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अनाथालय से निकल इंजीनियर बने सागर रेड्डी, CM योगी के सामने सुनाई अपनी कहानी तो...

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 25, 2019, 10:03 PM IST
अनाथालय से निकल इंजीनियर बने सागर रेड्डी, CM योगी के सामने सुनाई अपनी कहानी तो...
सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने साथ सागर रेड्डी.

महाराष्ट्र में जन्म लेने वाले सागर रेड्डी (Sagar Reddy) अनाथालय में पढ़े बढ़े और फिर इंजीनियर बन गए. अब सागर रेड्डी अनाथ बच्चों की सेवा में लगे हुए हैं.

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आगरा. महाराष्ट्र में जन्म लेते ही जिस बेटे के माता-पिता की हत्या कर दी गई थी, वही आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) के राष्ट्रीय अधिवेशन में अपने जीवन की कहानी सुना रहा था. कहानी भी ऐसी कि सबकी आंखें नम हो गईं. अनाथालय (Orphanage) में गुजरे बचपन और फुटपाथ पर गुजारी जिदंगी के अलावा सागर रेड्डी (Sagar Reddy) के पास बताने को बहुत कुछ था. दर-दर की ठोकरें खाकर भी अभावों में जिंदगी के मकसद को सागर रेड्डी ने साकार किया. अनाथालय से निकला बच्चा आज इंजीनियर होने के साथ-साथ अनाथ बच्चों की सेवा की 'इंजीनियरिंग' में निपुण हो गया है. जबकि इस दौरान समारोह के मुख्‍य अतिथि मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) ने हजारों अनाथ बच्चों को जीने की राह दिखाने वाले सागर रेड्डी को यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया.

...जब सबकी आंखें हो गई नम
सागर रेड्डी ने सम्मान पाने के बाद जब संबोधन शुरू किया तो उन्होंने अपने जीवन की कहानी का हर पन्ना पढ़ डाला. सीएम योगी के साथ-साथ हजारों छात्र-छात्राएं उनकी कहानी बड़े ध्यान से सुनते रहे. सागर रेड्डी ने कहा कि उनके मां-बाप की सिर्फ इसलिए हत्या कर दिया गयी थी, क्योंकि उनकी मां दूसरी जाति की थीं और शादी से समाज खुश नहीं था. उन्‍होंने कहा कि जन्म लेने के बाद से 17 साल तक उनका जीवन अनाथालय में गुजरा. सत्रह बरस का होते ही अनाथालय की ओर से बता दिया गया कि 18 साल का होते ही उनके लिए अनाथालय के लिए बंद हो जाएंगे.

सागर रेड्डी कहते हैं, 'अठारह साल की उम्र होते ही मैं अनाथालय के गेट से बाहर आया और तुरंत अनाथालय का गेट बंद हो गया. अब मेरी आंखों के सामने अंधेरा था. जेब में एक रुपया भी नहीं था. मंदिरों और स्टेशन पर कई महीने गुजारे, लेकिन हार नहीं मानी. एक दिन ईश्वर की कृपा से एक शख्स ने मेरे जीवन को आगे बढ़ाने के लिए मेरा हाथ थाम लिया.'


सागर रेड्डी ने अपनी कहानी सुनाते हुए बताया कि इसके बाद मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, लेकिन बच्चे और टीचर, अंग्रेजी ना आने के कारण उनका बहुत मजाक उड़ाया करते थे. बकौल सागर इंजीनियरिंग कक्षा में लड़के-लड़कियां उनका मजाक उड़ाती थीं, हर परिस्थिति में सागर रेड्डी ने कुछ कर गुजरने की ठानी थी. लिहाजा उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियर बनने के बाद सागर का जीवन आसान हो गया लेकिन अपना अनाथालय देखने की ख्वाहिश ने उनका जीवन ही बदल डाला.

आत्महत्या करना चाहते थे सागर
इंजीनियर रेड्डी कहते हैं कि अनाथालय से निकलने के बाद मेरी जेब में एक धेला भी नहीं था. कहां जाऊं, क्या खाऊं, कहां रहूं जैसे सवालों का कोई जवाब नहीं था. रात रात भर जागने वाले सागर रेड्डी कहते हैं कि कई बार मेरे मन में भी आत्महत्या का विचार आया था, लेकिन हर बार दृढ़ निश्चिय और कुछ करने की इच्छा शक्ति की सोच लेकर जीता रहा.अनाथालय पहुंचे तो लिया ये संकल्प
सागर रेड्डी जब अनाथालय पहुंचे तो वहां पल रहे बच्चों को देखकर उन्हें रोना आ गया. उन्‍होंने कहा कि मैं यही सोचने लगा कि जब ये बच्चे 18 साल के हो जाएंगे तो अनाथालय से निकाले जाएंगे. फिर इनके जीवन का क्या होगा. यहीं से सागर रेड्डी ने अपने बड़े मिशन की रचना की. जबकि रेड्डी ने संस्था के जरिये अनाथ बच्चों के सपने को साकार करने का प्रण किया. सागर कहते हैं कि अब तक उन्होंने हजारों अनाथ बच्चों को इस लायक बनाया कि वह समाज में अच्छे-अच्छे मुकाम पर पहुंच गए हैं.

सीएम योगी ने कही ये बात
सागर रेड्डी को केलकर पुरस्कार से सम्मानित करने के बाद सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने एबीवीपी के मंच से सागर रेड्डी के जीवन के हर पन्ने की सराहना की. सीएम योगी ने कहा कि इसी का नाम जिंदगी है. सागर ने लोगों को जीने की राह दिखाई है. सीएम ने यह भी कहा कि यूपी में वह अनाथ बच्चों के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रहे हैं.

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First published: November 25, 2019, 7:05 PM IST
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