, गुलचमन का कहना है कि बकरे की कुर्बानी इसलिए होती थी, ताकि गरीब आदमी को बकरा खाने को मिल जाए. पर आज लोग मदद करने की बजाय बकरा काट कर फ्रिज में भर लेते हैं और गरीबो में नहीं बांटते. इसलिए उन्होंने यह केक काट कर बकरीद मनाई.

बता दें कि पिछले हफ्ते बिहार के मुजफ्फरपुर में कुछ मुस्लिम परिवारों ने हिन्‍दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश की थी. यहां के तीन दर्जन मुस्लिम परिवारों ने पूरे देश को सामाजिक सौहार्द्र का संदेश दिया था. इन मुस्लिम परिवारों ने बकरीद के पहले दिन कुर्बानी न देने का फैसला किया था. खास बात यह है कि सावन के आखरी सोमवार होने की वजह से इन मुस्लिम परिवारों ने यह निर्णय लिया. तब इनके इस फैसले का पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही थी. लोग इन परिवारों की तारीफ करते नहीं थक रहे थे.
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First published: August 13, 2019, 10:16 AM IST
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