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आगरा:-मिलिए बॉक्सिंग के ऐसे कोच से जिन्होंने युवा खिलाड़ियों के नाम ही कर दी अपनी जिंदगी

यह कहानी है आगरा (Agra) के अकोला (Akola) गांव के रहने वाले शिशुपाल चाहर (Shishupal Chahar) की.शिशुपाल चाहर को बचपन से ह ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट :- हरीकान्त शर्मा

    यह कहानी है आगरा (Agra) के अकोला (Akola) गांव के रहने वाले शिशुपाल चाहर (Shishupal Chahar) की.शिशुपाल चाहर को बचपन से ही बॉक्सर बनने का शौक था.पिता गांव में खेती करते थे.आर्थिक स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं थी.कोचिंग के लिए भी पैसे नहीं थे.थोड़े बहुत पैसे इकट्ठा कर भिवानी चले गये और वहां पर उन्होंने बॉक्सर बनने की ट्रेनिंग ली.इसी बीच उनके पिताजी का देहांत हो गया.मजबूरन घर की जिम्मेदारियां शिशुपाल के कंधों पर आ गयीं.ना चाहते हुए भी उन्हें अपने खेल बॉक्सिंग से समझौता करना पड़ा.लेकिन शिशुपाल ने हार नहीं मानी और आगरा के मधु नगर क्षेत्र में ताल फिरोज खान में श्री घासी बाबा स्पोर्ट्स डेवलपमेंट सोसाइटी के नाम से एकेडमी बनाई और यहां के बच्चों को निशुल्क बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं .

    2014 में की थी निशुल्क कोचिंग देने की शुरुआत,लगभग 50 से 60 बच्चों को दे रहे हैं ट्रेनिंग

    शिशुपाल चाहर का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है.वह खुद नेशनल लेवल के बॉक्सर रहे हैं. 2013 में उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था.तब वे अपनी भिवानी की ट्रेनिंग छोड़कर वापस घर लौट आये थे. लेकिन उन्होंने अपने सपने को जीना नहीं छोड़ा. 2014 में उन्होंने आगरा के ताल फिरोज खाँ में बॉक्सिंग की कोचिंग खोली.यहां पर बच्चों को निशुल्क बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं.शुरुआत में उनके पास कम बच्चे आए थे.धीरे-धीरे संख्या में इज़ाफ़ा हुआ.लिहाज़ा अब 50 से 60 बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं.उनमें से कई ऐसे बच्चे हैं जो स्टेट लेवल पर खेलकर आगे बढते जा रहे हैं.

    खुद अपने दम पर साफ सफाई कर तैयार की बॉक्सिंग की रिंग

    शुरुआत में शिशुपाल चाहर की आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं थी.अपने पास जमा पूंजी से उन्होंने अपनी एकेडमी खोली.शुरुआत में जगह को लेकर दिक्कत हुई.ताल फिरोज खां में पानी की टंकी के पास जल निगम की जगह थी.यहां पर बेहद गंदगी पड़ी हुई थी,लोग खुले में कूड़ा फैलाते थे,आवारा पशु घूमते रहते थे.उन्होंने अपने खर्चे पर इस जगह को समतल किया ,पेड़ पौधे लगाए साथ ही यहां बॉक्सिंग के लिये रिंग तैयार की.शुरुआत में आसपास के लोगों का विरोध भी देखने को मिला, क्योंकि वहां असामाजिक तत्वों के लोग आए दिन लड़ाई झगड़ा करते रहते थे.

    कई बच्चों का हो चुका है स्टेट लेवल पर सिलेक्शन, नेशनल की है तैयारी

    शिशुपाल चाहर की एकेडमी में लगभग 20 से ज्यादा स्टूडेंट स्टेट लेवल खेलकर आगे बढ़ चुके हैं.हाल ही में एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहीं सीमा का अंडर 17 में सिलेक्शन हुआ है.इसके साथ-साथ स्वाति और कल्पना नेशनल प्लेयर हैं और आगरा का नाम रोशन कर रही हैं. धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती जा रही है.आसपास की बस्ती के बच्चे भी अब बढ़-चढ़कर इस में भाग ले रहे हैं.रोजाना सुबह शाम पांच से 6:30 बजे तक निशुल्क बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दी जा रही हैं.जिसमें 5 साल से ऊपर के बच्चे रोजाना पसीना बहाते हैं.

    बिना किसी सपोर्ट के बच्चों को कर रहे हैं ओलंपिक लिए तैयार

    भारी मन से शिशुपाल कहते हैं कि उन्होंने एक सपना देखा है कि आगरा के बच्चे भी ओलंपिक में मेडल लेकर आएं और आगरा का नाम रोशन करें.लेकिन यहां के क्षेत्रीय विधायक, क्षेत्र के सांसद की या कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिली है.वे सेल्फ के खर्चे पर एकेडमी चलाते हैं.इसके लिए उन्हें कई बार नौकरी भी करनी पड़ती है.गांव में थोड़ी खेती है जिससे आने वाले पैसे को वह अपनी एकेडमी में लगा देते हैं. बॉक्सिंग के लिए ग्लब्स, हेलमेट, जिम का सामान ये सारी चीजें बेहद महंगी आती हैं.अगर उन्हें अपने जनप्रतिनिधियों का सपोर्ट मिलता है तो वह जल्द अपने बच्चों को ओलंपिक में देख पाएंगे .

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