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Agra: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े बसपा सरकार में बने गरीबों के 3264 मकान, अब होंगे धवस्त  

बसपा शासनकाल में गरीबों के लिए बने मकान होंगे धवस्त

बसपा शासनकाल में गरीबों के लिए बने मकान होंगे धवस्त

Agra News: बीएसयूपी यानी बेसिक सर्विस फॉर अर्बन पूअर योजना के तहत बने हजारों मकानों को भ्रष्टाचार दीमक की तरह खा चुका है. योजना के तहत कुल 3584 मकान बने थे. लेकिन आईआईटी रुड़की ने सिर्फ 320 मकानों को रहने योग्य माना है.

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आगरा. बसपा शासन काल में अफसरों और ठेकेदारों के गठजोड़ ने भ्रष्टाचार की बुनियाद पर 3264 मकान बना दिए. अब तक मकान में कोई रहने नहीं आया, लेकिन मकान की छते धड़ाम हो चुकी हैं. अब आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) ने इन मकानों को रहने लायक नहीं माना है. न्यूज 18 की टीम जब जमीनी पड़ताल करने मौके पर पहुंची तो सच सामने आ गया. बीएसयूपी यानी बेसिक सर्विस फॉर अर्बन पूअर योजना के तहत बने हजारों मकानों को भ्रष्टाचार दीमक की तरह खा चुका है. योजना के तहत कुल 3584 मकान बने थे. लेकिन आईआईटी रुड़की ने सिर्फ 320 मकानों को रहने योग्य माना है. 3264 मकानों को ध्वस्त करने की सिफारिश की गयी है. ये मकान इतने जर्जर हैं कि ज्यादातर की छतें गिर चुकी हैं. जगह-जगह सरिया निकली है और कोई भी यहां रहने की हिम्मत नहीं जुटा सकता.

बसपा सरकार के वक्त आगरा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों मकानों का निर्माण करवाया था. ठेकेदार कितना महाभ्रष्ट था इसकी गवाही हजारों मकानों की हर दीवारें और छतें देती हैं. सभी मकानों के निर्माण पर 127 करोड़ की लागत आई. अब सीधे-सीधे इतनी बड़ी रकम मिट्टी में मिला दी जाएगी. रोज किसी न किसी मकान की छत गिरती रहती है, ऐसे में आज तक कोई भी यहां एक दिन भी नहीं रह सका. सिर्फ गार्ड एक कोने में बने मकान में रहता है. आईआईटी रुड़की ने अपनी जांच रिपोर्ट आगरा विकास प्राधिकरण यानी एडीए को सौंप दी है. एडीए के अधिकारी हैरान होकर रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं. इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी.

उधर आगरा के नारायच क्षेत्र में बने मकानों के आवंटी अपने आशियाने का सपना पूरा करने के लिए दर दर भटक रहे हैं. एडीए वीसी कहते हैं कि मकान रहने लायक नहीं है. रिपोर्ट शासन को जाएगी और मकानों के ध्वस्तीकरण को लेकर फैसला वहीं से होगा. आगरा के नारायच में बसपा शासन काल में बने हजारों मकानों की गुणवत्ता शुरू से संदिग्ध थी. इसीलिए एडीए ने आईआईटी रुड़की को 67 लाख 50 हजार रुपये देकर गहनता से जांच कराई. अब जांच रिपोर्ट आने के बाद एडीए के अधिकारी खुद हैरान है. ऐसा लगता है कि निर्माण के वक्त कोई भी तत्कालीन जिम्मेदार ने इसे कभी देखा ही नहीं. पूरी तरह से मनमर्जी चलती रही जिसका खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है. एडीए वीसी राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि जांच रिपोर्ट आ गयी है. शिकायत मिलने पर ही एडीए ने जांच कराई थी, जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी.

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