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आगरा: अक्षरों से अनजान ये बच्‍चे अब ‘घुमंतू पाठशाला’ में कर रहे हैं कमाल

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 14, 2019, 2:35 PM IST
आगरा: अक्षरों से अनजान ये बच्‍चे अब ‘घुमंतू पाठशाला’ में कर रहे हैं कमाल
बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव देख उनकी शिक्षिकाएं आत्मसंतुष्टि से भरी नजर आती हैं.

फुटपाथ पर पालीथिन की छत के नीचे रात गुजारने वाले ये बच्चे दिन भर लोहा पीटकर मां-बाप का हाथ बंटाते थे, लेकिन ऐसा नही है. समाजसेवियों ने उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी है.

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आगरा: चाचा नेहरू का सपना ताज के शहर आगरा में साकार हो रहा है. फुटपाथ पर पालीथिन की छत के नीचे रात गुजारने वाले ये बच्चे दिन भर लोहा पीटकर मां-बाप का हाथ बंटाते थे, लेकिन ऐसा नही है. समाजसेवियों ने उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी है. अक्षरों से अनजान रहे बच्चे ये बच्‍चे अब एक सुर में हम होंगे कामयाब एक दिन.... गीत गाते हैं. इतना ही नहीं, खानाबदोश परिवार से ताल्लुक रखने वाले ये बच्चे गायत्री मंत्र और महा मृत्युंजय मंत्र एक सांस में सुना जाते हैं.

बाल दिवस पर बच्चों के होठों की मुस्कान उनकी कामयाबी की कहानी बताती है. आगरा में खंदारी चौराहा, हरिपर्वत चौराहा, यमुनापार सहित कई इलाकों में फुटपाथ पर वर्षों से रहने वालों के जीवन में अशिक्षा का अंधियारा था. कुछ समाजसेवियों ने इनकी जिंदगी को संवारने का संकल्प लिया. आराधना संस्था की डा. हृदयेश चौधरी ने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर फटपाथ के बच्चों की जिंदगी संवारने में जुट गयीं. एक दो बच्चों से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, आज सैकड़ों बच्चों तक पहुंच गया है.

गरीब बच्‍चों के लिए खुली खास पाठशाला
चूंकि बच्चे घुमंतू परिवार के थे, लिहाजा घुमंतू पाठशाला बनाई गयी. घुमंतू पाठशाला में बड़ी संख्या में गरीबों के बच्चे अपनी जीवन में शिक्षा के रंग भर रहे हैं. बच्चों के हाथों में कलम, किताब थमाने के लिए उनके परिवार वालों को बड़ी कठिनाई से राजी किया गया. कुछ दिनों तक बच्चों के साथ उनकी मां भी आकर कक्षा में बैठी रहती थी. परिवार को जब संतुष्टि हो गयी तो फुटपाथ से बच्चे सीधे अपनी पाठशाला में आने लगे. कारवां बढ़ता गया और कई महिलाएं बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आईं.

बच्‍चों को मिला अक्षरमाला से लेकर मंत्रों तक का ज्ञान
अब आधा दर्जन से अधिक महिलाएं अब घुमंतू बच्चों का जीवन संवार रही हैं. बच्चे पाठशाला में आने के बाद सामूहिक रूप से हम होंगे कामयाब एक दिन.... गीत गाते हैं. अब चाहे एबीसीडी हो या क ख ग घ सबका ज्ञान इन बच्चों को है. सामान्य ज्ञान से भी बच्चे अच्छी तरह से परिचित हैं. बदलते जीवन में ये बच्चे कुछ बनना चाहते हैं. गुड मार्निंग से अपनी शिक्षिकाओं का अभिवादन करने वाले ये बच्चे संस्कृत के श्लोक भी सुनाते हैं.

अगर ना पढ़ते तो...
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बच्चे कहते हैं कि यदि घुमंतू पाठशाला ना होती तो उनकी पूरी जिंदगी अंधेरे में उसी तरह गुजर जाती, जैसे उनकी पीढ़ियां गुजरी हैं. घर परिवार के बारे में बच्चे बताते हैं कि उनके घर में कोई भी पढ़ा लिखा नहीं था. अब वह अपने मां-बाप के साथ कहीं जाते हैं तो उन्हें सड़कों पर लगे बोर्ड में क्या लिखा है ये बताते हैं. घर वालों को बच्चे देश और प्रदेश के बारे में भी जानकारी देते हैं. हैप्पी चिल्ड्रेन डे बाल दिवस पर बच्चों के चेहरे पर गजब की खुशी नजर आई. गरीबी के संघर्षों के बीच ज्ञान के अक्षर सीखते बच्चे बाल दिवस पर हैप्पी चिल्ड्रेन डे  कहते नजर आए. बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव देख उनकी शिक्षिकाएं आत्मसंतुष्टि से भरी नजर आईं.

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First published: November 14, 2019, 2:35 PM IST
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