AMU के निर्देश के बाद मदरसे का यूटर्न, कहा- अब कैंपस में नहीं बनेगा मंदिर

एएमयू प्रशासन का कहना है कि अगर मदरसे में बिना परमिशन कोई भी निर्माण कार्य हुआ तो एएमयू इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करेगा.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 19, 2019, 7:49 PM IST
AMU के निर्देश के बाद मदरसे का यूटर्न, कहा- अब कैंपस में नहीं बनेगा मंदिर
एएमयू में नहीं बनेगा कोई मंदिर (फाइल फोटो)
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Updated: July 19, 2019, 7:49 PM IST
सलमा अंसारी के मदरसे में मंदिर बनाने के मामले में एक नया मोड़ आया है. एएमयू प्रशासन का कहना है कि सलमा अंसारी को मदरसे की जमीन 10 साल के लिए लीज पर दी गई थी और नियमानुसार उस पर वह कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है. एएमयू प्रशासन का कहना है कि अगर मदरसे में बिना परमिशन कोई भी निर्माण कार्य हुआ तो एएमयू इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करेगा.

एएमयू  के इस ऐलान के बाद मदरसे ने भी यू टर्न लिया है. अब तक मंदिर निर्माण की बात कहने वाला मदरसा प्रशासन अब वहां कोई नया मंदिर नहीं बना रहा बल्कि कुछ दिन पहले एक कमरे में जो पूजा और नमाज की व्यवस्था मदरसा प्रशासन ने की थी अब मदरसे में वहीं पूजा की व्यवस्था रहेगी.

एक ही कमरे में बच्चे पूजा भी करते हैं और नमाज भी पढ़ते हैं
सलमा अंसारी अलीगढ़ में अलनूर चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत मदरसा चाचा नेहरू चला रही हैं. मदरसे में करीब चार हजार बच्चे हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने मीडिया के सामने घोषणा की थी कि वो मदरसा में मंदिर व मस्जिद का निर्माण कराएंगी. मंदिर बनाने का निर्णय हिन्दू बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है.  मदरसा में मंदिर निर्माण की खबर जैसी ही फैली, आलोचना शुरू हो गई लेकिन सलमा ने इसकी चिंता किए बगैर मंदिर निर्माण से पहले ही हिन्दू बच्चों के लिए पूजा की व्यवस्था कर दी. एक ही कमरे में बच्चे पूजा भी करते हैं और नमाज भी पढ़ते हैं.

लीज पर है चाचा नेहरू मदरसे की जमीन
मदरसे में मंदिर निर्माण की भनक जब एएमयू प्रशासन को लगी, प्रशासन ने कार्रवाई करने की बात कही.  एएमयू के पीआरओ उमर पीरजादा ने बताया कि चाचा नेहरू मदरसे को वह जमीन एएमयू ने गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए करीब तीन साल पहले लीज पर दी है. इस लीज की मियाद दस वर्ष की है. इस लीज की जमीन पर बिना अनुमति के कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो सकता. अगर कोई निर्माण होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

'मदरसे में मंदिर की कोई जरूरत नहीं है'
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वही एएमयू के थिओलॉजी विभाग से जुड़े व् इस्लामिक मामलों के जानकार प्रोफेसर मुफ़्ती जाहिद का कहना है कि अगर एएमयू ने जमीन लीज पर देते हुए कुछ शर्तें लगाईं थी तो वहां क्लास के सिवा कोई निर्माण नहीं होना चाहिए. वहां मदरसे में मंदिर की कोई जरूरत नहीं है. ये बिना वजह की कॉन्ट्रोवर्सी है. सलमा अंसारी को खुद बचना चाहिए. आजकल मंदिर और मस्जिदों पर सियासत हो रही है.

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First published: July 19, 2019, 7:49 PM IST
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