कांशीराम के 'डीजल इंतजामिया' रहे आरके चौधरी को अखिलेश यादव ने ज्वाइन कराई समाजवादी पार्टी

कांशीराम के करीबी रहे आरके चौधरी सपा में शामिल हो गए हैं. (फाइल फोटो)

कभी बसपा (BSP) सुप्रीमो कांशीराम (Kanshiram) के 'डीजल इंतजामिया' रहे आरके चौधरी (RK Chaudhary) को यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपनी पार्टी में शामिल किया है.

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इटावा. अखिलेश यादव के साथ आने वाले आरके चौधरी कभी कांशीराम के 'डीजल इंतजामिया' हुआ करते थे. बदलते समीकरणों के बीच दलितों की राजनीतिक निष्ठाएं भी बदल रही हैं, उनको अपने बूते कामयाबी मिलती हुई नहीं दिखाई दे रही है. इसी कारण वो अपने लिए नए-नए घरों की तलाश में जुट गए हैं. बीते 8 मार्च को उत्तर प्रदेश के लखलऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष बसपा के संस्थापकों में एक आरके चौधरी ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है.

ऐसे में उनके पुराने दिनों की याद आना बेहद ही लाजमी है. यूपी के पासी समाज पर मजबूत पकड़ रखने वाले आरके चौधरी ने बहुजन समाज पार्टी से अलग होने के बाद बहुजन समाज स्वाभिमान संघर्ष समिति (बीएस-4) बनाई थी. बीएसपी के संस्थापक कांशीराम के भरोसेमंद रहे आरके चौधरी लखनऊ, फैजाबाद और इलाहाबाद मंडल में गहरी पकड़ रखते हैं.

इनके आने से समाजवादी पार्टी को दलित समाज में गैर जाटव चेहरे का एक बड़ा नेता मिला है. जून 2016 में बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने बीएसपी प्रमुख मायावती पर विधानसभा चुनाव के टिकट नीलाम करने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी. समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले आरके चौधरी कभी कांशीराम की गाडि़यों के लिए तेल पानी के इंतजाम किया करते थे. लेकिन, अब उनके सपा में शामिल होने के बाद वह क्षण याद आता है.

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1991 मे कांशीराम को इटावा ने चमका दिया

कैसे 1991 मे कांशीराम के उत्तर प्रदेश की इटावा संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के दरम्यान चैधरी ने उनकी गाड़ियों के लिए तेल पानी का काम देखा. बेहतर काम करने के एवज में आरके चौधरी को इसी कारण परिवहन मंत्रालय जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई. समाजवादी महानायक मुलायम सिंह यादव के गृह जिले इटावा के लोगों ने कांशीराम को एक ऐसा मुकाम हासिल कराया जिसकी कांशीराम को एक अर्से से तलाश थी.

कहा यह जाता है कि 1991 के आम चुनाव में इटावा में जबरदस्त हिंसा के बाद पूरे जिले के चुनाव को दोबारा कराया गया था. दोबारा हुए चुनाव में बसपा सुप्रीमो कांशीराम ने खुद संसदीय चुनाव में उतरे. मुलायम सिंह यादव ने समय की नब्ज को समझा और कांशीराम की मदद की जिसके एवज मे कांशीराम ने बसपा से कोई प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव के लिये जसवंतनगर विधानसभा से नहीं उतारा, जबकि जिले की हर विधानसभा से बसपा ने अपने प्रत्याशी उतरे थे.

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चुनाव लड़ने के दौरान कांशीराम इटावा मुख्यालय के पुरबिया टोला रोड पर स्थित अनुपम होटल में करीब एक महीने रहे थे. वैसे अनुपम होटल के सभी 28 कमरो को एक महीने तक के लिये बुक करा लिया गया था. लेकिन, कांशीराम खुद कमरा नंबर 6 मे रुकते थे और 7 नंबर में उनका सामान रखा रहता था. इसी होटल में कांशीराम ने अपना चुनाव कार्यालय भी खोला था. अनुपम होटल के मालिक बल्देव सिंह वर्मा बताते हैं कि कांशीराम के चुनाव में गाड़ियों के लिये डीजल आदि की व्यवस्था देखने वाले आरके चौधरी बाद में उत्तर प्रदेश में सपा बसपा की सरकार में परिवहन मंत्री बने.

नीले रंग से गाड़ी में पेंट कराने का दिया था आइडिया

उनका कहना है कि चुनाव के वक्त अधिकाधिक लोग कांशीराम अपने निजी लोग बाहर से ही लेकर आये हुए थे. उनमे से एक आरके चौधरी भी थे. उसी समय काग्रेंस से पुराने काग्रेस श्री शंकर तिवारी भी चुनाव लड़ रहे थे जो होटल से चंद कदम की ही दूरी पर रहा करते थे. होटल को बसपा कार्यालय के लिए दिये जाने के कारण उनके काफी नाराजगी भी हुई, लेकिन नतीजे आने के बाद कांशीराम की जीत ने सब कुछ बदल दिया. इटावा में चुनाव प्रचार के दरम्यान कांशीराम को पंसद सबसे ज्यादा पंसद आने वाले नीला रंग से आरके चौधरी ने उनकी कंटेसा गाड़ी उसी रंग से पुतवा देने का आइडिया दिया, जिसे कांशीराम ने ना केवल स्वीकार किया बल्कि पूरे चुनाव प्रचार मे कांशीराम ने सिर्फ इसी गाड़ी से प्रचार किया.

कांशीराम के पुराने वफादार और 1991 के चुनाव प्रभारी खादिम अब्बास ने भी होटल मालिक बल्देव वर्मा की बातों की पुष्टि करते हुए पुरानी बातों को याद करते हुए बताया कि यह बात पूरी तरह से सही है कि जब कांशीराम साहब ने चुनाव लड़ा तो आरके चौधरी के हाथों उनकी और काफिले की गाड़ियों में तेल आदि डलवाने का इंतजाम हुआ करता था उनकी लगन और मेहनत देखने के बाद साहब ने उनको अपना करीबी बनाया. खादिम बताते हैं कि कांशीराम की इस जीत के बाद उत्तर प्रदेश में मुलायम और कांशीराम की जो जुगलबंदी शुरू हुई इसका लाभ उत्तर प्रदेश में 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार काबिज होकर मिला.
सपा सरकार में बने थे परिवहन मंत्री

बसपा के सहयोग से बनी मुलायम सरकार में बिना निर्वाचित हुए भी आरके चौधरी को परिवहन मंत्री बनाया गया उसके बाद आरके चौधरी को इलाहबाद के मंझनपुर से उपचुनाव मे उतारा गया. जहां से वे चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे. अब अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव की ही तरह दलित नेताओं को अपने साथ मिलाने का रणनीतिक कदम उठाते हुए एक नये मिजाज को शुरू किया है, जिसके नतीजे का हर किसी को इंतजार रहेगा.

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