Home /News /uttar-pradesh /

ताजमहल को बदसूरत बनाता जा रहा है ये कीड़ा, नहीं है कोई इलाज  

ताजमहल को बदसूरत बनाता जा रहा है ये कीड़ा, नहीं है कोई इलाज  

फाइल फोटो.

फाइल फोटो.

गोल्‍डी काइरोनोमस नाम के कीड़े ने ताज की खूबसूरती से प्रभावित होकर उस पर अपना ठिकाना बना लिया है.

    एक छोटा सा कीड़ा भी मोहब्बत की निशानी और दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल की खूबसूरती का दीवाना हो गया है. लेकिन उसकी दीवानगी तामहल के लिए खतरा बन गई है. कीड़े की दीवानगी के चलते ताजमहल जगह-जगह से बदरंग होना शुरु हो गया है. ताजमहल पर अब हरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगे हैं. और ये सब हो रहा है उस कीड़े के चलते. आगरा के ही एक प्रोफेसर की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट बताती है कि गोल्‍डी काइरोनोमस नाम के कीड़े ने ताज की खूबसूरती से प्रभावित होकर उस पर अपना ठिकाना बना लिया है.

    क्या कहती है ताजमहल की जांच रिपोर्ट  

    जगह-जगह से ताजमहल हरा दिखाई देने लगा है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी ताजमहल पर आ रहे इस बदलाव को लेकर एएसआई (आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) को कड़ी फटकार भी लगाई है. सेंट जोंस कॉलेज, आगरा के प्रोफेसर गिरीश महेश्‍वरी की मानें तो ताजमहल पर बने रंग-बिरंगे नक्‍काशीदार फूलों से प्रभावित होकर ये ताज की दीवारों से चिपक रहा है. ये कोई पहला मौका नहीं है जब इस कीड़े ने ताजमहल को अपना ठिकाना बनाया हो. ये कीड़ा यमुना में पैदा होता है. जब यमुना में पानी की कमी हो जाती है तो ये पानी की काई में पनपने लगता है.

    अब क्‍योंकि ताजमहल पर बहुत सारे हरे रंग के नक्‍काशीदार फूल बने हुए हैं तो ये उसी से प्रभावित होकर ताजमहल से चिपक रहा है. अब चूंकि यह काई को ही खाता है तो इसकी बीट भी हरे रंग की होती है जो ताजमहल को बदरंग कर रही है. हैरान करने वाली बात ये है कि कीड़े की बीट को साफ करने के अलावा एएसआई के पास इस कीड़े को रोकने का कोई इलाज नहीं है. अगर कोई इलाज है तो वो ये कि यमुना में हर वक्त भरपूर पानी रहे.

    भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग की रसायन शाखा से जुड़े एक जानकार बताते हैं कि गोल्‍डी काइरोनोमस के साथ-साथ ताज पर वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्‍यादा खतरा पीएम-2.5 कणों की मात्रा बढ़ने से पैदा हो रहा है. इसकी एक बड़ी वजह यमुना में पानी की कमी होना भी है.

    कीड़ा नहीं हवाएं भी बनी ताज की दुश्मन

    वहीं राजस्‍थान की ओर से भी हवा के साथ पीएम-2.5 कण ताजमहल से टकरा रहे हैं. एक ओर तो गोल्‍डी काइरोनोमस का खतरा है और दूसरी ओर वायु प्रदूषण लगातार ताज को नुकसान पहुंचा रहा है. एक पुरानी रिपोर्ट पर गौर करें तो जांच के दौरान ताजमहल पर 55 प्रतिशत धूल के कण, 35 प्रतिशत ब्राउन कार्बन कण और 10 प्रतिशत ब्‍लैक कण पाए गए थे. इसी के बाद से ताजमहल के आसपास के क्षेत्र में गोबर के उपले जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.  बेशक उपले जलना बंद हो गए हों, लेकिन वायु प्रदूषण अभी तक कम नहीं हुआ है.

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर