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आगरा में 5 साल तक धूल उड़ाने पर NHAI को तगड़ा झटका, लगा 6.84 करोड़ का जुर्माना

आगरा में इन दिनों धुंध में ताजमहल के दीदार मुश्किल हो गए हैं.

आगरा में इन दिनों धुंध में ताजमहल के दीदार मुश्किल हो गए हैं.

धूल उड़ाने के मामले में लंबी चली जांच के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने एनएचएआई (NHAI) पर 6.84 करोड़ का जुर्माना (Fine) लगा दिया गया है. जुर्माने की रकम न अदा करने पर वायु प्रदूषण फैलाने का मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी भी दी गई है.

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आगरा. ताजनगरी आगरा (Agra) में वायु प्रदूषण (Air Pollution) से लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. धुंध के चलते ताजमहल (Taj Mahal) के दीदार मुश्किल हो चुके हैं, वहीं यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा एक्सप्रेसवे पर धुंध के चलते गाड़ियों की रफ्तार पर असर पड़ा है. उधर हाइवे निर्माण (Highway Construction) के दौरान लगभग पांच साल तक आगरा में धूल-मिट्टी उड़ती रही, जिससे लोगों का सांस लेना दूभर हो गया. ताजनगरी के वाशिंदों की सेहत से खिलवाड़ करना अब नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को भारी पड़ा है. धूल उड़ाने के मामले में लंबी चली जांच के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनएचएआई पर 6.84 करोड़ का जुर्माना (Fine) लगा दिया गया है. जुर्माने की रकम न अदा करने पर वायु प्रदूषण फैलाने का मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी गई है.

हाइवे निर्माण से जगह-जगह लगे हैं मिट्टी के ढेर
बता दें कि आगरा में एयर क्वालिटी इंडेक्स अकसर खतरनाक स्तर पर रहता है. आगरा परिक्षेत्र में जगह-जगह हाइवे का निर्माण किया जा रहा है. निर्माण की वजह से कई किलोमीटर तक धूल-मिट्टी के ढेर लगे हैं. ताज ट्रपेजियम जोन (TTZ) बोर्ड की 47वीं बैठक में एनएचएआई को हाइवे से मिट्टी का ढेर हटाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था. निर्देशों को दरकिनार करके एनएचएआई ने अपना लापरवाही भरा निर्माण जारी रखा. हाइवे निर्माण के दौरान धूल न उड़े इसको लेकर भी कोई इंतजाम नहीं हुए. अब यूपी प्रदूषण बोर्ड के मुख्य पर्यावारण अधिकारी आरके सिंह की तरफ से एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर को पर्यावरण को लेकर हुए नुकसान पर 6 करोड़ 84 लाख रुपये 15 दिन के अंदर जमा कराने को कहा गया है. निर्धारित समयावधि में जुर्माने की रकम जमा न होने पर एनएचएआई पर वायु प्रदूषण का मुकदमा कराने की चेतावनी भी दी गयी है.

1825 दिनों तक उड़ती रही धूल
बता दें कि टीटीजेड एरिया में 1825 दिनों तक धूल उड़ती रही. कुल पांच साल तक आगरा के लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया गया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फरवरी 2019 को पर्यावरण क्षतिपूर्ति को लेकर गाइडलाइन भी जारी की थी. इसके तहत एनएचएआई के अधिकारियों को चेतावनी देने के साथ ही हवा में धूल-मिट्टी उड़ने से रोकने का इंतजाम करने को कहा गया. सभी निर्देशों को एनएचएआई हवा में उड़ाता रहा. अब सख्त कार्रवाई होने पर एनएचएआई के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.

बढ़ रहे श्वास रोगी
हाइवे पर लगातार उड़ती धूल उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है, जिनके प्रतिष्ठान हाइवे किनारे हैं. दिन भर उड़ती धूल से ऐसे लोगों को श्वास संबंधी बीमारी हो रही है. इसके अलावा जाम लगने से बाइक सवार और पैदल चलने वाले काफी देर तक खड़े रहते हैं. ऐसे में धूल भरी सांस लेने से लोग बीमार हो रहे हैं. एसएन मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में सांस संबंधी रोगियों की तादाद हर दिन पहुंचती है.

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