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यमुना नदी के नाले में तब्दील होने की ये है दास्तां, ताजमहल की खूबसूरती भी खतरे में

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 14, 2020, 5:37 PM IST
यमुना नदी के नाले में तब्दील होने की ये है दास्तां, ताजमहल की खूबसूरती भी खतरे में
नाले में तब्दील हुई यमुना नदी

यमुना (Yamuna River) में नाले के पानी के फैलाव से उपजे दलदल के कारण ताजमहल पर कीड़ों का आक्रमण होता है. इसकी वजह से ताज महल (Tajmahal) का रंग भी कहीं पीला तो कहीं हरा पड़ता जा रहा है.

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आगरा. ब्रज में यमुना (Yamuna River) का जल काला पड़ चुका है. तीज-त्योहारों पर स्नान करने की बात तो दूर यमुना का जल अब आचमन लायक भी नहीं बचा है. श्रद्धालु (Devotees) सिर्फ यमुना जल का स्पर्श कर निराश होकर लौट जाते हैं. भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की प्रिय रही कालिंदी जिसे यमुना कहते हैं, उसकी दशा संवारने के लिए पिछली सरकारों ने हजारों करोड़ रुपये खर्च कर डाले, लेकिन यमुना का जल निरंतर दूषित होता चला गया. आज हालात यह हैं कि आगरा में ही 61 नाले सीधे यमुना में गिरते हैं. यमुना में नाले के पानी के फैलाव से उपजे दलदल के कारण ताज पर कीड़ों का आक्रमण होता है. इसकी वजह से ताज का रंग भी कहीं पीला तो कहीं हरा पड़ता जा रहा है.

यमुना एक्शन प्लान भी हुआ फेल

जहरीली और काली होकर नदी से नाले का रूप ले चुकी यमुना की न्यूज 18 ने पड़ताल की तो सच सामने आ गया. यमुना एक्शन प्लान 1993 में शुरू किया गया था. इसके बाद 2003 में प्लान का दूसरा फेज शुरू किया गया. इन दोनों फेज में पानी की तरह रुपये बहाये गए. लेकिन सच यही है कि यमुना में नाले सीधे गिर रहे हैं. शहर में 91 नालों में सिर्फ 28 नालों को टेप किया जा सका है. शेष नाले नदी में सीधे गिर रहे हैं.

आगरा-मथुरा में सबसे ज्यादा प्रदूषित यमुना

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना नदी के प्रदूषण की जो रिपोर्ट जारी की थी, उसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ यमुना एक्शन प्लान पर सवाल उठाये थे. आगरा में ताजमहल और मथुरा में वृंदावन, गोकुल के धार्मिक मान्यता के कारण बड़ी रकम यमुना को निर्मल बनाने में खर्च की गई. लेकिन दोनों जगह यमुना सबसे दूषित है. यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए यमुना एक्शन प्लान में 1500 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके बाद 1174 करोड़ रुपये की योजना फिर से बनाई गई. नमामि गंगे योजना के तहत 460 करोड़ रुपये यमुना सफाई के लिए दिए गए हैं, लेकिन यमुना दिन ब दिन दूषित होती चली गई. कैलाश घाट से ताजमहल के बीच यमुना नदी अन्य जगह की अपेक्षा पांच गुना अधिक दूषित है.

Tajmahal agra
यमुना में प्रदूषण की वजह से ताजमहल भी खतरे में है.


यमुना में लाखों कपड़े रोज साफ किए जाते हैं. हजारों लोग सुबह से ही कपड़ों के गट्ठर लेकर यमुना को मैली करने में जुट जाते हैं. सबसे दुखद तस्वीर यह है कि पांच दर्जन से अधिक बड़े बड़े नाले शहर की गंदगी समेटे सीधे यमुना में गिर रहे हैं. हाथी घाट पर कभी हजारों लोग यमुना की निर्मलता के कायल थे लेकिन यहीं पर यमुना नाले में बदल चुकी है.पावन नदी के नाले में तब्दील होने के पीछे स्थानीय सिस्टम

पावन नदी के नाले में तब्दील होने के पीछे स्थानीय सिस्टम है, जो आज तक न तो नदी में कपड़े धोने पर रोक लगा सका और ना ही यमुना में पशुओं के स्नान पर पाबंदी लगा सका. सुप्रीम कोर्ट से लेकर सीएम योगी तक के कड़े निर्देशों के बावजूद यमुना स्वच्छ रहे इसके प्रयास नहीं किए जा रहे हैं. यमुना नदी आगरा के आखिरी हिस्से में जब चंबल से मिल जाती है तब एक बार फिर नाले से बदलकर नदी का रूप धारण करती है. मथुरा और आगरा में भारी प्रदूषण के कारण यमुना नाले सी लगती है. इटावा से आगे जब सिन्डौस में पचनदा में चंबल, क्वारी, सिंद, पहूज नदी यमुना में मिलती है, तब यमुना फिर से नाले से नदी में तब्दील होती है. पचनदा से आगे यमुना की जल गुणवत्ता में एकदम बदलाव आता है. यही वजह है कि प्रयागराज में प्रवेश से पहले कम प्रदूषित नजर आने लगती है.

ताजमहल हो रहा बदरंग

यमुना में नाले के पानी के फैलाव से उपजे दलदल के कारण ताज पर कीड़ों का आक्रमण होता है. इसकी वजह से ताज का रंग भी कहीं पीला तो कहीं हरा पड़ता जा रहा है. ताज को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी कई बार सख्त चेतावनी दे चुका है. ताजमहल के पीछे यमुना अत्यंत दूषित होकर नाले के रूप में नजर आती है, इसी वजह से यहां से ताजमहल पर गोल्डी काइरोनोमस नामक कीड़े उत्तरी दीवार के रंग को पिछले तीन साल से खराब कर रहे हैं. ताजमहल की चार से पांच बार मडपैक ट्रीटमेंट कर सफाई की जा चुकी है. लेकिन जब तक यमुना साफ नहीं होगी तब तक ताजमहल की चमक फीकी होती रहेगी.

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First published: January 14, 2020, 4:40 PM IST
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